यूपी के स्कूलों में टूटी झिझक की दीवार: 68 हजार से अधिक विद्यालयों में बने एमएचएम क्लब, स्थापित हुए पैड बैंक

उत्तर प्रदेश के स्कूलों में मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन को मिली नई मजबूती। 68 हजार से अधिक विद्यालयों में एमएचएम क्लब और 66 हजार में पैड बैंक स्थापित।

By INA News Desk
Oct 9, 2026 - 08:04
22 Views
यूपी के स्कूलों में टूटी झिझक की दीवार: 68 हजार से अधिक विद्यालयों में बने एमएचएम क्लब, स्थापित हुए पैड बैंक
Advertisement
Advertisement
  • झिझक की टूट रही दीवार, योगी सरकार में बेटियों के लिए सशक्त एमएचएम व्यवस्था
  • 68,358 विद्यालयों में गठित किए जा चुके हैं एमएचएम क्लब, 66,045 स्कूलों में स्थापित हुए पैड बैंक
  • 63,633 विद्यालयों में बच्चों के साथ और 63,928 में शिक्षकों के साथ हुआ मासिक धर्म स्वच्छता पर संवाद
  • 450 मास्टर ट्रेनर्स का प्रशिक्षण शुरू, पहले चरण में 209 मास्टर ट्रेनर्स की राज्य स्तरीय कार्यशाला
  • पाठ्यक्रम में मासिक धर्म स्वच्छता संबंधी विषयवस्तु शामिल, ‘प्रगति के पंख’ पुस्तिका में भी जागरूकता गतिविधियां

लखनऊ। योगी सरकार बेटियों के स्वास्थ्य, स्वच्छता और गरिमा को विद्यालयी व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनाते हुए मासिक धर्म स्वास्थ्य प्रबंधन (एमएचएम) को व्यापक रूप से मजबूत कर रही है। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा मोनिका रानी के निर्देशानुसार प्रदेश के विद्यालयों में मासिक धर्म को लेकर झिझक और संकोच दूर करने के साथ छात्राओं को आवश्यक सुविधाएं और सही जानकारी उपलब्ध कराने पर लगातार काम किया जा रहा है। इसका असर विद्यालय स्तर पर दिखाई भी दे रहा है। 

प्रदेश में अब तक 68,358 विद्यालयों में एमएचएम क्लब गठित, 66,045 विद्यालयों में पैड बैंक स्थापित, 63,633 विद्यालयों में बच्चों के साथ जागरूकता सत्र और 63,928 विद्यालयों में शिक्षकों के साथ एमएचएम के बिंदुओं पर चर्चा की जा चुकी है।

इसको और गति देने के लिए 13 और 14 अगस्त 2026 को राज्य परियोजना कार्यालय में 209 मास्टर ट्रेनर्स की कार्यशालाएं आयोजित की गई थीं। इसके बाद 9 से 25 सितंबर 2026 के बीच प्रदेश के 450 मास्टर ट्रेनर्स का प्रशिक्षण पूर्ण हुआ। इससे विद्यालय स्तर पर मासिक धर्म स्वास्थ्य प्रबंधन से जुड़ी जानकारी और गतिविधियों को और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

विद्यालयों में सुविधा के साथ जागरूकता का तंत्र
एमएचएम व्यवस्था को सिर्फ सैनिटरी नैपकिन की उपलब्धता तक सीमित नहीं रखा गया है। विद्यालयों में एमएचएम क्लब और पैड बैंक के माध्यम से छात्राओं को जरूरी सुविधा उपलब्ध कराने के साथ जागरूकता गतिविधियों को भी नियमित रूप दिया जा रहा है। शनिवार को मीना मंच के अंतर्गत होने वाली गतिविधियों में मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन और महत्वपूर्ण आपातकालीन सहायता नंबरों से संबंधित सत्र भी आयोजित किए जा रहे हैं। विद्यालय स्तर पर किशोर एवं किशोरियों के लिए साप्ताहिक गतिविधि आधारित पुस्तिका ‘प्रगति के पंख’ में भी मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन तथा डॉ. जया ठाकुर बनाम भारत सरकार एवं अन्य से संबंधित पारित निर्णय की जानकारी को शामिल करते हुए टीएलएम/प्रशिक्षण गतिविधियों को आगे बढ़ाया गया है।

450 मास्टर ट्रेनर्स को किया जा रहा प्रशिक्षित
प्रदेश स्तर पर मास्टर ट्रेनर्स की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण का विशेष अभियान चलाया गया। अगस्त में 209 मास्टर ट्रेनर्स की राज्य स्तरीय कार्यशालाएं आयोजित की गई, जबकि सितंबर में 450 मास्टर ट्रेनर्स का प्रशिक्षण पूर्ण हुआ। इससे मासिक धर्म स्वास्थ्य प्रबंधन से जुड़ी जानकारी को विद्यालयों तक व्यवस्थित रूप से पहुंचाने में मदद मिल रही है।

पाठ्यक्रम में भी शामिल हुई मासिक धर्म स्वच्छता
मासिक धर्म स्वच्छता को विद्यालयी शिक्षा की नियमित गतिविधियों से जोड़ने के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, उत्तर प्रदेश की ओर से भी पहल की गई है। प्रचलित पाठ्यक्रम पर आधारित पाठ्यपुस्तकों में मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन संबंधी जागरूकता की विषयवस्तु का समावेशन किया गया है। इससे छात्राओं के साथ-साथ विद्यार्थियों और शिक्षकों के बीच मासिक धर्म से जुड़े विषयों पर सहज संवाद का वातावरण तैयार करने में मदद मिलेगी।

सुविधा, जागरूकता और सम्मान; तीनों पर एक साथ जोर
योगी सरकार की एमएचएम व्यवस्था का उद्देश्य बेटियों को सिर्फ जरूरी सामग्री उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि विद्यालयों में ऐसा वातावरण तैयार करना है जहां मासिक धर्म को लेकर झिझक कम हो, सही जानकारी मिले और छात्राएं पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी पढ़ाई जारी रख सकें। इसके लिए स्वच्छ शौचालय, पानी और हाथ धोने की सुविधा से लेकर सैनिटरी नैपकिन, पैड बैंक, एमएचएम क्लब, सुरक्षित निस्तारण, शिक्षक प्रशिक्षण और जागरूकता गतिविधियों तक पूरी व्यवस्था को एक साथ मजबूत किया जा रहा है।

“योगी सरकार बेटियों के स्वास्थ्य, स्वच्छता और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विद्यालयों में ऐसा सुरक्षित और सहज वातावरण तैयार कर रही है, जहां मासिक धर्म उनकी पढ़ाई या आत्मविश्वास में बाधा न बने। प्रदेश में एमएचएम क्लब, पैड बैंक, जागरूकता सत्र और मास्टर ट्रेनर्स के प्रशिक्षण के माध्यम से इस व्यवस्था को लगातार मजबूत किया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि हर बेटी को जरूरी सुविधा, सही जानकारी और सम्मानजनक वातावरण मिले, ताकि वह पूरे आत्मविश्वास के साथ शिक्षा की राह पर आगे बढ़ सके।”
                                                                          - संदीप सिंह, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

Advertisement
Advertisement