यूपी कौशल विकास मिशन: योगी सरकार की बड़ी पहल, 936 ट्रेनिंग प्रदाता संवारेंगे 1 लाख से अधिक युवाओं का भविष्य

उत्तर प्रदेश सरकार ने कौशल विकास मिशन के तहत दूसरे चरण का लक्ष्य जारी किया। 936 ट्रेनिंग पार्टनर्स 1 लाख से अधिक युवाओं को देंगे रोजगारपरक प्रशिक्षण।

By INA News Desk
Jul 2, 2026 - 22:23
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यूपी कौशल विकास मिशन: योगी सरकार की बड़ी पहल, 936 ट्रेनिंग प्रदाता संवारेंगे 1 लाख से अधिक युवाओं का भविष्य
राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार कपिल देव अग्रवाल

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार राज्य के युवाओं को रोजगार के नए अवसरों से जोड़ने और आधुनिक तकनीकी में कुशल बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। इसी उद्देश्य के साथ उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन ने राज्य कौशल विकास निधि योजना के तहत छोटे समय के प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे चरण के लक्ष्यों की घोषणा कर दी है। व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार कपिल देव अग्रवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को ध्यान में रखते हुए प्रदेश को तकनीकी शिक्षा में आगे ले जाने का प्रयास किया जा रहा है। इसी के तहत युवाओं को नई तकनीक से जोड़ने के लिए हर पाठ्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सॉफ्ट स्किल की पढ़ाई को अनिवार्य किया गया है। इस पूरे कार्यक्रम की निगरानी मुख्यालय से सीधे तौर पर की जाएगी और इसके लिए सभी केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना जरूरी कर दिया गया है।

नियमों के अनुसार कोर्सेज की सबसे ज्यादा अवधि 900 घंटे की होगी, जबकि आवासीय केंद्रों पर हर दिन कम से कम 8 घंटे की क्लास चलाना जरूरी होगा। युवाओं की सामान्य समझ को बेहतर करने के लिए केंद्रों पर रोज हिंदी और अंग्रेजी के समाचार पत्र भी रखे जाएंगे। पारदर्शिता को पूरी तरह बनाए रखने के लिए इस बार लक्ष्य तय करने में आधुनिक डिजिटल डैशबोर्ड का उपयोग किया गया है। जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाई की रिपोर्ट के आधार पर ही सभी 936 प्रदाताओं को जिम्मेदारी दी गई है। इस बार स्वास्थ्य सेवा, इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी, फूड प्रोसेसिंग, कपड़ा और हस्तशिल्प जैसे नए जमाने के क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। नए तकनीकी संस्थान सिर्फ भविष्य की जरूरतों से जुड़े विषयों पर ही युवाओं को प्रशिक्षण दे सकेंगे।

कौशल विकास राज्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जब तक प्रशिक्षण देने वाली संस्थाएं मिशन के साथ जरूरी लिखित समझौता नहीं कर लेतीं, तब तक उन्हें बैच शुरू करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार के पास बजट और जरूरतों के हिसाब से लक्ष्यों में बदलाव करने का पूरा अधिकार सुरक्षित है। यदि किसी संस्थान के काम में देरी या गड़बड़ी पाई गई, तो बिना किसी ढिलाई के कड़ी कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। मिशन निदेशक पुलकित खरे के अनुसार कुल 936 प्रदाताओं में से 831 निजी, सरकारी और स्टार्ट-अप प्रदाताओं को 91,425 युवाओं को सिखाने का काम मिला है, जबकि 105 औद्योगिक संस्थानों को 14,650 युवाओं को तैयार करने का जिम्मा सौंपा गया है।

प्रशिक्षण के बाद युवाओं के लिए रोजगार के रास्ते खोले जाएंगे। कोर्स खत्म होने के बाद कम से कम 70 प्रतिशत उपस्थिति वाले छात्र-छात्राओं को ही रोजगार मेलों में शामिल होने का अवसर मिलेगा। परीक्षा परिणाम आने के 90 दिनों के भीतर युवाओं को काम दिलाना अनिवार्य होगा, और नौकरी मिलने के बाद भी पूरे एक साल तक उनकी स्थिति पर नजर रखी जाएगी। संस्थाओं के लिए समय से काम शुरू करने के लिए एक सख्त समय-सारिणी तय की गई है, जिसके पालन के बाद ही आगे की प्रक्रियाएं पूरी होंगी।

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