वाराणसी के आसमान में वायु सेना का पराक्रम, 12 एयरबेस से पहुंचे 100 विमानों ने किया हैरतअंगेज पूर्वाभ्यास
काशी के आसमान में भारतीय वायु सेना के 100 विमानों ने एयर शो का भव्य पूर्वाभ्यास किया। राफेल, सुखोई और तेजस ने गंगा तट पर अपनी सामरिक शक्ति का प्रदर्शन किया।
धार्मिक नगरी वाराणसी के आकाश में भारतीय वायु सेना की अदम्य सामरिक शक्ति और तकनीकी कुशलता की मनमोहक झलक देखने को मिली। आगामी तीन दिवसीय विशाल एयर शो के पूर्व अभ्यास के तहत देश भर के 12 प्रमुख वायु सेना अड्डों से पहुंचे लगभग 100 अत्याधुनिक विमानों और लड़ाकू हेलिकॉप्टरों ने गंगा की लहरों के ऊपर अपने रणकौशल का पूर्वाभ्यास किया।

इस अभूतपूर्व नजारे को देखने के लिए विभिन्न शिक्षण संस्थानों के छात्र-छात्राओं और स्थानीय नागरिकों का भारी हुजूम घाटों पर उमड़ पड़ा, जिन्होंने आसमान में भारतीय वायु शक्ति की गर्जना को प्रत्यक्ष रूप से देखा और सराहा।

पूर्वाभ्यास के दौरान लड़ाकू बेड़े के अत्याधुनिक विमानों जैसे राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, मिराज-2000, स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस, मिग-29 और जगुआर ने आकाश को चीरते हुए तीव्र गति से करतब दिखाए। इसके साथ ही भारतीय सेना और नौसेना के टोही व विशेष मिशन विमानों में शामिल सी-295, सी-17 ग्लोबमास्टर, सी-130जे सुपर हरक्यूलिस, एईडब्ल्यूएंडसी, आईएल-78, एएन-32 और पी-8आई ने अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई। रोटरी विंग दस्ते से लड़ाकू हेलिकॉप्टर अपाचे, भारी मालवाहक चिनूक, स्वदेशी हल्के लड़ाकू हेलिकॉप्टर प्रचंड, उन्नत हल्के हेलिकॉप्टर एएलएच मार्क-3, एएलएच मार्क-4, चेतक, कामोव-31 और एमआई-17 वी5 ने नदी तट के समानांतर सटीक संतुलन और गतिशीलता का प्रदर्शन किया।

इस भव्य अभ्यास की सबसे अनूठी विशेषता भारतीय संस्कृति और काशी की समृद्ध विरासत को समर्पित विशेष वायु संरचनाएं रहीं। वायु सेना के जांबाज पायलटों ने काशी, वरुण, केदार, हनुमान, सारनाथ, सारंग, ओंकार, गंगा, रुद्र, भागीरथी, त्रिदेव, अलकनंदा, भैरव, कैलाश, त्रिलोचन, नटराज, महादेव, विश्वनाथ, पशुपति, नीलकंठ, प्रचंड, असि और दशाश्व जैसे सांस्कृतिक नामों पर आधारित विशेष फॉर्मेशन्स में उड़ान भरी। गंगा के सुरम्य घाटों की पृष्ठभूमि में गूंजती जेट इंजनों की आवाज और तिरंगे के रंगों से सजे आकाश ने उपस्थित जनसमूह में राष्ट्रीय गौरव और देशभक्ति का नया संचार किया।
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