बकरीद से पहले सूरत में जाली नोट चलाने वाले गिरोह का पर्दाफाश: नकली नोट देकर क़ुरबानी के लिए खरीदे बकरे।
गुजरात के औद्योगिक शहर सूरत से एक बेहद हैरान करने वाला और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां आगामी त्योहार बकरीद
- राजस्थान के पशु व्यापारी से ठगी करने वाले चार शातिर आरोपी दबोचे: सचिन पुलिस ने चंद घंटों में सुलझाया मामला
- आरोपियों के पास से पांच सौ रुपये के भारी मात्रा में जाली नोट बरामद: घटना में प्रयुक्त बुलेट मोटरसाइकिल और बकरे जब्त
गुजरात के औद्योगिक शहर सूरत से एक बेहद हैरान करने वाला और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां आगामी त्योहार बकरीद के मद्देनजर सक्रिय हुए एक अंतरराज्यीय ठग गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह निर्दोष और सीधे-सादे पशु व्यापारियों को अपना निशाना बनाकर बाजार में नकली भारतीय मुद्रा खपाने का अवैध धंधा कर रहा था। सूरत शहर के सचिन थाना क्षेत्र की पुलिस ने इस मामले में बेहद मुस्तैदी और तत्परता दिखाते हुए घटना के कुछ ही घंटों के भीतर कार्रवाई की और जाली नोटों के जरिए व्यापार करने वाले चार मुख्य आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। इस त्वरित पुलिसिया कार्रवाई से न केवल पीड़ित व्यापारी को इंसाफ मिला है, बल्कि आगामी त्योहार के सीजन में बाजारों में नकली नोट फैलाने की एक बहुत बड़ी साजिश को समय रहते नाकाम कर दिया गया है।
यह पूरा घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब राजस्थान के नागौर जिले से एक पशु कारोबारी, जिनका नाम भंवरलाल भागरिया है, अपने बकरों को बेचने के लिए सूरत के सचिन इलाके में आए थे। बकरीद के त्योहार के पास आने के कारण गुजरात के विभिन्न बाजारों में बकरों की मांग बहुत ज्यादा बढ़ जाती है, जिसके चलते पड़ोसी राज्यों से कई छोटे-बड़े व्यापारी यहां व्यापार करने आते हैं। भंवरलाल भी अच्छी कमाई की उम्मीद में अपने बेहतरीन बकरे लेकर सूरत पहुंचे थे, जहां उनका सामना इस शातिर गिरोह से हुआ। आरोपियों ने भंवरलाल के बकरों को पसंद किया और उनके साथ बकायदा मोल-तोल करके व्यापारिक सौदा तय किया, जिससे व्यापारी को जरा भी अंदाजा नहीं हुआ कि वह ठगों के जाल में फंसने जा रहा है।
आरोपियों ने व्यापारी भंवरलाल भागरिया से कुल पचास हजार रुपये की तय कीमत में दो बेहद तंदुरुस्त बकरे खरीदे। सौदा पक्का होने के बाद आरोपियों ने भंवरलाल को पांच-पांच सौ रुपये के नोटों की एक गड्डी थमा दी और बकरों को लेकर तुरंत वहां से रफूचक्कर हो गए। कुछ समय बाद जब पशु व्यापारी ने शांत दिमाग से मिले हुए रुपयों की गिनती शुरू की और नोटों के कागज तथा छपाई को ध्यान से परखा, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। गहराई से जांच करने पर यह बेहद चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि आरोपियों द्वारा दिए गए कुल सौ नोटों में से नब्बे से अधिक नोट पूरी तरह से नकली और जाली थे। इस बड़ी ठगी का शिकार होने के बाद पीड़ित व्यापारी ने बिना समय गंवाए सीधे सचिन पुलिस स्टेशन पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई।
सचिन थाने के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मामले की गंभीरता और आगामी त्योहार के संवेनशील समय को देखते हुए तुरंत कई अलग-अलग टीमों का गठन किया। पुलिस ने पीड़ित व्यापारी से आरोपियों के हुलिए और उनकी मोटरसाइकिल के बारे में विस्तृत जानकारी जुटाई और क्षेत्र के सीसीटीवी फुटेज खंगालने शुरू किए। पुलिस की सघन चेकिंग और मुखबिरों से मिले इनपुट के आधार पर संदिग्धों को घेर लिया गया और घेराबंदी करके चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपियों की जामा तलाशी लेने पर पुलिस टीम को उनके पास से पांच-पांच सौ रुपये के कुल 322 नकली नोट बरामद हुए, जिनकी कुल फेस वैल्यू एक लाख इकसठ हजार रुपये आंकी गई है। ये सभी नोट इतनी सफाई से छापे गए थे कि पहली नजर में कोई भी आम इंसान धोखा खा जाए।
पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक पूछताछ में यह भी साफ हो गया है कि इस गिरोह ने बकरों की खरीदारी करने और पुलिस को चकमा देकर तेजी से भागने के लिए एक कीमती बुलेट मोटरसाइकिल का इस्तेमाल किया था, जिसे पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया के तहत जब्त कर लिया है। इसके साथ ही, आरोपियों के कब्जे से व्यापारी भंवरलाल से ठगे गए दोनों बकरों को भी सकुशल बरामद कर लिया गया है, जिन्हें विधिक कार्यवाही पूरी होने के बाद उनके वास्तविक मालिक को सौंप दिया जाएगा। पुलिस इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि इन आरोपियों ने इतनी बड़ी मात्रा में जाली नोट कहां से हासिल किए थे और क्या इनके तार किसी बड़े राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय जाली मुद्रा नेटवर्क से जुड़े हुए हैं।
पकड़े गए आरोपियों का आपराधिक इतिहास भी खंगाला जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्होंने इससे पहले सूरत या गुजरात के अन्य शहरों में इस तरह की वारदातों को अंजाम दिया है या नहीं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, त्योहारों के समय बाजारों में भारी भीड़भाड़ का फायदा उठाकर ऐसे तत्व सक्रिय हो जाते हैं, क्योंकि उस समय व्यापारी जल्दबाजी में नोटों की प्रामाणिकता की जांच नहीं कर पाते हैं। सचिन पुलिस ने इस पूरे नेक्सस को तोड़कर स्थानीय व्यापारियों को एक बड़े आर्थिक नुकसान से बचा लिया है। कोर्ट में आरोपियों को पेश करके उनकी पुलिस रिमांड मांगी जा रही है ताकि जाली नोटों की छपाई के मुख्य स्रोत तक पहुंचा जा सके।
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