Anti Paper Leak Bill: लोकसभा के बाद आज राज्यसभा में पेश होगा एंटी पेपर लीक बिल, तीखी बहस के आसार

लोकसभा से पारित होने के बाद एंटी पेपर लीक बिल आज राज्यसभा में पेश किया जाएगा। बिल पर विस्तृत चर्चा के बाद वोटिंग होगी। जानें इस विधेयक की बड़ी बातें।

Jul 30, 2026 - 15:04
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Anti Paper Leak Bill: लोकसभा के बाद आज राज्यसभा में पेश होगा एंटी पेपर लीक बिल, तीखी बहस के आसार
Anti Paper Leak Bill Rajya Sabha
  • एंटी पेपर लीक बिल पर राज्यसभा में आज चर्चा और वोटिंग, जानें क्या हैं इस विधेयक के कड़े प्रावधान
  • पेपर लीक रोकने के लिए बड़ा कदम! लोकसभा से पास एंटी पेपर लीक बिल आज राज्यसभा में, जानें छात्रों के लिए क्या बदलेगा
  • Anti Paper Leak Bill In Rajya Sabha: लोकसभा के बाद आज उच्च सदन में एंटी पेपर लीक बिल पर होगी चर्चा और वोटिंग

देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और पर्चा लीक की घटनाओं पर अंकुश लगाने के मकसद से लाया गया 'एंटी पेपर लीक बिल' (Public Examinations Bill) लोकसभा से पास होने के बाद आज यानी 30 जुलाई, 2026 को संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में पेश किया जाएगा। केंद्रीय शिक्षा एवं कार्मिक मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत इस महत्वपूर्ण विधेयक पर राज्यसभा में विस्तार से चर्चा की जाएगी, जिसके बाद इस पर मतदान कराया जाएगा। परीक्षाओं की पारदर्शिता और लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ा मुद्दा होने के कारण संसद में गूंज रहे इस विधेयक पर लोकसभा की तर्ज पर ही उच्च सदन में भी सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और हंगामे की पूरी संभावना जताई जा रही है।

देश के विभिन्न राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों द्वारा आयोजित की जाने वाली सार्वजनिक प्रतियोगी परीक्षाओं में शुचिता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार यह कड़ा कानून ला रही है। हाल के वर्षों में कई प्रमुख भर्ती परीक्षाओं और प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक होने तथा अनुचित साधनों के प्रयोग के मामले सामने आए थे। इससे युवाओं में आक्रोश और भ्रम की स्थिति बनी हुई थी।

लोकसभा में विस्तृत चर्चा के बाद इस बिल को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। अब इसे अंतिम विधायी स्वीकृति के लिए राज्यसभा के पटल पर रखा जा रहा है। यदि राज्यसभा में चर्चा के बाद यह बिल सर्वसम्मति या बहुमत से पारित हो जाता है, तो राष्ट्रपति की सहमति मिलने के बाद यह पूरे देश में कानून का रूप ले लेगा।

संसद के वर्तमान सत्र के दौरान केंद्र सरकार ने इस विधेयक को प्राथमिकता के आधार पर पेश किया था। लोकसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान गृह एवं कार्मिक मामलों के राज्य मंत्रियों और शिक्षा मंत्री ने इसके तकनीकी, कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं की जानकारी दी थी। निचले सदन से पारित होने के बाद नियमानुसार इसे अब राज्यसभा की कार्यसूची में शामिल किया गया है।

संसदीय कार्यसूची के अनुसार, आज सदन की कार्यवाही शुरू होने के साथ ही संबंधित मंत्री इस विधेयक को विचार एवं पारित करने के लिए प्रस्तुत करेंगे। इसके बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों को इस बिल पर अपनी बात रखने और सुझाव देने के लिए समय आवंटित किया गया है। चर्चा पूरी होने के उपरांत सदन के सभापति मतदान की प्रक्रिया पूरी कराएंगे।

सरकार का पक्ष: सरकार का कहना है कि यह विधेयक किसी छात्र को प्रताड़ित करने के लिए नहीं, बल्कि संगठित अपराध और पेपर लीक करने वाले भू-माफियाओं (Paper Leak Mafia) तथा गिरोहों पर नकेल कसने के लिए तैयार किया गया है। इसमें कड़े मौद्रिक दंड और लंबी कैद की सजा का प्रावधान किया गया है, जिससे परीक्षा प्रणाली में जनता और छात्रों का विश्वास फिर से कायम हो सके।

विपक्ष की प्रतिक्रिया: विपक्षी दलों ने विधेयक के उद्देश्यों का सामान्य तौर पर समर्थन तो किया है, लेकिन परीक्षा आयोजित करने वाली राष्ट्रीय एजेंसियों की जवाबदेही तय करने पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का तर्क है कि कानून बनाने के साथ-साथ परीक्षा एजेंसियों के आंतरिक तंत्र को भी सुदृढ़ किया जाना चाहिए। इसी बिंदु को लेकर राज्यसभा में भी जोरदार हंगामे और सरकार को घेरने की रणनीति बनाई जा रही है।

इस विधेयक का पास होना भारतीय प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली के लिए एक युगांतरकारी कदम साबित हो सकता है। अब तक कई मामलों में कड़े और स्पष्ट केंद्रीय कानून के अभाव में दोषियों को कड़ी सजा नहीं मिल पाती थी, जिससे उनके हौसले बुलंद रहते थे।

इस कानून के लागू होने के बाद:

परीक्षा में धांधली और पेपर लीक में शामिल संगठित गिरोहों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज होगा।

परीक्षा आयोजित करने वाली सेवा प्रदाता कंपनियों या अधिकारियों की सांठगांठ पाए जाने पर उन पर भारी जुर्माना लगाया जा सकेगा।

यह कानून संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) जैसी तमाम प्रमुख एजेंसियों की परीक्षाओं पर समान रूप से लागू होगा।

राज्यसभा में आज होने वाली चर्चा और वोटिंग पर पूरे देश के छात्रों और अभिभावकों की निगाहें टिकी हैं। यदि उच्च सदन में यह बिल बिना किसी संशोधन के पारित हो जाता है, तो इसे राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलते ही यह अधिनियम बन जाएगा और केंद्र सरकार इसे अधिसूचित कर पूरे देश में लागू कर देगी। इसके साथ ही, केंद्र सरकार राज्यों को भी इस मॉडल कानून के आधार पर अपने यहां कड़े कदम उठाने का सुझाव दे सकती है।

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