IPL फाइनल के दौरान अनुष्का शर्मा के गले में सजी तुलसी की माला बनी चर्चा का केंद्र, सादगी ने जीता प्रशंसकों का दिल
इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 के महामुकाबले और भव्य फाइनल मैच के दौरान खेल के मैदान से इतर मनोरंजन और ग्लैमर
- धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अत्यंत चमत्कारी है तुलसी कंठी धारण करना, मन को शांत और नकारात्मक ऊर्जा को रखता है दूर
- तुलसी की माला धारण करने के लिए शास्त्रों में बताए गए हैं कड़े नियम, तामसिक भोजन के त्याग और सुचिता का पालन है अनिवार्य
इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 के महामुकाबले और भव्य फाइनल मैच के दौरान खेल के मैदान से इतर मनोरंजन और ग्लैमर जगत की एक बेहद खूबसूरत और प्रेरक तस्वीर सामने आई, जिसने देश भर के सांस्कृतिक और धार्मिक हलकों में एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली का उत्साहवर्धन करने के लिए स्टेडियम में मौजूद उनकी धर्मपत्नी और प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा इस खास मौके पर पारंपरिक चकाचौंध से दूर एक बेहद ही सादगीपूर्ण और आध्यात्मिक लुक में नजर आईं। मैच के दौरान और उसके बाद उनकी जो तस्वीरें सोशल मीडिया के विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बहुत तेजी से प्रसारित हुईं, उनमें सबसे विशेष बात यह थी कि उनके गले में तीन फेरों वाली पवित्र तुलसी कंठी माला सजी हुई थी। ग्लैमर की दुनिया के शीर्ष पर होने के बावजूद भारतीय सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक प्रतीकों के प्रति उनकी यह गहरी निष्ठा और झुकाव देखकर उनके प्रशंसक और आम नागरिक बेहद प्रभावित नजर आ रहे हैं और तब से ही लोग तुलसी की माला पहनने के गूढ़ महत्व को जानने के लिए उत्सुक हैं।
सनातन धर्म की प्राचीन परंपराओं और वैदिक शास्त्रों के अनुसार, तुलसी के पौधे को केवल एक वनस्पति नहीं बल्कि साक्षात देवी लक्ष्मी का स्वरूप और भगवान विष्णु की परम प्रिय 'हरिप्रिया' माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति अपने कंठ में तुलसी की लकड़ी से निर्मित पवित्र माला को धारण करता है, उस पर भगवान श्री हरि विष्णु और श्री कृष्ण की असीम अनुकंपा सदैव बनी रहती है। शास्त्रों में यहाँ तक कहा गया है कि तुलसी कंठी धारण करने वाले व्यक्ति के आसपास किसी भी प्रकार की नकारात्मक शक्तियां, बुरी नजर, मानसिक अवसाद या अकाल मृत्यु का भय पूरी तरह से समाप्त हो जाता है। यह माला आत्मा को शुद्ध करने और व्यक्ति के भीतर सात्विक विचारों का संचार करने में एक बेहद शक्तिशाली सुरक्षा कवच की तरह कार्य करती है, जिससे सांसारिक जीवन में रहते हुए भी मनुष्य मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति को आसानी से प्राप्त कर सकता है।
आधुनिक विज्ञान और आयुर्वेद के दृष्टिकोण से भी गले में तुलसी की माला पहनने के पीछे कई अत्यंत लाभकारी और चमत्कारी स्वास्थ्य लाभ छिपे हुए हैं। तुलसी की लकड़ी में एक विशेष प्रकार का प्राकृतिक तेल और औषधीय तत्व पाए जाते हैं, जो लगातार त्वचा के संपर्क में रहने के कारण शरीर के भीतर अवशोषित होते रहते हैं। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, कंठ के समीप स्थित थायराइड ग्रंथि पर तुलसी के दानों का निरंतर दबाव पड़ने से हार्मोनल असंतुलन की समस्या काफी हद तक नियंत्रित रहती है। इसके अतिरिक्त, तुलसी की माला पहनने से व्यक्ति का रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) सामान्य रहता है, मानसिक तनाव और अत्यधिक क्रोध पर नियंत्रण पाने में मदद मिलती है, तथा शरीर का विद्युत चुंबकीय क्षेत्र (इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड) संतुलित रहता है, जो आधुनिक जीवनशैली की भागदौड़ में किसी वरदान से कम नहीं है। भारतीय अध्यात्म में तुलसी की माला को वैष्णव परंपरा का मुख्य और अनिवार्य प्रतीक माना गया है। इसे धारण करने का अर्थ यह होता है कि व्यक्ति ने स्वयं को पूरी तरह से भगवान के चरणों में समर्पित कर दिया है। अनुष्का शर्मा जैसी वैश्विक हस्ती द्वारा इस पवित्र माला को पहनना यह संदेश देता है कि आधुनिकता और सफलता के चरम पर पहुंचकर भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों और धार्मिक सुचिता से जुड़े रहना आंतरिक शांति के लिए कितना आवश्यक है।
यद्यपि तुलसी की माला धारण करने के लाभ अनगिनत हैं, परंतु सनातन शास्त्रों में इसे गले में पहनने को लेकर कुछ बेहद कड़े, अनिवार्य और कूटनीतिक नियमों का उल्लेख किया गया है, जिनका पालन करना प्रत्येक धारक के लिए अत्यंत आवश्यक है। सबसे पहला और महत्वपूर्ण नियम यह है कि तुलसी की माला पहनने वाले व्यक्ति को अपने संपूर्ण जीवन से तामसिक भोजन का पूरी तरह त्याग करना पड़ता है। धारक के लिए मांस, मदिरा, मछली, अंडा और यहाँ तक कि भोजन में प्याज और लहसुन का प्रयोग भी पूरी तरह से वर्जित माना गया है। यदि कोई व्यक्ति इन तामसिक चीजों का सेवन करते हुए तुलसी की माला पहनता है, तो इसे साक्षात हरिप्रिया का घोर अनादर माना जाता है, जिससे शुभ फलों के बजाय जीवन में विपरीत और अनिष्टकारी परिणाम मिलने की आशंका बढ़ जाती है।
भोजन के नियमों के अतिरिक्त, शारीरिक और मानसिक सुचिता का ध्यान रखना भी इस आध्यात्मिक विधा का एक अनिवार्य हिस्सा माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, तुलसी की माला धारण करने के बाद व्यक्ति को किसी भी प्रकार के अनैतिक कृत्य, झूठ बोलने, किसी की निंदा करने या कपटपूर्ण व्यवहार से पूरी तरह बचना चाहिए क्योंकि यह आंतरिक पवित्रता को नष्ट करता है। इसके साथ ही, जीवन के कुछ विशिष्ट अवसरों जैसे परिवार में किसी बच्चे के जन्म के समय (सूतक काल) या किसी प्रियजन के निधन के समय (पातक काल) के दौरान इस पवित्र माला को शरीर से अलग रख देने का विधान है, और बाद में गंगाजल से शुद्धिकरण और पवित्र मंत्रों के जाप के पश्चात ही इसे पुनः धारण किया जाना चाहिए ताकि इसकी पवित्रता अक्षुण्ण बनी रहे।
तुलसी की माला को बाजार से लाकर सीधे गले में पहन लेना भी धार्मिक रूप से अनुचित माना गया है; इसके लिए एक निश्चित और विधि-विधान सम्मत प्रक्रिया निर्धारित है। माला को धारण करने से पूर्व उसे किसी शुभ दिन जैसे एकादशी, पूर्णिमा या श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर गंगाजल और पंचामृत से अच्छी तरह स्नान कराना चाहिए। इसके बाद, भगवान विष्णु या राधा-कृष्ण के विग्रह के चरणों में माला को समर्पित कर 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' या महामंत्र का कम से कम एक सौ आठ बार श्रद्धापूर्वक जाप करना चाहिए। जब यह माला पूरी तरह से सिद्ध और अभिमंत्रित हो जाती है, तभी इसे गुरु के आशीर्वाद से या स्वयं भगवान का स्मरण करते हुए अपने कंठ में धारण करना चाहिए, जिससे इसके सकारात्मक स्पंदन तुरंत सक्रिय हो जाते हैं।
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