अयोध्या दीपोत्सव: दिव्यांगों व बुजुर्गों के लिए व्हीलचेयर बनी सहारा, सुगम हुए रामलला व सरयू आरती के दर्शन

अयोध्या दीपोत्सव 2026 में दिव्यांगों व वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष व्हीलचेयर सेवा शुरू। रामलला, हनुमानगढ़ी और सरयू आरती के दर्शन हुए सुगम और सुविधाजनक।

By INA News Desk
Nov 5, 2026 - 23:18
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अयोध्या दीपोत्सव: दिव्यांगों व बुजुर्गों के लिए व्हीलचेयर बनी सहारा, सुगम हुए रामलला व सरयू आरती के दर्शन
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रामनगरी अयोध्या में आयोजित हो रहे दसवें दीपोत्सव की भव्य जगमगाहट के मध्य मानवीय संवेदना और सेवा भाव का एक प्रेरक स्वरूप देखने को मिल रहा है। दीपोत्सव के पावन अवसर पर प्रभु श्रीराम के दर्शन एवं सरयू महारानी की महाआरती में सम्मिलित होने की अभिलाषा लेकर देश-विदेश से पहुंच रहे दिव्यांग और वरिष्ठ श्रद्धालुओं के लिए व्हीलचेयर की विशेष व्यवस्था वरदान सिद्ध हो रही है।

शारीरिक दुर्बलता अथवा चलने-फिरने में असमर्थता के कारण जिन श्रद्धालुओं के लिए मुख्य मंदिरों तक पहुंचना कठिन था, वे अब इस सुगम प्रबंध के माध्यम से श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, प्रसिद्ध सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी और सरयू घाटों पर सहजता से दर्शन-पूजन कर पा रहे हैं।

इस संवेदनशील पहल को धरातल पर क्रियान्वित करने में समर्पित सेवादार अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। बहराइच जनपद से आए देशराज बताते हैं कि वे शारीरिक रूप से अक्षम और वृद्ध श्रद्धालुओं को व्हीलचेयर के माध्यम से गर्भ गृह के समीप तक पहुंचाने में सहयोग कर रहे हैं। उनके अनुसार, जब कोई दिव्यांग श्रद्धालु दर्शन उपरांत कृतज्ञता भरी मुस्कान देता है, तो वह आत्मिक संतोष का सबसे बड़ा क्षण होता है। उनका मानना है कि शारीरिक विवशता किसी भी भक्त की अटूट आस्था के मार्ग में अवरोध नहीं बननी चाहिए।

इसी सेवा भाव के साथ बहराइच के सतीश कुमार और श्रावस्ती के मणिकापुर खुर्द निवासी जगराम चौहान भी लगातार सक्रिय हैं। लंबी दूरी पैदल तय करने में असमर्थ वृद्धजनों को वे व्हीलचेयर के जरिए सुगमतापूर्वक रामलला के दरबार और पावन सरयू तट तक पहुंचा रहे हैं। इन समर्पित प्रयासों के चलते समाज के कमजोर और उपेक्षित वर्ग भी बिना किसी असुविधा के दीपोत्सव के उल्लास और रामनगरी की आध्यात्मिक ऊर्जा से एकाकार हो रहे हैं।

दीपोत्सव के इस व्यापक आयोजन में सुगम्यता (एक्सेसिबिलिटी) का यह मानवीय दृष्टिकोण स्पष्ट संदेश देता है कि आस्था के इस महापर्व में प्रत्येक नागरिक की सहभागिता सर्वोपरि है। दीपोत्सव की वास्तविक सार्थकता तभी है जब प्रकाश की यह पावन किरण समाज के अंतिम पायदान पर खड़े प्रत्येक श्रद्धालु के जीवन को आलोकित करे। रामनगरी में व्हीलचेयर का यह सुव्यवस्थित प्रबंध उन अनगिनत भक्तों के लिए नई आशा और संबल बन गया है, जिनकी आस्था अटूट है और जिन्हें बस थोड़े से सहारे की दरकार थी।

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