अयोध्या में एक लाख दीयों से रोशन होगा राम जन्मभूमि परिसर: पांच जोन में बंटा दायित्व, एक हजार स्वयंसेवक तैनात
अयोध्या दीपोत्सव पर श्रीराम जन्मभूमि परिसर एक लाख दीयों की रोशनी से जगमगाएगा। परिसर को पांच जोन में बांटकर एक हजार कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अयोध्या में दीपोत्सव के ऐतिहासिक पर्व को भव्य और व्यवस्थित रूप देने के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र परिसर में बड़े स्तर पर तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस बार पूरे परिसर को एक लाख दीपों से सजाने का संकल्प लिया गया है। इस वृहद कार्य को सुव्यवस्थित ढंग से पूरा करने के लिए संपूर्ण परिसर को पांच जोन में विभाजित कर लगभग एक हजार कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिन्हें सुरक्षा बलों का भी सहयोग प्राप्त होगा। आगामी दिनों में इस पूरी कार्ययोजना को धरातल पर उतारने की दिशा में काम तेज कर दिया गया है।
तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से यात्री सुविधा केंद्र के सभागार में आयोजित समन्वयन बैठक के दौरान पूरी व्यवस्था को अंतिम रूप दिया गया। ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने कार्यकर्ताओं के साथ दीप प्रज्ज्वलन और सजावट की योजना साझा की। श्रीरामलला के मुख्य मंदिर प्रांगण को विशेष रूप से सुसज्जित किया जा चुका है और अब परिसर के अन्य हिस्सों के अलंकरण का कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है।
व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए निर्धारित किए गए पांच जोन के तहत कार्यों का विभाजन किया गया है। पहले जोन में श्रीरामलला मंदिर प्रांगण, परकोटा, ग्रीन हाउस और यज्ञशाला क्षेत्र शामिल हैं, जहां तीस हजार से अधिक दीपक जलाए जाएंगे। दूसरे जोन के तहत कुबेर टीला, सप्तमण्डप, शेषावतार मंदिर, हुतात्मा स्मारक और पंचवटी के क्षेत्र में भी तीस हजार से ज्यादा दीप प्रज्ज्वलित करने की तैयारी है।
तीसरे जोन में वापसी दर्शन मार्ग, यात्री सुविधा केंद्र, प्लाजा और नल टीला क्षेत्र को शामिल किया गया है, जहां चौदह हजार से अधिक दीप जलाए जाएंगे। चौथे जोन के अंतर्गत यात्री सेवा केंद्र, अंगद टीला, सीता रसोई और रामानंदाचार्य द्वार पर तेरह हजार से अधिक दीपों की व्यवस्था रहेगी। वहीं पांचवें जोन में जन्मभूमि पथ, दर्शन मार्ग, सिंह द्वार और चरण पादुका क्षेत्र आएंगे, जहां तेरह हजार दीयों को रोशन करने का दायित्व सौंपा गया है। इस क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और सहायता के लिए पुलिस व सुरक्षा बलों की टीम भी साथ रहेगी।
ट्रस्ट प्रबंधन का कहना है कि यह आयोजन भारतीय संस्कृति और अयोध्या की वैश्विक पहचान को एक नया स्वरूप प्रदान कर रहा है। समय से पूर्व सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएंगी ताकि दर्शनार्थियों को एक अलौकिक और अविस्मरणीय अनुभव प्राप्त हो सके।
What's Your Reaction?

