सम्भल में नाले के पानी पर सियासी घमासान! कब्रिस्तान में गंदा पानी डालने के आरोप से गरमाया मामला, तहसीलदार ने 5 दिन में जांच का दिया भरोसा
सम्भल के छछेरा और मुगावर गांव में जल निकासी विवाद ने राजनीतिक रंग लिया। कब्रिस्तान और तालाब की जमीन पर आरोप-प्रत्यारोप के बीच तहसीलदार ने 5 दिन में जांच का भरोसा दिया।
Report : उवैस दानिश, सम्भल
सम्भल विधानसभा के छछेरा गांव में वर्षों से चली आ रही जल निकासी की समस्या अब बड़ा विवाद बनती नजर आ रही है। किसानों के खेतों में कई साल से पानी भरने, अधूरे नाले, तालाब और मुगावर गांव के पुराने कब्रिस्तान को लेकर मामला गरमा गया है।

शनिवार को तहसील कार्यालय में दोनों पक्षों को बुलाकर बातचीत कराई गई। इस दौरान विधायक पुत्र सुहैल इकबाल, AIMIM नेता शकील अहमद और भाजपा नेता विशाल चौहान ने अपनी-अपनी बात रखी। मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने अभिलेखों की जांच और मौके की पड़ताल शुरू कर दी है।

दरअसल, छछेरा गांव में जल निकासी की समस्या दूर करने के लिए जिला पंचायत की ओर से वर्ष 2018-19 के आसपास नाले का निर्माण कराया गया था, लेकिन आरोप है कि नाला आधा ही बन पाया और आगे का रास्ता बंद कर दिया गया।

इसके चलते पानी की निकासी बाधित हो गई और किसानों के खेतों में पानी भरने लगा। विधायक पुत्र सुहैल इकबाल ने गांव पहुंचकर किसानों की समस्या सुनी और तहसीलदार से मुलाकात कर अधूरे नाले को पूरा कराने तथा पानी को किसी दूसरे तालाब, नहर या नदी तक पहुंचाने की मांग रखी।

वहीं AIMIM नेता शकील अहमद ने आरोप लगाया कि छछेरा गांव का गंदा पानी दूसरे गांव मुगावर के पुराने कब्रिस्तान में डालने की कोशिश की जा रही है, जहां सैकड़ों कब्रें मौजूद हैं।

उन्होंने कहा कि गांव में पहले से तालाब मौजूद हैं, इसलिए पानी को कब्रिस्तान की तरफ ले जाने के बजाय तालाब में पहुंचाया जाना चाहिए। उन्होंने कब्रिस्तान के दस्तावेज भी प्रशासन को दिखाने की बात कही और गांव में अमन-शांति बनाए रखने की अपील की। उधर भाजपा नेता विशाल चौहान ने कब्रिस्तान की जमीन और आसपास की सरकारी भूमि को लेकर गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने दावा किया कि मुगावर गांव में आबादी नहीं होने के बावजूद वहां बड़े रकबे में कब्रिस्तान दर्ज है। साथ ही बंजर भूमि, तालाब और ग्रामीणों की जमीन को लेकर कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की।

उन्होंने आरोप लगाया कि जल निकासी का रास्ता बंद होने से किसानों की खेती पांच साल से प्रभावित है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। विधायक पुत्र सुहैल इकबाल ने कहा कि छछेरा को सभी समाज के लोगों ने वोट दिया है और उनका प्रयास किसानों की समस्या का समाधान कराना है, न कि किसी धार्मिक विवाद को बढ़ावा देना। उन्होंने कहा कि विकास के मुद्दे पर काम होना चाहिए, राजनीति के लिए गांव का माहौल खराब नहीं होना चाहिए।
तहसीलदार ने क्या कहा?
तहसीलदार धीरेंद्र कुमार ने बताया कि छछेरा गांव की ड्रेनेज व्यवस्था बंद होने के कारण विवाद की स्थिति बनी है। एक पक्ष का कहना है कि पानी कब्रिस्तान स्थित तालाब में जाता है, जबकि दूसरा पक्ष इससे इनकार कर रहा है। मौके का निरीक्षण किया गया है और पुराने अभिलेखों की जांच की जा रही है। आसपास के अन्य तालाबों की भी पड़ताल कराई जाएगी। कब्रिस्तान और चकबंदी से जुड़े आरोपों की जांच चकबंदी विभाग के सहयोग से कराकर विस्तृत रिपोर्ट सक्षम अधिकारी को भेजी जाएगी। विशाल चौहान के मुताबिक, तहसीलदार ने पांच दिन में उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों की जांच कर कार्रवाई का भरोसा दिया है। अब देखना होगा कि प्रशासन किसानों की जलभराव की समस्या का समाधान किस रास्ते से निकालता है और कब्रिस्तान व सरकारी जमीन से जुड़े आरोपों की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।
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