हाथरस में सरकारी नाली और चकरोड पर अवैध कब्जे का आरोप, पीड़ितों ने सीएम से की सख्त कार्रवाई की मांग
हाथरस के लहौर्रा गांव में सरकारी नाली व चकरोड पर अवैध कब्जे का आरोप। पीडि़ताओं ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर अवैध प्लाटिंग और खनन पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
जनपद के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत लहौर्रा में सरकारी नाली और चकरोड पर अवैध कब्जे का गंभीर मामला सामने आया है। सासनी-इगलास मुख्य मार्ग से सटे इस क्षेत्र में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और अवैध रूप से रास्ता बनाने के प्रयास को लेकर स्थानीय स्तर पर रोष व्याप्त है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़ितों ने मुख्यमंत्री को सीधे शिकायती पत्र भेजकर भू-माफियाओं के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई और सरकारी भूमि को तत्काल प्रभाव से अतिक्रमण मुक्त कराने की गुहार लगाई है।
मुख्यमंत्री को भेजे गए संयुक्त पत्र में सेवानिवृत्त कानूनगो जगन्नाथ प्रसाद की पत्नी धर्मवती देवी तथा अधिवक्ता राजपाल सिंह की पत्नी नीरज देवी ने विस्तृत विवरण प्रस्तुत करते हुए पूरे घटनाक्रम की जांच कराने की मांग की है। शिकायत पत्र में बताया गया है कि सासनी-इगलास मार्ग स्थित राजस्व अभिलेखों में गाटा संख्या 1386 सरकारी नाली के रूप में और गाटा संख्या 1385 चकरोड के रूप में विधिवत दर्ज है। आरोप है कि लहौर्रा गांव के ही एक व्यक्ति ने अपने कुछ अज्ञात सहयोगियों के साथ मिलकर रात के अंधेरे में बिना किसी सक्षम प्रशासनिक अनुमति के बड़े पैमाने पर मिट्टी डलवाकर चकरोड पर मनमाना रास्ता तैयार करने का प्रयास किया।
पीड़िताओं का आरोप है कि इस कार्य के लिए न तो कोई शासकीय स्टीमेट स्वीकृत कराया गया और न ही राजस्व अथवा विकास विभाग से किसी प्रकार की अनापत्ति प्राप्त की गई। इसके अतिरिक्त चकरोड से सटी सार्वजनिक नाली की लगभग एक मीटर चौड़ी भूमि पर मिट्टी पाटकर पानी की निकासी को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया गया है। नाली बंद होने से क्षेत्रीय किसानों की फसलों की सिंचाई और जल निकासी का संकट पैदा होने की आशंका बढ़ गई है।
शिकायतकर्ताओं ने यह भी ध्यान दिलाया है कि संबंधित भूमि यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के अधिसूचित क्षेत्र के अंतर्गत आती है और यह अनुसूचित जाति के काश्तकारों की भूमि से जुड़ी हुई है। नियमों के अनुसार उक्त भूमि का न तो कोई वैधानिक भू-उपयोग परिवर्तन कराया गया है और न ही सक्षम प्राधिकारी से कोई विन्यास या नक्शा स्वीकृत कराया गया है। आरोप है कि सार्वजनिक नाली और चकरोड को दबाकर वहां अवैध रूप से रिहायशी कॉलोनी बसाने और प्लाटिंग करने की तैयारी की जा रही है।
पीड़ित पक्ष ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि मौके पर प्रशासनिक दल भेजकर स्थलीय जांच कराई जाए। बिना अनुमति किए गए अवैध मिट्टी खनन, सार्वजनिक भूमि पर कब्जा करने तथा राजस्व नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में संबंधित तत्वों के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर कठोर दंडात्मक कदम उठाए जाएं, ताकि सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
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