'नाराजगी गोमती में बहाओ, पर कार्यकर्ता को कौन सुनेगा?' दीपक राज सिंघल के बयानों से गरमाई देवबंद की सियासत

देवबंद में वरिष्ठ भाजपा नेता दीपक राज सिंघल ने उठाए सवाल। कहा- नाराजगी छोड़ने की बात तो होती है, लेकिन निस्वार्थ कार्यकर्ताओं की सुनवाई और सम्मान कहां है?

By INA News Desk
Oct 31, 2026 - 12:10
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'नाराजगी गोमती में बहाओ, पर कार्यकर्ता को कौन सुनेगा?' दीपक राज सिंघल के बयानों से गरमाई देवबंद की सियासत
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उत्तर प्रदेश की राजनीति में संगठनात्मक मजबूती और आगामी चुनावी रणनीतियों के बीच देवबंद में पार्टी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और सम्मान का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता दीपक राज सिंघल ने पार्टी नेतृत्व द्वारा दिए गए "चुनाव में जुटो और नाराजगी गोमती में बहा दो" के संदेश पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। लखनऊ में आए केंद्रीय नेतृत्व के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं से चुनाव में जुटने और नाराजगी त्यागने की अपेक्षा तो की जाती है, परंतु मूल प्रश्न यह है कि निस्वार्थ भाव से कार्य करने वाले निष्ठावान कार्यकर्ताओं की पीड़ा और शिकायतों का समाधान कौन करेगा।

दीपक राज सिंघल ने कहा कि संगठनात्मक और सत्ता व्यवस्था में व्यक्तियों को मंत्री, सांसद, विधायक या जिला पंचायत सदस्य के दायित्व दिए जा सकते हैं, लेकिन संगठन की असली रीढ़ वे सामान्य कार्यकर्ता हैं जिन्हें न तो किसी पद की लालसा होती है और न ही उनका कोई निजी स्वार्थ। वे केवल विचारधारा और संगठन के प्रति निष्ठा रखकर जमीनी स्तर पर दिन-रात पसीना बहाते हैं। इसके बावजूद वर्तमान समय में ऐसे समर्पित कार्यकर्ताओं की आवाज अनसुनी की जा रही है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ पदाधिकारी अपने राजनीतिक प्रभाव की आड़ में निष्ठावान कार्यकर्ताओं के संस्थानों पर अवैध कब्जा कर उनका उत्पीड़न करने में लगे हैं।

स्थानीय स्तर पर एसके हैप्पी स्कूल के विवाद पर बात करते हुए सिंघल ने आरोप लगाया कि एक जनप्रतिनिधि के संरक्षण में नगर पालिका अध्यक्ष और उनके सहयोगियों द्वारा विद्यालय पर अनुचित कब्जा किया गया है। उन्होंने दावा किया कि रजिस्ट्रार फर्म्स एवं सोसाइटीज तथा बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) के समस्त आधिकारिक दस्तावेज और अभिलेख उनके पक्ष को प्रमाणित करते हैं, जबकि कब्जा करने वाले पक्ष के पास न तो कोई वैध विधिक प्रमाणपत्र है और न ही न्यायालय का कोई स्थगनादेश उपलब्ध है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बीते एक दशक से विद्यालय के छात्रों की शिक्षण शुल्क की राशि को अधिकृत बैंक खातों में जमा नहीं किया गया और वित्तीय हिसाब-किताब में हेरफेर किया गया है।

सिंघल ने नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसे गंभीर प्रकरणों में संगठन के जिम्मेदार पदाधिकारी मौन साधे हुए हैं और कुछ लोग खुले तौर पर गलत तत्वों के मददगार बने हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि एक ओर जहां कार्यकर्ताओं से वर्ष 2027 में तीसरी बार सरकार बनाने के लिए पूर्ण समर्पण से जुटने का आह्वान किया जाता है, वहीं दूसरी ओर उनकी जायज समस्याओं और उत्पीड़न पर ध्यान नहीं दिया जाता। उन्होंने प्रबुद्ध समाज और नागरिकों से दोनों पक्षों के वैधानिक दस्तावेजों का निष्पक्ष अवलोकन करने का आग्रह करते हुए कहा कि वे इस शैक्षणिक संस्थान को केएल जनता स्कूल की भांति आदर्श ऊंचाइयों पर ले जाकर सुरक्षित व सुयोग्य हाथों में सौंपने के लिए संघर्षरत हैं।

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