Ayodhya News: अभावों को मात देकर SDM बनीं सोनम यादव, मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना से संवरा ग्रामीण प्रतिभा का भविष्य
अयोध्या की सोनम यादव ने मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के मार्गदर्शन से यूपीपीसीएस में सफलता पाकर एसडीएम का पद हासिल किया। लखनऊ में प्रशिक्षण ले रहीं सोनम अब बेटियों के लिए प्रेरणा हैं।
- UPPCS Success Story: मवई के छोटे से पुरवे से प्रशासनिक कुर्सी तक, अभ्युदय योजना ने बदली सोनम यादव की तकदीर
- UP SDM Sonam Yadav: बेटियों के लिए प्रेरणा बनीं अयोध्या की सोनम, आरटीआईएलएमए लखनऊ में ले रहीं प्रशासनिक गुर
- Mukhyamantri Abhyudaya Yojana: आर्थिक तंगी नहीं बनी रुकावट, यूपीपीसीएस में चयनित होकर सोनम यादव ने पेश की मिसाल
लखनऊ/अयोध्या। यदि प्रतिभा, निष्ठा और सही मार्गदर्शन का संगम हो, तो सीमित साधन और परिस्थितियां कभी भी बड़े सपनों की राह में बाधा नहीं बन सकतीं। उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले के एक सुदूर ग्रामीण अंचल से निकलकर प्रशासनिक सेवा के सर्वोच्च पदों में शुमार उप जिलाधिकारी (एसडीएम) की कुर्सी तक का सफर तय करने वाली सोनम यादव आज इस बात की जीती-जागती मिसाल बन चुकी हैं। प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई 'मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना' का लाभ उठाकर उत्तर प्रदेश सम्मिलित राज्य/प्रवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा (यूपीपीसीएस)-2024 में शानदार सफलता अर्जित करने वाली सोनम वर्तमान में राजधानी लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी में अपने सेवाकाल का आधारभूत प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।
सोनम की यह उपलब्धि न केवल उनकी व्यक्तिगत लगन का परिणाम है, बल्कि यह प्रदेश के उन हजारों युवक-युवतियों, विशेषकर ग्रामीण पृष्ठभूमि की बेटियों के भीतर एक नया विश्वास जगा रही है जो प्रतियोगी परीक्षाओं की महंगी कोचिंग का खर्च उठाने में असमर्थ हैं।
मवई के छोटे से पुरवे से शुरू हुआ संघर्ष
सोनम यादव अयोध्या जनपद के विकासखंड मवई अंतर्गत ग्राम पंचायत गड़ौरा के एक छोटे से मजरे 'हारिका पांडे का पुरवा' की मूल निवासी हैं। ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ीं सोनम ने शुरुआती शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा के दौरान कई तरह की सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना किया। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए जरूरी स्तरीय पाठ्य सामग्री, पत्र-पत्रिकाओं और अनुभवी मार्गदर्शकों का प्रायः अभाव रहता है।
ऐसे में जब राज्य सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे प्रतिभावान परंतु आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए निःशुल्क कोचिंग व्यवस्था के तहत मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना का विस्तार किया, तो सोनम ने इस अवसर को पहचाना। योजना से जुड़ने के बाद उन्हें न केवल स्तरीय अध्ययन सामग्री और नियमित कक्षाएं सुलभ हुईं, बल्कि सिविल सेवा के अनुभवी अधिकारियों और विषय विशेषज्ञों से सीधे मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर भी मिला।
अभ्युदय योजना ने दी तैयारी को सही दिशा
अपनी सफलता के सफर को साझा करते हुए सोनम यादव बताती हैं कि प्रतियोगी परीक्षाओं, विशेषकर पीसीएस और आईएएस जैसी परीक्षाओं में केवल दिन-रात मेहनत करना ही पर्याप्त नहीं होता। सबसे जरूरी पहलू यह होता है कि पाठ्यक्रम की मांग के अनुरूप सटीक और गुणवत्तापूर्ण सामग्री पढ़ी जाए तथा समय प्रबंधन पर ध्यान दिया जाए।
सोनम के अनुसार, अभ्युदय केंद्र पर आयोजित होने वाली नियमित कक्षाओं, उत्तर लेखन (आंसर राइटिंग) के सत्रों और समय-समय पर प्रशासनिक अधिकारियों के साथ होने वाले संवाद ने उनकी कमजोरियों को दूर करने में बड़ी भूमिका निभाई। योजना के माध्यम से मिले शांत और सकारात्मक वातावरण ने उनके मनोबल को बनाए रखा। उनका कहना है कि सरकार की इस पहल ने उन जैसे साधनहीन अभ्यर्थियों को यह भरोसा दिलाया कि यदि उनके भीतर क्षमता है, तो आर्थिक तंगी उनके चयन के आड़े नहीं आ सकती।
अकादमी में सीख रहीं संवेदनशील प्रशासन के गुर
सफलता की सीढ़ियां चढ़कर प्रशासनिक सेवा में प्रवेश करने के बाद अब सोनम के जीवन का एक नया अध्याय शुरू हो चुका है। वर्तमान में लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी में उनका गहन प्रशिक्षण चल रहा है।
प्रशिक्षण के अनुभवों के बारे में सोनम बताती हैं कि यहां उन्हें केवल फाइलों और दफ्तर के नियमों तक सीमित नहीं रखा जा रहा है, बल्कि राजस्व प्रशासन, भू-अभिलेखों के निस्तारण, विधि-व्यवस्था के संधारण, आपदा प्रबंधन और सरकार की लोककल्याणकारी योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन का व्यवहारिक पाठ पढ़ाया जा रहा है। वह कहती हैं कि प्रशिक्षण का मुख्य जोर इस बात पर है कि एक अधिकारी कैसे जनता के प्रति संवेदनशील, पारदर्शी और जन-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाकर काम करे, ताकि थाने और तहसील आने वाले अंतिम व्यक्ति को बिना किसी परेशानी के त्वरित न्याय मिल सके।
ग्रामीण बेटियों को सोनम का संदेश: 'शॉर्टकट से बचें, निरंतरता रखें'
सोनम यादव आज प्रदेश की उन लाखों छात्राओं और ग्रामीण बालिकाओं के लिए एक आदर्श चेहरा बन चुकी हैं जो अक्सर संसाधनों की कमी के चलते अपने सपनों को अधूरा छोड़ देती हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे युवाओं को संदेश देते हुए वह कहती हैं कि सफलता पाने का कोई शार्टकट मार्ग नहीं होता।
वह विद्यार्थियों को चार मूल मंत्र अपनाने की सलाह देती हैं स्पष्ट रणनीति, नियमित अध्ययन, निरंतर अभ्यास और अटूट आत्मविश्वास। ग्रामीण पृष्ठभूमि के अभिभावकों से भी वह अपील करती हैं कि वे अपनी बेटियों की शिक्षा पर विश्वास जताएं और उन्हें आगे बढ़ने का पूरा अवसर दें। जब एक बेटी प्रशासनिक पद पर पहुंचती है, तो वह केवल अपना परिवार ही नहीं, बल्कि समूचे समाज की सोच को सकारात्मक दिशा देती है।
नीतिगत बदलाव और जनसरोकार की प्राथमिकता
एक भावी प्रशासनिक अधिकारी के रूप में अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए सोनम कहती हैं कि उनका मुख्य लक्ष्य शासन की योजनाओं को पात्र व्यक्तियों तक शत-प्रतिशत पहुंचाना रहेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चल रही युवा सशक्तीकरण, कन्या सुमंगला, मिशन शक्ति और छात्रवृत्ति योजनाएं जमीनी स्तर पर व्यापक बदलाव ला रही हैं। जब प्रशासनिक मशीनरी संवेदनशीलता के साथ काम करती है, तो आम जनमानस का शासन और कानून के प्रति विश्वास और अधिक गहरा होता है। सोनम यादव की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन से गांवों की माटी से भी प्रदेश के कुशल नीति-निर्माता और प्रशासक तैयार हो रहे हैं।
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