UP International Trade Show: पहले डिजिटल सेल्फी, फिर सात फेरे; ट्रेड शो में समाज कल्याण विभाग के मॉडल्स ने खींचा ध्यान
ग्रेटर नोएडा में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में समाज कल्याण विभाग का आउटलेट आकर्षण का केंद्र बना। कन्या विवाह मंडप, अभ्युदय कोचिंग और डिजिटल सेल्फी प्वाइंट से योजनाओं को रोचक ढंग से प्रदर्शित किया गया।
सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार की पारंपरिक और नीरस शैली को पीछे छोड़ते हुए ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में चल रहे 'उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026' (UPITS) में एक अनूठा प्रयोग देखने को मिल रहा है। ट्रेड शो घूमने पहुंच रहे आम आगंतुकों और परिवारों के लिए उत्तर प्रदेश सरकार का समाज कल्याण विभाग आउटलेट आकर्षण का बड़ा केंद्र बन चुका है। यहां योजनाओं को केवल कागजी ब्रोशर या पोस्टरों में समेटने के बजाय 3D मॉडल्स, सजीव कटआउट्स और डिजिटल इंटरैक्टिव तकनीकों के जरिए जीवंत किया गया है।
प्रदर्शनी में प्रवेश करते ही सबसे पहले आधुनिक डिजिटल सेल्फी प्वाइंट लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है। इसके बाद आगे बढ़ते ही आंखों के सामने सज-धज कर तैयार दो विवाह मंडप आते हैं, जहां दूल्हा-दुल्हन के कटआउट्स फेरे लेते दिखाई देते हैं। थोड़ा और आगे बढ़ने पर सिलाई केंद्र और किराना स्टोर के मॉडल ग्रामीण परिवारों की आत्मनिर्भरता की वास्तविक गाथा प्रस्तुत करते हैं। यह पूरा परिसर सरकारी योजनाओं को केवल पढ़ने के बजाय देखने, समझने और प्रत्यक्ष अनुभव करने का माध्यम बन चुका है।
डिजिटल सेल्फी प्वाइंट: तकनीक से योजनाओं की ओर पहला कदम
विभाग के पैवेलियन के प्रवेश द्वार पर स्थापित डिजिटल सेल्फी प्वाइंट पर युवाओं और छात्र-छात्राओं की खासी कतार देखी जा रही है। यहां आधुनिक क्यूसेक (Kiosk) मशीन आधारित फोटोग्राफी व्यवस्था की गई है।
आगंतुक जैसे ही कैमरे के सामने खड़े होकर स्क्रीन पर टच करते हैं, उनकी तस्वीर डिजिटल फ्रेम में कैद हो जाती है। यह तस्वीर तत्काल डिजिटल माध्यम से संबंधित व्यक्ति के मोबाइल फोन पर सीधे प्रेषित हो जाती है। सेल्फी खिंचवाने के बहाने रुकने वाले आगंतुक स्वतः ही पीछे स्थापित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के मॉडल्स की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जिससे विभाग का जन-जागरूकता का मुख्य उद्देश्य सहजता से पूरा हो रहा है।
कन्या विवाह योजना: इलेक्ट्रॉनिक हवन कुंड और सजे हुए मंडप
सेल्फी प्वाइंट से आगे बढ़ते ही 'मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना' का सजीव मॉडल प्रदर्शित किया गया है। यहां दो पारंपरिक विवाह मंडप सजाए गए हैं, जिनमें आकर्षक कटआउट्स के जरिए दूल्हा-दुल्हन को सात फेरे लेते हुए दर्शाया गया है। मंडप के केंद्र में आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक हवन कुंड स्थापित है, जिससे वास्तविक विवाह अनुष्ठान का आभास होता है।
इस दृश्य मॉडल के पास तैनात विभागीय परामर्शदाता आगंतुकों को योजना के वित्तीय और सामाजिक पहलुओं की जानकारी दे रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के सम्मानजनक विवाह के लिए सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली 51,000 रुपये की प्रत्यक्ष सहायता राशि, उपहार सामग्री और आयोजन व्यवस्था के बारे में लोग विस्तार से समझ रहे हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं की राह दिखाता 'अभ्युदय' मॉडल
सभागार के एक अन्य हिस्से में 'मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग योजना' का विशेष डिस्प्ले लगाया गया है। यहां कक्षाओं, डिजिटल लाइब्रेरी और प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, UPPSC, JEE, NEET) की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं के प्रतीकात्मक दृश्य बनाए गए हैं।
इसके जरिए ग्रामीण और निर्धन पृष्ठभूमि के मेधावी युवाओं को यह बताया जा रहा है कि वे बिना लाखों रुपये की निजी कोचिंग फीस चुकाए किस प्रकार जिला स्तर पर संचालित मुफ्त अभ्युदय केंद्रों में आईएएस-आईपीएस अधिकारियों और विषय विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं। कई अभिभावक यहां अपने बच्चों के पंजीकरण की प्रक्रिया समझते नजर आए।
ज्योति टेलर से दीपक किराना स्टोर: स्वरोजगार से स्वावलंबन
महिला सशक्तिकरण और सूक्ष्म स्वरोजगार को समझाने के लिए तैयार किए गए दो मॉडल विशेष रूप से सराहे जा रहे हैं:
-
'ज्योति टेलर' मॉडल: इस काउंटर पर एक ग्रामीण महिला को सिलाई मशीन के साथ घर से काम करते हुए दिखाया गया है। यह मॉडल अनुसूचित जाति, जनजाति और कमजोर वर्ग की महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई प्रशिक्षण और टूलकिट वितरण योजना से जुड़कर आत्मविश्वासी बनने का संदेश देता है।
-
'दीपक किराना स्टोर': यह मॉडल दर्शाता है कि सरकार की ब्याज मुक्त अथवा रियायती ऋण योजनाओं का लाभ उठाकर कैसे एक सामान्य युवक छोटा खुदरा व्यापार शुरू कर अपने पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति को संबल दे सकता है।
आउटलेट के भीतर ग्रामीण महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार हस्तनिर्मित कपड़े, सजावटी सामान और पारंपरिक खाद्य उत्पादों की बिक्री भी की जा रही है, जिसे आगंतुक उत्साहपूर्वक खरीद रहे हैं।
लोककला और जनजातीय संस्कृति का संगम
आउटलेट के सांस्कृतिक मंच की ओर बढ़ते ही माहौल पूरी तरह उत्सवी नजर आता है। यहां उत्तर प्रदेश के विभिन्न अनुसूचित जनजाति बहुल अंचलों विशेष रूप से सोनभद्र, लखीमपुर खीरी और बुंदेलखंड से आए पारंपरिक लोक कलाकार अपने पारंपरिक परिधानों में लोकनृत्यों और संगीत की सजीव प्रस्तुतियां दे रहे हैं।
कलाकारों की थाप और घुंघरुओं की झंकार सुनते ही दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है। लोग इन दुर्लभ जनजातीय कलाओं के वीडियो रिकॉर्ड कर रहे हैं और कलाकारों के साथ तस्वीरें खिंचवा रहे हैं। कुल मिलाकर, समाज कल्याण विभाग का यह आउटलेट ट्रेड शो में महज एक प्रशासनिक स्टॉल न रहकर संवेदना, सहायता, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सांस्कृतिक गौरव का एक जीवंत केंद्र बनकर उभरा है।
What's Your Reaction?