रसोई के हुनर को मिला वैश्विक फलक: यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में छाया गाजियाबाद की महिलाओं के पारंपरिक अचार का स्वाद
ग्रेटर नोएडा ट्रेड शो में गाजियाबाद की महिलाओं के हाथों बने अचार, मुरब्बे और जवे छाए। घरेलू स्वाद को मिला अंतरराष्ट्रीय मंच, खरीदारों से मिले बड़े ऑर्डर।
ग्रेटर नोएडा। घरेलू स्तर पर महिलाओं के पारंपरिक हुनर और उद्यमिता को बाजार से जोड़ने की सरकारी पहल अब ग्रामीण व कस्बाई महिलाओं के जीवन में बदलाव का आधार बन रही है। इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो में गाजियाबाद की महिलाओं द्वारा शुद्ध घरेलू विधि से तैयार किए गए अचार, मुरब्बे और जवे देश-विदेश से आने वाले आगंतुकों के स्वाद का केंद्र बने हुए हैं। प्रदर्शनी में लगाए गए स्टालों पर खरीदार न केवल इन पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद चख रहे हैं, बल्कि हाथों-हाथ ऑनलाइन भुगतान कर बड़ी मात्रा में अग्रिम ऑर्डर भी दे रहे हैं।
खंजरपुर गांव की निवासी रीना धतरवाल ने 'दीपराज ऑर्गेनिक पिकल्स' के नाम से अपनी उद्यम यात्रा शुरू की थी। वह पहली बार इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने उत्पाद लेकर पहुंची हैं। रीना की विशेषता यह है कि वह घर में तैयार किए गए शुद्ध मसालों और अपने ही खेतों में उगाई गई सरसों के तेल से विभिन्न किस्मों के अचार बनाती हैं। उन्होंने बताया कि इस मंच पर आने से उनके घरेलू उत्पादों को व्यापक पहचान मिली है और पहले ही चरण में ग्राहकों ने अचार, मुरब्बा और जवे के लिए डिजिटल माध्यम से अग्रिम बुकिंग कराई है।
मोदीनगर क्षेत्र की 'ई नारी शक्ति वूमेन एंपावर' संस्था से जुड़ी महिलाओं ने स्टॉल पर नींबू, आम और हरी मिर्च के कई तरह के अचार प्रदर्शित किए हैं। संस्था की महिलाओं ने बताया कि उन्होंने कुछ समय पहले ही सामूहिक रूप से इस काम की शुरुआत की थी। इतने विशाल मंच पर घरेलू उत्पादों को सीधे ग्राहकों और थोक खरीदारों के सामने प्रस्तुत करना उनके लिए बिल्कुल नया और उत्साहजनक अनुभव है। महिलाओं का मानना है कि इस आयोजन से मिले संपर्कों के जरिए उनके लिए निरंतर व्यापारिक रास्ते खुलेंगे।
वहीं गाजियाबाद की पूनम ने 'पूनम पिकल्स' ब्रांड के तहत अपने कार्य को विस्तार देते हुए कई अन्य महिलाओं को भी काम से जोड़ा है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में बड़े आयोजन में शामिल होने को लेकर कुछ संकोच था, लेकिन आगंतुकों की ओर से मिली शानदार प्रतिक्रिया ने उनका हौसला दोगुना कर दिया है। घर के आंगन और रसोई से शुरू हुए इन छोटे उद्यमों को मिला यह बड़ा बाजार महिला स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरणादायक कदम साबित हो रहा है।
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