यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में कौशल विकास मिशन का जलवा: पीएसी बैंड की देशभक्ति धुनों और दिल्ली घराने के शास्त्रीय संगीत से गूंजा मंच
यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में कौशल विकास मिशन पवेलियन छाया। पीएसी बैंड की धुन, दिल्ली घराने के संगीत और 16 कौशल केंद्रों ने बांधा दर्शकों का समां।
ग्रेटर नोएडा। जब रचनात्मक प्रतिभा और हुनर को अंतरराष्ट्रीय स्तर का मंच मिलता है, तो वहां का उत्साह स्वतः ही जन-जन को आकर्षित कर लेता है। इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रदर्शनी के दौरान उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (यूपीएसडीएम) के भव्य पवेलियन में अद्भुत ऊर्जा और उमंग देखने को मिली। प्रदर्शनी के चौथे चरण में मिशन का पवेलियन सुबह से लेकर देर शाम तक विविध कौशलों, तकनीकी नवाचारों और सांस्कृतिक रंगों से गुलजार रहा।
कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ अत्यंत गरिमामयी और गौरवपूर्ण वातावरण में हुआ। पीएसी की बत्तीसवीं वाहिनी के बैंड दल ने अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुति से संपूर्ण परिसर को देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत कर दिया। अनुशासित कदमताल और ओजस्वी धुनों ने वहां उपस्थित युवाओं और दर्शकों में नई ऊर्जा का संचार किया। इसी उत्साह से प्रेरित होकर युवा स्वतः ही मंच की ओर आकर्षित हुए और ‘कौशल मंच’ पर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का एक से बढ़कर एक शानदार प्रदर्शन किया। युवाओं के इस जज्बे को देखकर सुरक्षा व्यवस्था में तैनात उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल के जवानों व अधिकारियों ने भी मंच पर सहभागिता करते हुए अपने आंतरिक हुनर का प्रभावी प्रदर्शन किया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।
प्रतिभाओं के प्रदर्शन के साथ-साथ पवेलियन में स्थापित 16 प्रत्यक्ष कौशल प्रदर्शन केंद्र (लाइव डेमो काउंटर) दिनभर आगंतुकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बने रहे। यहां युवाओं, विद्यार्थियों और वरिष्ठ नागरिकों ने विभिन्न व्यावहारिक एवं तकनीकी कौशलों को अत्यंत बारीकी से समझा और खुद भी करके देखा। विशेषज्ञों ने आधुनिक उद्योग जगत की आवश्यकताओं के अनुसार युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण की बारीकियों से अवगत कराया।
शाम ढलते ही कौशल विकास मिशन का यह प्रांगण शास्त्रीय संगीत की सुरीली स्वर लहरियों में सराबोर हो गया। दिल्ली घराने के प्रतिष्ठित संगीत साधक उस्ताद अलीम खान एवं उनके समूह ने अपनी मनमोहक प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उस्ताद अलीम खान और उनके सुपुत्र अरीम खान ने वायलिन की तारों पर जब शास्त्रीय और समकालीन रचनाओं की तान छेड़ी, तो पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा। वहीं तबले पर समीर खान की कुशल थाप और लयकारी ने इस सांगीतिक संध्या को हमेशा के लिए यादगार बना दिया।
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