Ravi Kishan Statement: 'लोगों ने फेंका नींबू, हमने बना दिया शरबत', वायरल मीम्स पर बीजेपी सांसद रवि किशन का Gen-Z को करारा और मजेदार जवाब

बीजेपी सांसद और अभिनेता रवि किशन ने सोशल मीडिया पर बन रहे अपने मीम्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोगों ने नींबू फेंका तो उन्होंने शरबत बना दिया। उन्होंने युवाओं को सकारात्मक रहने की सलाह दी।

By INA News Desk
Oct 18, 2026 - 16:41
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Ravi Kishan Statement: 'लोगों ने फेंका नींबू, हमने बना दिया शरबत', वायरल मीम्स पर बीजेपी सांसद रवि किशन का Gen-Z को करारा और मजेदार जवाब

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के लोकसभा सांसद और अभिनेता रवि किशन ने सोशल मीडिया पर अपने बयानों और संवादों पर बनने वाले 'जेन-जी' (Gen-Z) मीम्स पर खुलकर अपनी राय रखी है। इंटरनेट पर लगातार चल रही ट्रोलिंग और मीम्स को लेकर उन्होंने बेहद सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा कि जब लोगों ने उन पर नींबू फेंका, तो उन्होंने उसका शरबत बना दिया। उन्होंने युवाओं द्वारा बनाए जा रहे इन डिजिटल कंटेंट को व्यक्तिगत हमले के बजाय नई पीढ़ी की रचनात्मकता और स्नेह के रूप में स्वीकार किया।

सांसद रवि किशन ने युवा पीढ़ी की ऊर्जा और सोच की सराहना करते हुए उन्हें 'भारत की आत्मा' करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक जीवन में होने के नाते उनका जो व्यक्तित्व संसद या सार्वजनिक मंचों पर नजर आता है, वह किसी बनावट से परे है और वे स्वाभाविक रूप से वैसे ही रहते हैं।

सोशल मीडिया ट्रोलिंग और अवसाद पर कलाकारों-युवाओं को सलाह

अपने संबोधन में रवि किशन ने सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभाव से जूझ रहे नवोदित कलाकारों और युवाओं को मानसिक रूप से मजबूत रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन आलोचना या उपहास देखकर कई युवा और कलाकार डिप्रेशन (अवसाद) का शिकार हो जाते हैं या हड़बड़ाहट में गलत निर्णय ले लेते हैं।

उन्होंने नसीहत दी कि समाज में आलोचना का दौर कोई नया नहीं है, यह सदियों से चला आ रहा है। इसलिए सोशल मीडिया के माहौल से डरने या घबराने के बजाय विपरीत परिस्थितियों में दो-चार दिन शांत रहकर धैर्य बनाए रखना चाहिए। जब आप आलोचना को सकारात्मक दिशा में मोड़ना सीख जाते हैं, तो वही विरोधी टिप्पणियां आपकी पहचान और मजबूती का माध्यम बन जाती हैं। 

बीजेपी सांसद ने कहा कि देश की मौजूदा आबादी में युवाओं का अनुपात सबसे अधिक है और आने वाले समय में यही पीढ़ी देश के विकास, प्रशासनिक व्यवस्था, तकनीकी नवाचार और संसद से लेकर विधानसभाओं तक की बागडोर संभालेगी। युवाओं की सक्रियता, उनका दृष्टिकोण और व्यवस्था पर उनकी नजर लोकतंत्र को जीवंत बनाए रखने में सहायक होती है।

रवि किशन के अनुसार, जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ नेताओं को युवा पीढ़ी से दूरी बनाने या उनकी बातों पर नाराज होने के बजाय उनकी सोच को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे खुद को सामान्य इंसान मानते हैं, कोई भगवान नहीं। यही वजह है कि जब युवा उन पर मीम्स बनाते हैं या उनके हाव-भाव पर प्रतिक्रिया देते हैं, तो वह इसे एक दोतरफा संवाद और जनता का जुड़ाव मानते हैं।

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