बुंदेलखंड के किसानों को बड़ी राहत: झांसी और ललितपुर में बनेंगे 65 हजार मीट्रिक टन क्षमता के भंडारगृह, जमीन निशुल्क
योगी कैबिनेट ने झांसी और ललितपुर में 65,000 मीट्रिक टन क्षमता के भंडारगृह निर्माण को मंजूरी दी। राज्य भंडारण निगम को निशुल्क भूमि उपलब्ध कराई जाएगी।
लखनऊ। बुंदेलखंड क्षेत्र के अन्नदाताओं को उनकी उपज के वैज्ञानिक एवं सुरक्षित भंडारण की सुविधा उपलब्ध कराने तथा फसलों का उचित बाजार मूल्य दिलाने के उद्देश्य से योगी सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को संपन्न हुई कैबिनेट बैठक में झांसी और ललितपुर जनपदों में आधुनिक भंडारगृहों के निर्माण हेतु उत्तर प्रदेश राज्य भंडारण निगम को निशुल्क भूमि आवंटित करने के प्रस्ताव पर औपचारिक मुहर लगा दी गई है। इस पहल के तहत दोनों जनपदों में कुल 65 हजार मीट्रिक टन क्षमता के विशाल गोदामों का निर्माण किया जाएगा।
कैबिनेट बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी देते हुए प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि इस कदम से बुंदेलखंड के किसानों को दीर्घकालिक स्तर पर राहत प्राप्त होगी। उन्होंने अवगत कराया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विगत दिनों सहकारिता विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में बुंदेलखंड क्षेत्र में भंडारण नेटवर्क को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए थे। उसी क्रम में विभिन्न विभागों से समन्वय स्थापित कर भूमि की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
झांसी में 30 हजार और ललितपुर में बनेगी 35 हजार मीट्रिक टन क्षमता स्वीकृत प्रस्ताव के अनुसार, झांसी जनपद में लगभग 30 हजार मीट्रिक टन और ललितपुर जनपद में लगभग 35 हजार मीट्रिक टन भंडारण क्षमता वाले वेअरहाउस स्थापित किए जाएंगे। इन गोदामों का निर्माण एवं प्रबंधन सहकारिता विभाग के अधीन कार्यरत उत्तर प्रदेश राज्य भंडारण निगम द्वारा किया जाएगा। इन आधुनिक भंडारगृहों में क्षेत्र की प्रमुख उपजों जैसे दलहन (चना, मसूर, मटर), तिलहन (सरसों, तिल) और श्रीअन्न/मोटे अनाज (ज्वार, बाजरा) के सुरक्षित व वैज्ञानिक भंडारण की पुख्ता व्यवस्था होगी।
बाजार के उतार-चढ़ाव से बचेंगे किसान, मिलेगा लाभकारी मूल्य बुंदेलखंड की विषम भौगोलिक परिस्थितियों, सूखे और अनिश्चित वर्षा के कारण किसानों को अपनी मेहनत की उपज औने-पौने दामों पर बेचने के लिए विवश होना पड़ता था। स्थानीय स्तर पर बड़े भंडारगृहों के बन जाने से किसान प्रतिकूल बाजार परिस्थितियों में अपनी उपज को सुरक्षित रख सकेंगे और बाजार भाव अनुकूल होने पर उसे लाभकारी दरों पर बेच पाएंगे। इससे उपज की गुणवत्ता बनी रहेगी, पोस्ट-हार्वेस्ट नुकसान न्यूनतम होगा और कृषि विपणन तंत्र मजबूत होने से किसानों की आमदनी में वृद्धि होगी।
फसल बर्बादी पर अंकुश और स्थानीय रोजगार को मिलेगा बढ़ावा गोदामों की स्थापना से क्षेत्रीय कृषि आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) में सुधार होगा और कटाई के बाद होने वाली उपज की बर्बादी पर प्रभावी रोक लगेगी। इसके अतिरिक्त, निर्माण कार्य से लेकर गोदामों के नियमित संचालन तक—माल परिवहन, लोडिंग-अनलोडिंग, पैकेजिंग, सुरक्षा और रख-रखाव जैसी सहायक गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर युवाओं और श्रमिकों के लिए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
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