Hardoi: सीएचसी अधीक्षक के फैसले से ‘फर्जी पत्रकारों’ पर कसा शिकंजा, स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने की पहल

जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर अक्सर सवाल उठते रहते हैं, लेकिन इसी बीच सीएचसी हरपालपुर से एक सकारात्मक

Jun 11, 2026 - 16:56
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Hardoi: सीएचसी अधीक्षक के फैसले से ‘फर्जी पत्रकारों’ पर कसा शिकंजा, स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने की पहल
सीएचसी अधीक्षक के फैसले से ‘फर्जी पत्रकारों’ पर कसा शिकंजा, स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने की पहल

हरदोई/ हरपालपुर। जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर अक्सर सवाल उठते रहते हैं, लेकिन इसी बीच सीएचसी हरपालपुर से एक सकारात्मक खबर सामने आई है। यहां के अधीक्षक डॉ. आनंद पांडेय द्वारा उठाए गए सख्त कदम से अस्पताल की व्यवस्था में सुधार देखने को मिल रहा है, जिसकी स्थानीय लोग सराहना कर रहे हैं। दरअसल, लंबे समय से शिकायत मिल रही थी कि कुछ तथाकथित पत्रकार अस्पताल परिसर में सुबह से शाम तक डेरा जमाए रहते थे। ये लोग ओपीडी और इमरजेंसी वार्ड में अनावश्यक रूप से मौजूद रहकर न केवल स्वास्थ्य सेवाओं में बाधा उत्पन्न कर रहे थे, बल्कि डॉक्टरों और मरीजों को भी परेशान कर रहे थे। मरीजों द्वारा की गई शिकायतों के बाद जब इस मामले को गंभीरता से लिया गया तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। बताया गया कि कुछ लोग खुद को पत्रकार बताकर अस्पताल के संवेदनशील क्षेत्रों—जैसे ओपीडी, इमरजेंसी और एक्स-रे रूम—में बैठते थे और मरीजों की फोटो व वीडियो बनाते थे। इतना ही नहीं, उन पर मरीजों से अवैध वसूली करने और अस्पताल कर्मियों को ब्लैकमेल करने के भी आरोप लगे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सीएचसी अधीक्षक डॉ. आनंद पांडेय ने तुरंत कार्रवाई की। उन्होंने अस्पताल परिसर में एक अनुरोध पत्र चस्पा कराया, जिसमें स्पष्ट रूप से लिखा गया कि “सभी पत्रकार बंधुओं से अनुरोध है कि ओपीडी समय में बिना किसी विशेष कारण के अस्पताल परिसर में प्रवेश न करें।”
इस फैसले के बाद अस्पताल में अनावश्यक भीड़ कम होने लगी और डॉक्टरों को अपने काम में आसानी होने लगी। मरीजों ने भी राहत की सांस ली, क्योंकि अब उन्हें बिना किसी व्यवधान के इलाज मिल पा रहा है। हालांकि, इस कार्रवाई के बाद कुछ तथाकथित पत्रकारों में नाराजगी देखने को मिली। बताया जा रहा है कि जिन लोगों की ‘दुकान’ बंद हो गई, उन्होंने सोशल मीडिया पर अधीक्षक के खिलाफ पोस्ट डालकर विरोध जताने की कोशिश की। कुछ पोस्ट में अस्पताल के घेराव और प्रदर्शन की धमकी भी दी गई। लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि इस पूरे मामले में वास्तविक और जिम्मेदार पत्रकारों की ओर से किसी भी तरह का विरोध सामने नहीं आया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि अधीक्षक द्वारा उठाया गया कदम सही दिशा में है और इसका उद्देश्य केवल अस्पताल की व्यवस्था को बेहतर बनाना है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की सख्ती पहले भी होनी चाहिए थी, ताकि अस्पताल का माहौल स्वच्छ और सुरक्षित बना रहे। उनका मानना है कि स्वास्थ्य सेवाएं एक संवेदनशील क्षेत्र है, जहां अनुशासन और गोपनीयता बेहद जरूरी है। सीएचसी हरपालपुर में उठाया गया यह कदम न केवल अन्य स्वास्थ्य केंद्रों के लिए एक उदाहरण बन सकता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि यदि प्रशासनिक अधिकारी इच्छाशक्ति दिखाएं तो व्यवस्था में सुधार संभव है।

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