Chitrakoot Link Expressway: चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे को योगी कैबिनेट की हरी झंडी, 1008.67 करोड़ से बनेगा छह लेन मार्ग

उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे के संशोधित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। 1,008.67 करोड़ रुपये की लागत से 15.172 किमी लंबा छह लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे ईपीसी मोड पर बनेगा।

By INA News Desk
Sep 16, 2026 - 10:46
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Chitrakoot Link Expressway: चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे को योगी कैबिनेट की हरी झंडी, 1008.67 करोड़ से बनेगा छह लेन मार्ग

लखनऊ/चित्रकूट। उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे नेटवर्क के विस्तार और धार्मिक पर्यटन को विश्वस्तरीय सड़क संपर्क देने के क्रम में राज्य सरकार ने बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए बड़ा बुनियादी ढांचागत फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को संपन्न हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में 'चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे' के संशोधित परियोजना प्रस्ताव को औपचारिक स्वीकृति प्रदान कर दी गई। 15.172 किलोमीटर लंबे इस प्रवेश-नियंत्रित (एक्सेस कंट्रोल्ड) छह लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण पर कुल 1,008.67 करोड़ रुपये की लागत आएगी।

मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद प्रेस वार्ता में प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि परियोजना की संपूर्ण वित्तीय लागत राज्य सरकार द्वारा वहन की जाएगी। इसमें केंद्र सरकार से कोई वित्तीय भागीदारी प्रस्तावित नहीं है। राज्य की व्यय-वित्त समिति (Expenditure Finance Committee) द्वारा पूंजीगत मदों के विस्तृत मूल्यांकन और संशोधित लागत विश्लेषण के उपरांत कैबिनेट ने इस मद को अंतिम मंजूरी दी है।

ग्लोबल बिड के जरिए होगा निर्माण एजेंसी का चयन

मंत्रिपरिषद से अनुमोदन मिलने के पश्चात अब कार्यदायी संस्था द्वारा परियोजना को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया तेज की जाएगी। वित्त मंत्री के अनुसार, एक्सप्रेसवे का निर्माण इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (ईपीसी मोड) के अंतर्गत कराया जाएगा।

परियोजना के लिए विश्वस्तरीय निर्माण मानकों को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पारदर्शी अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धी बोली (ग्लोबल बिड) आमंत्रित की जाएगी। एजेंसी के चयन की प्रक्रिया निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरी की जाएगी, ताकि निर्माण कार्य को बिना किसी प्रशासनिक विलंब के गति दी जा सके। ईपीसी अनुबंध होने के कारण गुणवत्ता निगरानी और निर्माण की समयबद्धता सीधे तौर पर सुनिश्चित की जा सकेगी।

बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से चित्रकूट धाम का सीधा जुड़ाव

वर्तमान में संचालित 296 किलोमीटर लंबे बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का मुख्य संरेखण चित्रकूट जिले के भरतकूप के निकट समाप्त होता है। हालांकि, वहां से मुख्य चित्रकूट धाम और पवित्र तीर्थ स्थलों तक पहुंचने के लिए भारी वाहनों और तीर्थयात्रियों को सामान्य जिला मार्गों से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे कई बार जाम और समय की बर्बादी का सामना करना पड़ता है।

यह नया 15.172 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड लिंक एक्सप्रेसवे सीधे तौर पर बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के अंतिम छोर को मुख्य चित्रकूट धाम क्षेत्र से जोड़ेगा। एक्सेस-कंट्रोल्ड (प्रवेश-नियंत्रित) छह लेन संरचना होने के कारण भारी वाहनों और लंबी दूरी के यात्री वाहनों की गति अनवरत बनी रहेगी। इससे दिल्ली, आगरा, लखनऊ और कानपुर की दिशा से आने वाले वाहनों को शहर की स्थानीय सड़कों में उलझे बिना सीधे गंतव्य तक सुगम व सुरक्षित सफर मिलेगा।

धार्मिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नया संबल

चित्रकूट धाम ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दृष्टि से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित एक अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है। प्रभु श्रीराम के वनवास काल से जुड़े होने के कारण यहां कामदगिरि परिक्रमा, रामघाट, गुप्त गोदावरी, हनुमान धारा और सती अनुसुइया आश्रम जैसे स्थलों पर वर्षभर लाखों श्रद्धालुओं का आवागमन रहता है। अमावस्या, दीपावली और रामनवमी जैसे प्रमुख पर्वों पर यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है।

विश्वस्तरीय छह लेन लिंक एक्सप्रेसवे बनने से:

  • यातायात का समय घटेगा: मुख्य एक्सप्रेसवे से चित्रकूट धाम तक का सफर कुछ ही मिनटों में तय किया जा सकेगा।

  • तीर्थाटन में सुगमता: बुजुर्ग, दिव्यांग और दूर-दराज के राज्यों से आने वाले पर्यटकों को तेज और झंझट-मुक्त कनेक्टिविटी मिलेगी।

  • हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को विस्तार: आवागमन आसान होने से होटल, होमस्टे, रेस्टोरेंट और स्थानीय हस्तशिल्प (जैसे चित्रकूट के लकड़ी के पारंपरिक खिलौने) के व्यापार में तेजी आएगी।

  • बुंदेलखंड के विकास को आधार: स्थानीय युवाओं के लिए लॉजिस्टिक्स, ट्रांसपोर्टेशन और सेवा क्षेत्र में रोजगार के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष अवसर निर्मित होंगे।

संशोधित प्रस्ताव से गुणवत्ता और क्षमता में सुधार

परियोजना को लेकर पूर्व में तैयार की गई प्राथमिक रूपरेखा की तुलना में संशोधित प्रस्ताव में भूमि अधिग्रहण, भविष्य के यातायात दबाव और जल निकासी व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए तकनीकी सुधार किए गए हैं। छह लेन ग्रीनफील्ड मार्ग होने के चलते इसके किनारे आधुनिक जनसुविधाएं, इंटरचेंज और सुरक्षा बैरियर भी स्थापित किए जाएंगे, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना न्यूनतम रहे।

कैबिनेट की इस मंजूरी से यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार बुंदेलखंड क्षेत्र को मात्र मुख्य धारा से जोड़ने तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि उसके सांस्कृतिक और आध्यात्मिक केंद्रों को भी बड़े औद्योगिक व आर्थिक गलियारों के समान कनेक्टिविटी प्रदान करने की नीति पर काम कर रही है। आने वाले दिनों में ग्लोबल टेंडर की प्रक्रिया पूरी होते ही जमीन पर निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है।

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