CJP Protest Delhi: जंतर-मंतर प्रदर्शन में उपद्रव पर BNS की किन धाराओं में दर्ज हुई FIR? जानें कितनी होगी सजा

दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा मामले में पुलिस ने BNS की विभिन्न संगीन धाराओं में FIR दर्ज की है। जानिए किन धाराओं में कितनी सजा हो सकती है।

Jul 27, 2026 - 11:39
 0  4
CJP Protest Delhi: जंतर-मंतर प्रदर्शन में उपद्रव पर BNS की किन धाराओं में दर्ज हुई FIR? जानें कितनी होगी सजा
Jantar Mantar protest violence legal action
  • Delhi Protest FIR: CJP आंदोलन में हिंसा पर सख्त दिल्ली पुलिस, जानलेवा हमले से लेकर उपद्रव तक की धाराएं दर्ज
  • जंतर-मंतर CJP प्रदर्शन में हिंसा: BNS की कौन-कौन सी धाराएं लगीं और कितने साल की हो सकती है जेल?
  • CJP Protest Violence: दिल्ली पुलिस ने दर्ज की कई FIR, BNS की धारा 109(1) और 132 समेत लगीं संगीन धाराएं

राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में आयोजित 'सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस' (CJP) के 'संसद चलो' मार्च और प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा तथा उपद्रव के बाद दिल्ली पुलिस ने कड़ी कानूनी कार्रवाई शुरू की है। नई दिल्ली जिले के विभिन्न थानों में दर्ज प्राथमिकी (FIR) में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराएं शामिल की गई हैं। पुलिस प्रशासन का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने लागू निषेधाज्ञा का उल्लंघन किया, बैरिकेड्स तोड़े और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर हमला तथा पत्थरबाजी की। इन मामलों में नामजद व अज्ञात आरोपियों पर गैर-कानूनी जमावड़े से लेकर हत्या के प्रयास तक के आरोप लगाए गए हैं। ऐसे में यह समझना आवश्यक है कि कानून के तहत इन धाराओं में दोषियों के लिए कितने वर्ष के कारावास का प्रावधान है। 

नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को भंग करने और बैरिकेड्स तोड़कर संसद की तरफ बढ़ने के प्रयास में झड़प हुई। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों द्वारा किए गए पथराव और उपद्रव में कई पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि सरकारी व निजी संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचा। इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने संसद मार्ग, कर्तव्य पथ और कनॉट प्लेस जैसे थानों में कई एफआईआर दर्ज की हैं। इन मुकदमों में नए आपराधिक कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के विभिन्न प्रावधान जोड़े गए हैं। 

प्रदर्शन के लिए तय स्थान से आगे बढ़कर जब भीड़ ने संसद भवन की ओर जाने का प्रयास किया, तो पुलिस ने लागू भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 (पूर्व में CrPC 144) के तहत लागू पाबंदियों का हवाला देते हुए रोकने का प्रयास किया। पुलिस शिकायत के अनुसार, चेतावनी के बावजूद भीड़ उग्र हो गई और पथराव तथा धक्का-मुक्की शुरू कर दी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल ने आंसू गैस के गोले और हल्का लाठीचार्ज किया।

घटना के बाद पुलिस ने लगभग 250 से अधिक सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन फुटेज और बॉडी कैमरों की फुटेज खंगालकर संदिग्धों की पहचान शुरू की। जांच एजेंसियों ने यह भी आरोप लगाया है कि हिंसा के पीछे किसी पूर्व-नियोजित साजिश की आशंका की भी जांच की जा रही है।

धरना प्रदर्शन में उपद्रव पर लगने वाली प्रमुख BNS धाराएं और सजा का प्रावधान

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन के उग्र या हिंसक होने पर पुलिस द्वारा मुख्य रूप से इन धाराओं में केस दर्ज किया जाता है:

BNS धारा 189(3) (गैर-कानूनी जमावड़ा): किसी प्रतिबंधित क्षेत्र में बिना अनुमति के 5 या उससे अधिक लोगों के गैर-कानूनी रूप से एकत्र होने पर लागू होती है।

सजा: 6 महीने तक की जेल, जुर्माना या दोनों।

BNS धारा 223 (सरकारी आदेशों की अवहेलना): लोक सेवक द्वारा विधिवत लागू किए गए निषेधाज्ञा या आदेश (जैसे धारा 163 BNSS) का उल्लंघन करना।

सजा: 6 महीने से 1 साल तक की जेल या जुर्माना।

BNS धारा 132 (लोक सेवक पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग): ड्यूटी पर मौजूद पुलिस या सरकारी कर्मचारी को उनका काम करने से रोकने के लिए बल प्रयोग करना।

सजा: 3 वर्ष तक की कैद और जुर्माना।

BNS धारा 121(1) (लोक सेवक को स्वेच्छा से चोट पहुंचाना): ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी या अधिकारी को नुकसान पहुंचाना या घायल करना।

सजा: 5 वर्ष तक की जेल और जुर्माना।

BNS धारा 191(2) और 191(3) (बलवा/दंगा करना): हिंसक भीड़ का हिस्सा बनना अथवा हिंसा फैलाना।

सजा: 2 से 3 वर्ष तक का कारावास।

BNS धारा 109(1) (हत्या का प्रयास): गंभीर मामलों में जहां जानलेवा हमला करने या हथियार/पत्थर से गंभीर चोट पहुंचाने का आरोप हो, वहां यह धारा जोड़ी जाती है।

सजा: 10 वर्ष तक का कठोर कारावास या आजीवन कारावास तथा जुर्माना।

सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम (PDPP Act): सरकारी वाहनों, बैरिकेड्स या इमारतों को नुकसान पहुंचाने पर।

सजा: 5 वर्ष तक का कारावास और क्षतिपूर्ति का जुर्माना।

दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, कानून व्यवस्था को हाथ में लेने और शांति भंग करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने और सुरक्षाकर्मियों पर हमला करने वालों के खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी छात्र संगठनों और आयोजकों का दावा है कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण था और पुलिस बल प्रयोग अनुचित था। उन्होंने पुलिस पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन दबाने का आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। 

इस घटना का सीधा असर जंतर-मंतर और लुटियंस दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ा है। नई दिल्ली क्षेत्र में सुरक्षा निगरानी बढ़ा दी गई है और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया है। गंभीर धाराओं में केस दर्ज होने के कारण इसमें शामिल आरोपियों के पासपोर्ट क्लीयरेंस और सरकारी सेवाओं के पुलिस वेरिफिकेशन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। 

मामले में दर्ज प्राथमिकियों के आधार पर दिल्ली पुलिस की विशेष टीमें फुटेज और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही हैं। कानून के जानकारों का कहना है कि आरोपी अदालत के समक्ष जमानत अर्जी दाखिल कर सकते हैं, हालांकि जमानती और गैर-जमानती धाराओं के आधार पर ही अदालत राहत तय करेगी। निष्पक्ष न्याय प्रक्रिया के तहत जांच जारी है।

Also Read- Sudhanshu Trivedi Statement: NEET और शिक्षा पर चर्चा से भाग रही है कांग्रेस, भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी का बड़ा हमला

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

INA News_Admin आई.एन. ए. न्यूज़ (INA NEWS) initiate news agency भारत में सबसे तेजी से बढ़ती हुई हिंदी समाचार एजेंसी है, 2017 से एक बड़ा सफर तय करके आज आप सभी के बीच एक पहचान बना सकी है| हमारा प्रयास यही है कि अपने पाठक तक सच और सही जानकारी पहुंचाएं जिसमें सही और समय का ख़ास महत्व है।