लखनऊ में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की आत्मकथा का विमोचन: सीएम योगी बोले- अभावों को ढाल नहीं, संघर्ष का मार्ग बनाया
लखनऊ के लोकभवन में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की आत्मकथा का विमोचन हुआ। सीएम योगी ने कहा कि उनका जीवन संघर्ष और परिश्रम की एक प्रेरणादायी मिसाल है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित लोकभवन सभागार में एक गरिमामयी समारोह के दौरान देश के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ का हिंदी संस्करण विमोचित किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि रामनाथ कोविन्द का जीवन यह सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों और अभावों को रोना रोने के बजाय उन्हें संघर्ष की ताकत बनाकर कैसे आगे बढ़ा जाता है। गांव के एक साधारण विद्यालय से लेकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की उनकी यह यात्रा हर भारतीय के लिए अद्वितीय प्रेरणा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पहले ही इस पुस्तक का विमोचन किया जा चुका है और अब इसकी उत्तर प्रदेश में लॉन्चिंग होना प्रदेशवासियों के लिए बेहद गौरव का विषय है, क्योंकि यह भूमि उनकी जन्मभूमि और कर्मसाधना का क्षेत्र रही है। बचपन में माता का साया उठने और तमाम सामाजिक व आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी और अपनी मेहनत व संस्कारों के बल पर समाज में एक मिसाल कायम की।
कच्चे घर थे, लेकिन इरादे हमेशा पक्के थे
पूर्व राष्ट्रपति के शुरुआती जीवन का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कानपुर देहात के परौंख गांव के एक गरीब परिवार में जन्मे रामनाथ कोविन्द ने कभी भी अपनी परिस्थितियों को किसी के सामने अपनी कमजोरी या मांग का आधार नहीं बनाया। उनके इरादे हमेशा पक्के थे। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों का डटकर सामना किया और अधिवक्ता से लेकर राज्यसभा सदस्य, बिहार के राज्यपाल और अंत तक देश के प्रथम नागरिक के रूप में अपनी सेवाएं दीं। उनका यह सफर यह साबित करता है कि सच्ची निष्ठा और पुरुषार्थ से बड़ी से बड़ी मंजिल हासिल की जा सकती है।
युवाओं को सोशल मीडिया से हटकर पुस्तकें पढ़ने की सलाह
आज की युवा पीढ़ी पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का युवा अपना बहुमूल्य समय स्मार्टफोन और सोशल मीडिया पर रील देखने में बर्बाद कर रहा है। इसके बजाय यदि युवा महापुरुषों की जीवनियां और प्रेरणादायक पुस्तकें पढ़ें, तो उनका व्यक्तित्व और बौद्धिक विकास कहीं बेहतर ढंग से हो सकेगा। उन्होंने कहा कि आभासी दुनिया की लोकप्रियता से ज्यादा वास्तविक जीवन के अनुभव और ज्ञान महत्वपूर्ण होते हैं।
ग्राम पंचायतों में पुस्तकालयों का हो रहा निर्माण
प्रदेश में शिक्षा और पठन-पाठन के माहौल को बढ़ावा देने की बात करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार हर ग्राम पंचायत में पुस्तकालय विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य के 57,600 से अधिक ग्राम सचिवालयों में पुस्तकालय के लिए एक अलग कक्ष निर्धारित किया गया है, ताकि गांवों के बच्चों को भी अध्ययन के लिए अच्छी पुस्तकें और संसाधन मिल सकें। इसके साथ ही बेसिक से लेकर उच्च शिक्षण संस्थानों तक पुस्तकालयों को समृद्ध किया जा रहा है।
समारोह के अंत में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द, उनकी धर्मपत्नी सविता कोविन्द, विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक, वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण सहित कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे।
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