Delhi Airport Chaos: स्पाइसजेट की दुबई फ्लाइट 24 घंटे से ज्यादा लेट, दिल्ली एयरपोर्ट पर यात्रियों का जोरदार हंगामा और धरना
दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर स्पाइसजेट की दुबई जाने वाली उड़ान 24 घंटे से अधिक लेट होने पर यात्रियों ने टर्मिनल के भीतर धरना देकर जोरदार प्रदर्शन किया।
- Delhi Airport Chaos: स्पाइसजेट की दुबई फ्लाइट 24 घंटे से ज्यादा लेट, दिल्ली एयरपोर्ट पर यात्रियों का जोरदार हंगामा और धरना
- दिल्ली एयरपोर्ट पर स्पाइसजेट यात्रियों का फूटा गुस्सा: 24 घंटे इंतजार के बाद टर्मिनल में लगे नारे, फर्श पर धरने पर बैठे मुसाफिर
- SpiceJet Flight Delay: दिल्ली से दुबई जाने वाली उड़ान में भारी देरी, एयरपोर्ट पर घंटों फंसे रहे बच्चे और बुजुर्ग; एयरलाइन पर फूटा आक्रोश
- IGI Airport Protest: स्पाइसजेट की अंतरराष्ट्रीय उड़ान में तकनीकी अड़ंगा, बिना स्पष्ट जानकारी भड़के यात्रियों ने टर्मिनल पर किया प्रदर्शन
राष्ट्रीय राजधानी के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI Airport) पर निजी एयरलाइन कंपनी स्पाइसजेट की अंतरराष्ट्रीय उड़ान में अप्रत्याशित विलंब के चलते यात्रियों के सब्र का बांध टूट गया। दिल्ली से दुबई जाने वाली स्पाइसजेट की नियमित उड़ान 24 घंटे से भी अधिक समय तक टलने के बाद उत्तेजित मुसाफिरों ने हवाई अड्डे के टर्मिनल भवन के भीतर धरना शुरू कर दिया। घंटों तक लाउंज और बोर्डिंग गेट के आसपास भटकने, उचित भोजन-पानी की व्यवस्था न मिलने और एयरलाइन प्रतिनिधियों की ओर से कोई ठोस समाधान न मिलने पर नाराज यात्रियों ने जोरदार नारेबाजी की, जिससे सुरक्षा तंत्र में भी हड़कंप मच गया।
हवाई अड्डे पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह उड़ान अपने निर्धारित समय से रवाना होनी थी। यात्रियों ने तय नियमों के तहत चेक-इन और सुरक्षा जांच (इमिग्रेशन और सिक्योरिटी चेक) पूरी कर ली थी। सुरक्षा घेरे के पार प्रस्थान क्षेत्र में पहुंचने के बाद जब बोर्डिंग का समय आया, तो ग्राउंड स्टाफ द्वारा बार-बार तकनीकी कारणों और ऑपरेशनल दिक्कतों का हवाला देते हुए प्रस्थान का समय आगे बढ़ाया जाता रहा। एक के बाद एक समय बदलने का यह सिलसिला पूरी रात चलता रहा और अगले दिन तक उड़ान आसमान में नहीं उड़ सकी।
- टर्मिनल के फर्श पर बैठे मुसाफिर, बच्चों और बुजुर्गों की बढ़ी परेशानी
उड़ान में देरी के कारण सबसे ज्यादा परेशानी परिवार के साथ यात्रा कर रहे लोगों, छोटे बच्चों और बुजुर्गों को उठानी पड़ी। प्रस्थान क्षेत्र में 24 घंटे से अधिक समय तक लगातार फंसे रहने के कारण यात्रियों को बैठने तक की पर्याप्त जगह नहीं मिल सकी। कई मुसाफिरों को अपने बैग और ट्रॉली के सहारे टर्मिनल के फर्श पर ही रात गुजारनी पड़ी।
यात्रियों का आरोप है कि इस दौरान एयरलाइन के मैसेंजर या कस्टमर सपोर्ट स्टाफ की तरफ से कोई स्पष्ट और पारदर्शी जानकारी साझा नहीं की जा रही थी। हर कुछ घंटों बाद स्क्रीन पर केवल नया समय दर्ज कर दिया जाता था। सुरक्षा जांच पूरी हो जाने के कारण यात्री हवाई अड्डे से बाहर निकलकर किसी होटल या घर भी आसानी से नहीं जा सकते थे, क्योंकि आव्रजन (इमिग्रेशन) की औपचारिकताओं को रद्द कराने की प्रक्रिया बेहद जटिल होती है। बुनियादी सुविधाओं और स्पष्ट उत्तर के अभाव में मुसाफिरों का गुस्सा बढ़ता गया और उन्होंने संगठित होकर एयरलाइन के काउंटर के बाहर धरना दे दिया।
- एयरलाइन पर वादाखिलाफी और समन्वय की कमी का आरोप
धरने पर बैठे यात्रियों का कहना था कि कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए निर्धारित नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के मानकों का पालन नहीं किया। नियमों के अनुसार यदि किसी उड़ान में अत्यधिक देरी होती है, तो एयरलाइन को यात्रियों के ठहरने के लिए होटल, समय पर भोजन, अल्पाहार और वैकल्पिक उड़ान की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होती है।
मुसाफिरों ने आरोप लगाया कि ग्राउंड स्टाफ ने शुरुआत में कुछ देर में विमान तैयार होने का झांसा दिया और बाद में अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ते हुए गायब होने लगे। दुबई में महत्वपूर्ण व्यावसायिक बैठकों, कनेक्टिंग उड़ानों और पारिवारिक कार्यक्रमों में शामिल होने जा रहे कई यात्रियों के टिकट और आगामी यात्रा कार्यक्रम इस अव्यवस्था के कारण पूरी तरह बर्बाद हो गए। इसी हताशा में आक्रोशित यात्रियों ने टर्मिनल के भीतर एयरलाइन प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और जवाबदेही तय करने की मांग की।
- सुरक्षा बलों का हस्तक्षेप और उड़ानों का परिचालन संकट
हवाई अड्डे के अति-संवेदनशील प्रस्थान क्षेत्र में यात्रियों के धरने और नारेबाजी की सूचना मिलते ही केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवान और हवाई अड्डा प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। सुरक्षा कर्मियों ने उग्र हो रहे यात्रियों को शांत कराने और समझाइश देने का प्रयास किया। अधिकारियों ने एयरलाइन के वरिष्ठ प्रबंधकों को मौके पर तलब कर यात्रियों के साथ सीधा संवाद स्थापित करने के निर्देश दिए।
उल्लेखनीय है कि स्पाइसजेट पिछले काफी समय से विमानों की उपलब्धता, पट्टे (लीज) से जुड़ी कानूनी पेचीदगियों और वित्तीय दबावों के चलते सीमित बेड़े के साथ परिचालन कर रही है। विमानों की कमी के कारण जब किसी एक विमान में तकनीकी खराबी आती है, तो उसका व्यापक असर पूरी उड़ान अनुसूची (रोस्टर) पर पड़ता है, क्योंकि बैकअप के लिए अतिरिक्त विमान उपलब्ध नहीं होते। इसी तकनीकी श्रृंखला के टूटने से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का समय-चक्र अक्सर पटरी से उतर जाता है।
- डीजीसीए के नियम और यात्रियों के उपभोक्ता अधिकार
विमानन नियामक डीजीसीए के नागरिक उड्डयन नियमों (CAR) के तहत यात्रियों के अधिकारों का स्पष्ट प्रावधान है:
यदि किसी अंतरराष्ट्रीय या लंबी दूरी की उड़ान में 6 घंटे से अधिक की देरी होती है, तो एयरलाइन को प्रस्थान से 24 घंटे पहले सूचित करना अनिवार्य है या फिर वैकल्पिक उड़ान की व्यवस्था करनी होती है।
24 घंटे या उससे अधिक की अप्रत्याशित देरी की स्थिति में यात्रियों को होटल में निःशुल्क आवास और भोजन उपलब्ध कराना एयरलाइन की विधिक जिम्मेदारी है।
यदि यात्री यात्रा रद्द करना चाहते हैं, तो उन्हें टिकट का पूरा रिफंड बिना किसी कटौती के तत्काल मिलना चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर भारतीय विमानन क्षेत्र में उड़ानों के अचानक टलने और एयरलाइनों द्वारा यात्रियों के साथ किए जाने वाले संवाद की कमी के मुद्दे को सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। उपभोक्ता मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक नियामकीय संस्थाएं ऐसी लापरवाही पर दंडात्मक कार्रवाई नहीं करेंगी, तब तक आम यात्रियों को इस प्रकार की असुविधाओं का सामना करना पड़ता रहेगा।
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