Delhi Park Security: आस्था कुंज पार्क की वारदात के बाद जागा प्रशासन, दिल्ली के 1000 पार्कों में लगेंगे CCTV कैमरे और तैनात होंगे गार्ड
Delhi Park Security: नेहरू प्लेस के आस्था कुंज पार्क में हुई आपराधिक घटना के बाद दिल्ली नगर निगम और प्रशासन ने 1000 पार्कों में CCTV कैमरे लगाने और सुरक्षा गार्ड तैनात करने का फैसला किया है।
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दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के नेहरू प्लेस स्थित प्रसिद्ध 'आस्था कुंज पार्क' में हाल ही में सामने आई गंभीर आपराधिक वारदात के बाद आखिरकार राजधानी का प्रशासनिक तंत्र हरकत में आ गया है। सार्वजनिक स्थलों और पार्कों में नागरिकों, विशेषकर महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली नगर निगम (MCD) और संबंधित विकास प्राधिकरणों ने व्यापक सुरक्षा कार्ययोजना तैयार की है। नए आदेशों के तहत दिल्ली के लगभग 1,000 प्रमुख पार्कों में उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगाए जाएंगे और नियमित रूप से प्रशिक्षित सुरक्षा गार्डों की तैनाती की जाएगी।
इस कदम का प्राथमिक उद्देश्य शहर के हरित क्षेत्रों में असामाजिक तत्वों की आवाजाही पर नकेल कसना और आगंतुकों के लिए भयमुक्त वातावरण तैयार करना है। राजधानी के कई बड़े पार्क शाम ढलते ही अंधेरे और सुनसान माहौल के कारण आपराधिक गतिविधियों का अड्डा बन जाते हैं, जिसे लेकर लंबे समय से स्थानीय निवासी सुरक्षा की मांग कर रहे थे।

- आस्था कुंज की वारदात बनी सुरक्षा समीक्षा की वजह
नेहरू प्लेस स्थित आस्था कुंज पार्क एक विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है, जहां रोजाना हजारों लोग सुबह की सैर, योग और विश्राम के लिए पहुंचते हैं। हाल ही में इस पार्क के सुनसान कोने में घटी आपराधिक घटना ने राजधानी में सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी थी। पार्क में सुरक्षाकर्मियों की गैर-मौजूदगी, खराब पड़ी लाइटें और कैमरों का अभाव जांच के दौरान बड़ी खामियों के रूप में सामने आए थे।
इस घटना के बाद नागरिक संगठनों, स्थानीय रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (RWA) और विपक्षी दलों ने दिल्ली सरकार और नगर निगम के खिलाफ तीखा आक्रोश व्यक्त किया था। चौतरफा दबाव के बाद उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई गई, जिसमें पार्कों की सुरक्षा को शीर्ष प्राथमिकता देते हुए तत्काल प्रभाव से कड़े कदम उठाने का निर्णय लिया गया।
1000 पार्कों में क्या-क्या होंगे सुरक्षा बदलाव?
प्रशासनिक योजना के तहत पहले चरण में उन 1,000 पार्कों को चिह्नित किया गया है जिनका क्षेत्रफल अधिक है और जहां रोजाना आगंतुकों की संख्या बहुत ज्यादा रहती है:
हाई-डेफिनिशन नाइट-विजन कैमरे: पार्कों के सभी प्रवेश और निकास द्वारों, मुख्य जॉगिंग ट्रैक्स और सघन वनस्पति वाले संवेदनशील कोनों पर 360-डिग्री नाइट-विजन कैमरे लगाए जाएंगे।
सुरक्षा गार्डों की दोहरी शिफ्ट में तैनाती: पार्कों में सुबह और शाम के पीक आवर्स के अलावा रात के समय भी निजी सुरक्षा एजेंसियों के माध्यम से प्रशिक्षित सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया जाएगा।
एलईडी लाइटिंग और डार्क स्पॉट्स का खात्मा: पार्कों के भीतर बने 'डार्क स्पॉट्स' (अंधेरे वाले स्थान) की पहचान कर वहां हाई-मास्ट और सौर ऊर्जा से संचालित एलईडी लाइटें लगाई जाएंगी।
लोकल पुलिस से सीधा संपर्क (Panic Button): कई बड़े पार्कों में आपातकालीन पैनिक बटन लगाने पर भी विचार किया जा रहा है, जिसका सीधा लिंक नजदीकी पुलिस स्टेशन या पार्क के मुख्य सुरक्षा केबिन से होगा।
- आरडब्ल्यूए और मॉर्निंग वॉकर्स को मिलेगी राहत
राजधानी के विभिन्न इलाकों जैसे ग्रेटर कैलाश, साकेत, रोहिणी, द्वारका, मयूर विहार और लाजपत नगर के स्थानीय निवासियों ने इस फैसले का स्वागत किया है। सुबह और देर शाम पार्कों में टहलने वाली महिलाओं का कहना है कि सुरक्षा गार्डों की मौजूदगी और कैमरों की निगरानी से असामाजिक तत्वों, नशा करने वालों और मनचलों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनेगा।
रेजिडेंट्स का यह भी कहना है कि केवल कैमरे लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उनका नियमित मेंटेनेंस हो और रिकॉर्डिंग डेटा सुरक्षित रहे। नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि पार्कों के सुरक्षा तंत्र की मासिक समीक्षा की जाएगी और संबंधित क्षेत्रीय अधिकारियों को लापरवाही पाए जाने पर जवाबदेह ठहराया जाएगा।
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