Delhi Jharkhand Bhawan Incident: दिल्ली के झारखंड भवन में लिफ्ट में फंसा पूर्व सांसद घूरन राम का परिवार, 6 लोग हुए बेहोश

Delhi News: दिल्ली के मुनिरका स्थित झारखंड भवन में लिफ्ट खराब होने से पूर्व सांसद घूरन राम के परिवार के 6 सदस्य फंस गए और बेहोश हो गए। सभी को अस्पताल में भर्ती कराया गया।

By INA News Desk
Oct 1, 2026 - 13:09
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Delhi Jharkhand Bhawan Incident: दिल्ली के झारखंड भवन में लिफ्ट में फंसा पूर्व सांसद घूरन राम का परिवार, 6 लोग हुए बेहोश
  • मुनिरका के झारखंड भवन में तकनीकी खराबी से बंद हुई लिफ्ट: पूर्व सांसद के परिजन अस्पताल में भर्ती, प्रबंधन पर उठे सवाल
  • Delhi News: झारखंड भवन में बड़ा हादसा टला, पूर्व सांसद घूरन राम के 6 परिजन लिफ्ट में फंसे; रेस्क्यू के बाद 1 अभी भी उपचाराधीन
  • पूर्व सांसद घूरन राम ने झारखंड भवन प्रशासन पर जताई सख्त नाराजगी: लिफ्ट रुकने से बिगड़ी थी परिवार की तबीयत, पुलिस को देरी से मिली सूचना

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के मुनिरका स्थित राज्य अतिथि गृह 'झारखंड भवन' में एक गंभीर तकनीकी लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां बुधवार रात अचानक लिफ्ट बंद हो जाने के कारण पूर्व सांसद घूरन राम के परिवार के छह सदस्य काफी देर तक अंदर ही फंसे रह गए। लिफ्ट के भीतर हवा के सीमित प्रवाह और दम घुटने जैसी स्थिति बनने से परिवार के सभी छह सदस्य बेहोश हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही आनन-फानन में तकनीकी टीम ने रेस्क्यू अभियान चलाकर सभी को बाहर निकाला और नजदीकी बसंत विहार स्थित होली एंजिल्स अस्पताल में भर्ती कराया।

अस्पताल से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, प्राथमिक उपचार के बाद पांच सदस्यों की स्थिति में सुधार होने पर उन्हें छुट्टी दे दी गई है, जबकि परिवार का एक सदस्य अब भी चिकित्सकीय देखरेख में उपचाराधीन है। इस घटना के बाद अतिथि गृह में वीआईपी और आगुंतकों की सुरक्षा व उपकरणों के रखरखाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

  • बुधवार रात का घटनाक्रम: अचानक थमी लिफ्ट

जानकारी के अनुसार, पलामू के पूर्व सांसद घूरन राम के परिवार के सदस्य किसी कार्यवश दिल्ली आए हुए थे और मुनिरका स्थित झारखंड भवन में ठहरे थे। बुधवार की रात वे भवन के एक तल से दूसरे तल पर जाने के लिए लिफ्ट में सवार हुए। लिफ्ट अभी बीच में ही थी कि अचानक तकनीकी खराबी आ गई और वह दो मंजिलों के बीच जाम हो गई।

लिफ्ट का दरवाजा बंद होने और आपातकालीन अलार्म या वेंटिलेशन प्रणाली के सही समय पर प्रभावी न होने के चलते लिफ्ट के भीतर मौजूद सदस्यों का दम घुटने लगा। काफी समय तक मदद न मिल पाने और ऑक्सीजन की कमी के चलते एक-एक कर सभी छह सदस्य अचेत हो गए। जब बाहर मौजूद कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों को अनहोनी की भनक लगी, तो तुरंत बचाव दल को बुलाया गया। कड़ी मशक्कत के बाद लिफ्ट के दरवाजे को तकनीकी रूप से खोलकर सभी बेहोश सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और तुरंत अस्पताल ले जाया गया।

  • पूर्व सांसद ने जताई कड़ी नाराजगी

अपने परिजनों के साथ हुए इस दर्दनाक हादसे और भवन प्रबंधन के ढुलमुल रवैये को देखकर पूर्व सांसद घूरन राम ने गहरा रोष व्यक्त किया है। उन्होंने भवन के रखरखाव, आपातकालीन सुरक्षा प्रोटोकॉल और तकनीकी निगरानी में भारी कोताही का आरोप लगाया। उनका कहना था कि राज्य सरकार के इतने महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान में, जहां जनप्रतिनिधि, अधिकारी और उनके परिवार ठहरते हैं, वहां लिफ्ट जैसी अनिवार्य सुविधा का नियमित मेंटेनेंस न होना अक्षम्य लापरवाही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि समय रहते रेस्क्यू नहीं किया जाता, तो यह तकनीकी चूक एक बहुत बड़े जानलेवा हादसे में बदल सकती थी।

  • दिल्ली पुलिस को देर से मिली सूचना

इस पूरे मामले में पुलिस प्रशासन की भूमिका और सूचना के आदान-प्रदान पर भी सवाल उठे हैं। दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के मुताबिक, घटना की रात झारखंड भवन प्रबंधन या संबंधित सुरक्षा तंत्र की ओर से स्थानीय थाने को कोई औपचारिक कॉल या सूचना नहीं दी गई थी।

पुलिस को इस घटना का आधिकारिक विवरण गुरुवार को प्राप्त हुआ, जिसके बाद पुलिस टीम ने अस्पताल पहुंचकर भर्ती मरीज की स्थिति का जायजा लिया और घटनास्थल का मुआयना किया। पुलिस का कहना है कि वे इस बात की जांच कर रहे हैं कि लिफ्ट में खराबी किस कारण से आई, क्या लिफ्ट का वैध फिटनेस और मेंटेनेंस सर्टिफिकेट उपलब्ध था, तथा आपात स्थिति में अलार्म सिस्टम ने काम क्यों नहीं किया।

  • सरकारी भवनों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर सवाल

मुनिरका स्थित झारखंड भवन में घटी यह घटना दिल्ली में स्थित विभिन्न राज्यों के राज्य अतिथि गृहों (State Guest Houses) में सुरक्षा मानकों की जमीनी हकीकत को उजागर करती है। नियमों के अनुसार, किसी भी बहुमंजिला सरकारी भवन में लिफ्ट का समय-समय पर ऑडिट होना, ऑटोमैटिक रेस्क्यू डिवाइस (ARD) का सक्रिय रहना और चौबीसों घंटे सुरक्षा नियंत्रण कक्ष से संपर्क की सुविधा अनिवार्य है। इस मामले में जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि खराबी यांत्रिक थी या बिजली आपूर्ति के अचानक बाधित होने से यह हादसा हुआ।

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