Delhi News: संसद मार्ग थाने के बाहर धरने पर बैठे प्रदर्शनकारी हिरासत में, महिला पत्रकारों से यौन उत्पीड़न के आरोपी पुलिस अधिकारी पर FIR की मांग

दिल्ली के संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन कर रहे लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। प्रदर्शनकारी एक पुलिस अधिकारी पर महिला पत्रकारों से यौन हिंसा का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रहे थे।

By INA News Desk
Oct 5, 2026 - 21:39
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Delhi News: संसद मार्ग थाने के बाहर धरने पर बैठे प्रदर्शनकारी हिरासत में, महिला पत्रकारों से यौन उत्पीड़न के आरोपी पुलिस अधिकारी पर FIR की मांग
  • संसद मार्ग थाने पर बवाल: महिला पत्रकारों से दुर्व्यवहार के आरोप में पुलिसकर्मी के खिलाफ प्रदर्शन, पुलिस ने कई लोगों को लिया हिरासत में
  • Delhi Police Protest: पुलिस अधिकारी पर बदसलूकी और उत्पीड़न का गंभीर आरोप, थाने के सामने प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस की कार्रवाई
  • राजधानी में हंगामा: संसद मार्ग थाने के बाहर महिला पत्रकारों के समर्थन में उतरे प्रदर्शनकारी, कार्रवाई की मांग के बीच हिरासत में लिए गए

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के अति-सुरक्षित लुटियंस जोन स्थित संसद मार्ग थाने के बाहर उस वक्त स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब महिला पत्रकारों से कथित यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के मामले में धरने पर बैठे दर्जनों प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। यह प्रदर्शनकारी संबंधित पुलिस अधिकारी के विरुद्ध तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने और उसके खिलाफ सख्त विभागीय व कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग को लेकर थाने के प्रवेश द्वार पर धरने पर बैठे थे। पुलिस ने निषेधाज्ञा (बीएनएसएस धारा 163 / पूर्ववर्ती धारा 144) और सार्वजनिक आवागमन बाधित होने का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को जबरन हटाया और पुलिस वैन में भरकर नजदीकी केंद्रों पर भेज दिया।

पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब ड्यूटी के दौरान कवरेज कर रहीं महिला पत्रकारों के साथ दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी द्वारा कथित रूप से अनुचित स्पर्श, अमर्यादित आचरण और लैंगिक हिंसा किए जाने का मामला सामने आया। पीड़ित पत्रकारों और मीडिया संगठनों का आरोप है कि घटना की लिखित शिकायत दिए जाने के बावजूद संबंधित अधिकारी के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू करने में टालमटोल की जा रही थी। इसी आक्रोश के तहत नागरिक समाज, पत्रकार संगठनों और छात्र समूहों के प्रतिनिधि एकत्र होकर थाने के बाहर न्याय की मांग करने पहुंचे थे।

  • थाने के बाहर क्या हुआ?

घटनाक्रम के अनुसार, दोपहर के समय प्रदर्शनकारी तख्तियां और बैनर लेकर संसद मार्ग थाने की ओर बढ़े। उन्होंने थाने के मुख्य द्वार के समीप शांतिपूर्ण धरना शुरू किया और आरोपी पुलिसकर्मी के खिलाफ यौन अपराधों से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज करने के नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब तक पुलिस अपने ही महकमे के आरोपी अधिकारी के खिलाफ निष्पक्ष जांच और एफआईआर की प्रति उपलब्ध नहीं कराती, तब तक वे वहां से नहीं हटेंगे।

हालात बिगड़ते देख थाने के आसपास भारी संख्या में पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों की टुकड़ियों को तैनात कर दिया गया। परिसर के दोनों तरफ बहुस्तरीय बैरिकेडिंग लगा दी गई ताकि अन्य लोग एकत्र न हो सकें। अधिकारियों ने लाउडस्पीकर के माध्यम से प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दी कि यह क्षेत्र उच्च सुरक्षा परिधि में आता है और यहां बिना पूर्व अनुमति के धरना-प्रदर्शन करना कानूनन गैरकानूनी है। जब प्रदर्शनकारियों ने उठने से इनकार किया, तो महिला पुलिसकर्मियों और सुरक्षाबलों ने उन्हें खींचकर पुलिस बसों में बैठाया और हिरासत में ले लिया।

  • महिला पत्रकारों के गंभीर आरोप

प्रदर्शनकारियों के अनुसार, यह घटना केवल एक साधारण विवाद नहीं है बल्कि कार्यस्थल और पेशेवर दायित्वों के निर्वहन के दौरान महिलाओं की सुरक्षा पर सीधा हमला है। पीड़ित महिला पत्रकारों का आरोप है कि जब वे एक सार्वजनिक घटनाक्रम को कवर कर रही थीं, उस दौरान भीड़ प्रबंधन के नाम पर एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने जानबूझकर उनके साथ अनुचित शारीरिक व्यवहार किया और आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं।

पत्रकार संगठनों का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वतंत्र पत्रकारिता करने वाली महिला कर्मियों के साथ इस तरह का बर्ताव अस्वीकार्य है। यदि कानून की रक्षा करने वाले ही उत्पीड़न के मामलों में संलिप्त पाए जाते हैं और महकमा उन पर पर्दा डालने का प्रयास करता है, तो आम नागरिकों में न्याय व्यवस्था के प्रति अविश्वास की भावना पैदा होती है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी अथवा महिला आईपीएस अधिकारी की निगरानी में कराई जाए।

  • पुलिस का पक्ष

इस पूरे विवाद पर पुलिस प्रशासन का रुख है कि कानून के तहत हर शिकायत की प्राथमिक जांच (Preliminary Inquiry) की जाती है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, प्राप्त शिकायत का संज्ञान लिया गया है और मौके की सीसीटीवी फुटेज तथा वीडियो रिकॉर्डिंग का विश्लेषण किया जा रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि संसद मार्ग और उसके आसपास का इलाका संसद भवन, मंत्रालयों और विभिन्न दूतावासों के समीप स्थित होने के कारण संवेदनशील है। यहां किसी भी प्रकार के अनधिकृत जमावड़े से सामान्य यातायात और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होती है। इसी आधार पर सार्वजनिक शांति बनाए रखने के लिए निवारक कार्रवाई के तहत प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही अगली कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी।

  • प्रेस स्वतंत्रता और कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा की बहस तेज

संसद मार्ग थाने के बाहर हुए इस घटनाक्रम ने एक बार फिर राष्ट्रीय राजधानी में पत्रकारों की सुरक्षा और कार्यस्थल पर महिलाओं के कानूनी अधिकारों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विभिन्न मीडिया यूनियनों और प्रेस क्लब ने इस मामले में गहरी चिंता व्यक्त करते हुए गृह मंत्रालय और उपराज्यपाल सचिवालय से हस्तक्षेप की मांग की है।

नागरिक संगठनों का तर्क है कि कानून में स्पष्ट प्रावधान है कि संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) विशेषकर महिलाओं के खिलाफ लैंगिक अपराधों की शिकायत मिलने पर तुरंत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज होना अनिवार्य है। ऐसे में प्रक्रियागत जांच के नाम पर देरी करना सुप्रीम कोर्ट के ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार के ऐतिहासिक फैसले की अवहेलना के समान है। अब देखना यह होगा कि मामले की जांच रिपोर्ट में क्या तथ्य सामने आते हैं और प्रशासन आरोपी अधिकारी के खिलाफ क्या कदम उठाता है।

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