Sambhal: आधी रोटी खाइए, बच्चों को ज़रूर पढ़ाइए- हयातनगर में उर्स से शिक्षा और एकता का पैगाम
सम्भल जिले के हयातनगर में औलाद-ए-अली हज़रत सय्यद शाहिद मियां उर्फ कल्लू मियां के सालाना उर्स मुबारक का आयोजन
उवैस दानिश, सम्भल
सम्भल जिले के हयातनगर में औलाद-ए-अली हज़रत सय्यद शाहिद मियां उर्फ कल्लू मियां के सालाना उर्स मुबारक का आयोजन अकीदत और धार्मिक श्रद्धा के साथ किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत फ़ज्र की नमाज़ के बाद कुरआनखानी से हुई। इसके बाद ज़ुहर की नमाज़ के बाद चादरपोशी, गुलपोशी, नात-ख्वानी और तकरीर का सिलसिला चला, जबकि असर की नमाज़ के बाद कुल शरीफ़ की रस्म अदा की गई।
उर्स में कारी मुहम्मद तज़ीम अशरफ, पीर सय्यद अदील मियां (खानकाह-ए-लतीफ़िया सीकरी शरीफ़, कलियर शरीफ़) सहित कई उलेमा और धर्मगुरु मौजूद रहे। सज्जादानशीन सय्यद फैसल मियां और अन्य उलेमा ने मुल्क में अमन, तरक्की और कौम की खुशहाली के लिए विशेष दुआ कराई। मुफ्ती आलम रज़ा नूरी ने अपने संबोधन में समाज सुधार और शिक्षा पर विशेष ज़ोर देते हुए कहा कि तरक्की का रास्ता इल्म से होकर गुजरता है। उन्होंने कहा आधी रोटी खाइए, लेकिन बच्चों को ज़रूर पढ़ाइए। बगैर इल्म के इंसान अंधा है। जहालत इंसान को गुलाम बनाती है, जबकि इल्म इंसान को बादशाह बनाता है। उन्होंने मुस्लिम समाज से अपील करते हुए कहा कि अपनी औलाद के हाथों में हथियार नहीं, बल्कि कलम दीजिए। उनका कहना था कि बच्चों को कुछ दो या मत दो, लेकिन इल्म ज़रूर दो। पाँच रुपये की कलम भी उनकी ज़िंदगी बदल सकती है। उर्स के मंच से धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा अपनाने, सामाजिक बुराइयों से दूर रहने और राष्ट्र की खुशहाली के लिए मिल-जुलकर काम करने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत कर दुआओं में हिस्सा लिया।
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