मौसम का मिजाज बिगड़ने से दिल्ली में विजिबिलिटी घटने से आठ उड़ानों का मार्ग बदला, लखनऊ डायवर्ट
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में अचानक मौसम का मिजाज पूरी
- यात्रियों की बढ़ीं मुश्किलें- खराब मौसम के चलते एक महत्वपूर्ण उड़ान को करना पड़ा निरस्त, एयरपोर्ट पर मचा भारी उहापोह
- एयरपोर्ट पर विमानों का दबाव- दिल्ली के आसमान में ट्रैफिक जाम जैसी स्थिति के बाद अमौसी हवाई अड्डे को बनाया गया सुरक्षित केंद्र
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में अचानक मौसम का मिजाज पूरी तरह बिगड़ जाने के कारण हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर तेज हवाओं, अचानक हुई मूसलाधार बारिश और कम दृश्यता यानी विजिबिलिटी के बेहद खराब स्तर के कारण विमानों के सुरक्षित संचालन में भारी बाधा उत्पन्न हुई। इस प्रतिकूल वायुमंडलीय परिस्थिति को देखते हुए विमानन नियामकों और एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) ने सुरक्षा के लिहाज से बेहद कड़ा रुख अपनाया। दिल्ली आने वाली और वहां से उड़ान भरने वाली विभिन्न एयरलाइंस की कुल आठ महत्वपूर्ण उड़ानों को एहतियातन उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के चौधरी चरण सिंह अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (अमौसी एयरपोर्ट) की तरफ डायवर्ट यानी मार्ग परिवर्तित करना पड़ा।
मौसम की इस अप्रत्याशित खराबी और उड़ानों के मार्ग में अचानक किए गए बड़े बदलाव के कारण देश के दो सबसे व्यस्त हवाई अड्डों पर यात्रियों को अभूतपूर्व असुविधा और भारी परेशानी का सामना करना पड़ा है। दिल्ली में जहां उतरने का इंतजार कर रहे विमानों के यात्रियों को हवा में ही लंबा समय बिताना पड़ा, वहीं लखनऊ में अचानक इतनी बड़ी संख्या में डायवर्ट होकर पहुंचे विमानों के कारण एयरपोर्ट की बुनियादी व्यवस्थाओं पर दबाव काफी बढ़ गया। सबसे अधिक संकटपूर्ण स्थिति तब उत्पन्न हुई जब मौसम की प्रचंडता को देखते हुए एक पूरी उड़ान को पूरी तरह से निरस्त यानी रद करने का अत्यंत कड़ा फैसला लेना पड़ा। इस निरस्तीकरण की वजह से सैकड़ों यात्री बीच रास्ते में ही फंस गए और उनके महत्वपूर्ण व्यावसायिक और व्यक्तिगत कार्यक्रम पूरी तरह से खटाई में पड़ गए।
हवाई अड्डा सूत्रों से प्राप्त विस्तृत प्रशासनिक और तकनीकी जानकारी के अनुसार, दिल्ली के आसमान में दृश्यता का स्तर सुरक्षित लैंडिंग के लिए तय किए गए न्यूनतम मानकों से काफी नीचे चला गया था। ऐसी स्थिति में पायलटों के लिए रनवे को देख पाना और विमान को सुरक्षित रूप से सतह पर उतारना तकनीकी रूप से नामुमकिन और अत्यधिक जोखिम भरा साबित हो रहा था। दिल्ली एटीसी ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए हवा में चक्कर काट रहे विमानों को तत्काल अन्य सुरक्षित हवाई अड्डों पर जाने के निर्देश जारी किए। इस आपातकालीन परिस्थिति के तहत देर रात से लेकर तड़के सुबह तक एक के बाद एक कुल आठ विमानों को लखनऊ के अमौसी हवाई अड्डे पर आपातकालीन और प्राथमिकता के आधार पर लैंड कराया गया, जिसमें कई घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय सेवाएं भी शामिल थीं। दिल्ली के हवाई क्षेत्र में अचानक उत्पन्न हुई इस विकट स्थिति के कारण आसमान में विमानों के ट्रैफिक जाम जैसी गंभीर स्थिति निर्मित हो गई थी। कई विमानों के पास ईंधन का स्तर भी सीमित होने लगा था, जिसे ध्यान में रखते हुए एटीसी ने लखनऊ हवाई अड्डे के रनवे संख्या नौ को पूरी तरह से अलर्ट पर रखा और डायवर्टेड विमानों की सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित कराई।
अचानक और बिना किसी पूर्व सूचना के इतनी बड़ी संख्या में विमानों के लखनऊ एयरपोर्ट पर उतरने के कारण अमौसी हवाई अड्डे के प्रस्थान और आगमन टर्मिनलों पर अस्थायी रूप से यात्रियों की भारी भीड़ एकत्रित हो गई। सैकड़ों यात्रियों को विमान के भीतर और हवाई अड्डे के लाउंज में मौसम सामान्य होने और दिल्ली एटीसी से दोबारा हरी झंडी मिलने का घंटों तक लंबा इंतजार करना पड़ा। इस दौरान हवाई अड्डा प्रशासन और विभिन्न संबंधित एयरलाइंस के ग्राउंड स्टाफ ने मुस्तैदी दिखाते हुए यात्रियों की सुविधाओं के लिए अतिरिक्त पेयजल, अल्पाहार और विश्राम की आवश्यक व्यवस्थाएं कीं। हालांकि, समय की बर्बादी और अनिश्चितता के कारण यात्रियों के चेहरे पर थकान और मानसिक तनाव साफ तौर पर देखा जा सकता था।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच जो सबसे बड़ी मुसीबत बनकर सामने आई, वह थी एक प्रमुख उड़ान का पूरी तरह से निरस्त हो जाना। एयरलाइन प्रबंधन ने परिचालन संबंधी दिक्कतों और मौसम में सुधार न होने की संभावना को देखते हुए इस उड़ान को रद करने की आधिकारिक घोषणा की। इस निर्णय के सार्वजनिक होते ही हवाई अड्डे के काउंटरों पर यात्रियों ने भारी नाराजगी और असंतोष व्यक्त किया। यात्रियों का कहना था कि उन्हें ऐन वक्त पर उड़ान रद होने की सूचना दी गई, जिससे उन्हें वैकल्पिक यात्रा माध्यम चुनने का अवसर भी नहीं मिल सका। एयरलाइंस के प्रतिनिधि यात्रियों को रिफंड देने या अगले उपलब्ध विमान में सीट आरक्षित करने का आश्वासन देकर शांत कराने का प्रयास करते नजर आए।
लखनऊ डायवर्ट किए गए इन आठ विमानों में देश के विभिन्न महानगरों जैसे मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और कोलकाता से दिल्ली जा रहे यात्री सवार थे। तकनीकी विशेषज्ञों के मुताबिक, जब भी दिल्ली जैसे बड़े हवाई अड्डे पर मौसम इस तरह का खतरनाक मोड़ लेता है, तो उत्तर भारत में लखनऊ और जयपुर हवाई अड्डे ही सबसे बड़े और निकटतम वैकल्पिक सहायता केंद्र के रूप में कार्य करते हैं। लखनऊ पहुंचे इन सभी आठों विमानों को रनवे पर सुरक्षित पार्क करने के बाद उनकी तकनीकी जांच की गई और जैसे ही सुबह के समय दिल्ली में मौसम के मिजाज में कुछ सुधार दर्ज किया गया, वैसे ही इन सभी विमानों को उनके मूल गंतव्य दिल्ली के लिए क्रमिक रूप से दोबारा रवाना कर दिया गया।
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