Ex-IAS Divya Mittal: IAS की नौकरी छोड़ने वाली दिव्या मित्तल की राजनीति में एंट्री, नया नारा दिया- 'चलिए हिसाब मांगते हैं'

आईएएस पद से इस्तीफा देने वाली पूर्व डीएम दिव्या मित्तल ने उत्तर प्रदेश से सक्रिय राजनीति में प्रवेश का ऐलान किया है। उन्होंने 'चलिए हिसाब मांगते हैं' नारे के साथ जनता से जुड़ने का आह्वान किया।

By INA News Desk
Sep 29, 2026 - 11:59
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Ex-IAS Divya Mittal: IAS की नौकरी छोड़ने वाली दिव्या मित्तल की राजनीति में एंट्री, नया नारा दिया- 'चलिए हिसाब मांगते हैं'
  • UP Politics: पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल ने राजनीति में उतरने का किया औपचारिक ऐलान, बोलीं- 'यूपी की मिट्टी ही मेरी कर्मभूमि'
  • दिव्या मित्तल का बड़ा राजनीतिक कदम: वीडियो जारी कर किया नई पारी का ऐलान; शिक्षक, डॉक्टर, किसान और युवाओं से जुड़ने की अपील
  • ब्यूरोक्रेसी से पॉलिटिक्स: पूर्व डीएम दिव्या मित्तल ने राजनीति में आने का बताया कारण, जनता से बोलीं- 'मुझ पर नहीं, खुद पर भरोसा करें'

लखनऊ: उत्तर प्रदेश कैडर की चर्चित पूर्व प्रशासनिक अधिकारी दिव्या मित्तल ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) से त्यागपत्र देने के बाद अब सार्वजनिक जीवन में अपनी नई भूमिका का औपचारिक ऐलान कर दिया है। पूर्व आईएएस अधिकारी ने सक्रिय राजनीति में कदम रखने की विधिवत घोषणा की है। उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक विस्तृत वीडियो संदेश जारी करते हुए इस बड़े फैसले की जानकारी सार्वजनिक की। वीडियो में उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था से बाहर निकलकर राजनीति के मैदान में उतरने के पीछे के आंतरिक कारणों, अपनी प्राथमिकताओं और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से प्रकाश डाला है।

दिव्या मित्तल ने स्पष्ट किया कि उनकी राजनीतिक यात्रा का केंद्र बिंदु उत्तर प्रदेश ही रहेगा। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की मिट्टी ही उनकी वास्तविक कर्मभूमि रही है और जनसेवा की इस नई शुरुआत की नींव भी यहीं से रखी जाएगी। अपने वीडियो संदेश में उन्होंने किसी पारंपरिक राजनीतिक दल का गुणगान करने के बजाय सीधे आम नागरिकों के अधिकारों, जवाबदेही और लोकतांत्रिक चेतना को केंद्र में रखा। उन्होंने एक नया प्रेरक नारा दिया है-‘चलिए हिसाब मांगते हैं’।

  • 'मुझ पर नहीं, अपनी ताकत पर भरोसा करिए'

दिव्या मित्तल की इस राजनीतिक घोषणा की सबसे उल्लेखनीय बात उनका गैर-पारंपरिक अंदाज रहा। उन्होंने आमतौर पर नेताओं द्वारा किए जाने वाले व्यक्तिगत वादों से अलग हटकर जनता से आत्म-निर्भर और जागरूक बनने का आह्वान किया।

उन्होंने जनता को संबोधित करते हुए कहा, "आप मुझ पर या किसी व्यक्ति विशेष पर आंख मूंदकर भरोसा मत करिए, बल्कि अपनी सामूहिक शक्ति और अपने आप पर भरोसा करिए। लोकतंत्र तब तक मजबूत नहीं हो सकता जब तक आम नागरिक खुद आगे आकर अपने अधिकारों और संसाधनों का हिसाब नहीं मांगता।" उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीति को व्यक्तिगत लाभ या सत्ता पाने का जरिया बनाने के बजाय नीतिगत बदलाव और जन-सरोकारों का मंच बनाना उनका प्राथमिक उद्देश्य है।

  • शिक्षक, डॉक्टर, किसान और छात्रों से जुड़ने की खुली अपील

पूर्व आईएएस अधिकारी ने समाज के सभी प्रमुख वर्गों को अपने इस जन-अभियान से जुड़ने का न्योता दिया है। उन्होंने विशेष रूप से:

शिक्षक और बुद्धिजीवी वर्ग: जो समाज की वैचारिक दिशा तय करते हैं।

डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी: जो जमीनी स्तर पर जनस्वास्थ्य की चुनौतियों को प्रत्यक्ष देखते हैं।

किसान और मजदूर: जो प्रदेश की अर्थव्यवस्था और श्रम शक्ति की रीढ़ हैं।

अधिवक्ता और कानूनविद: जो संविधान और न्याय व्यवस्था की रक्षा के लिए लड़ते हैं।

युवा एवं छात्र समुदाय: जो अपने भविष्य, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पारदर्शी रोजगार अवसरों की तलाश में हैं।

दिव्या मित्तल ने इन सभी वर्गों से संवाद स्थापित करते हुए कहा कि एक बेहतर और पारदर्शी व्यवस्था का निर्माण केवल फाइलों के भीतर बैठकर नहीं किया जा सकता, बल्कि इसके लिए जनता के बीच रहकर जमीनी संघर्ष का हिस्सा बनना आवश्यक है।

  • प्रशासनिक सफर से जन-आंदोलन की ओर

गौरतलब है कि दिव्या मित्तल उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों में जिलाधिकारी (DM) और मुख्य विकास अधिकारी (CDO) जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। मिर्जापुर और संत कबीर नगर सहित कई जिलों में तैनाती के दौरान उनके द्वारा किए गए नवाचारों, त्वरित जनसुनवाई और विकास कार्यों को काफी सराहना मिली थी।

प्रशासनिक सेवा में रहते हुए वे सोशल मीडिया पर भी युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय रहीं, जहां वे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और जीवन में सकारात्मक सोच को लेकर प्रेरक विचार साझा करती थीं। अचानक आईएएस पद से उनके इस्तीफे की खबर ने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में सबको चौंका दिया था। अब राजनीति में उनके सीधे प्रवेश के ऐलान ने प्रदेश के सियासी समीकरणों में नई चर्चा छेड़ दी है।

  • क्या होगा अगला राजनीतिक कदम?

दिव्या मित्तल ने अपने जारी वीडियो में फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया है कि वे किसी स्थापित राष्ट्रीय अथवा क्षेत्रीय राजनीतिक दल (जैसे भाजपा, सपा या कांग्रेस) की सदस्यता ग्रहण करेंगी या फिर अपने समर्थकों के साथ मिलकर एक स्वतंत्र राजनीतिक/सामाजिक मंच का गठन करेंगी।

हालांकि, उनके नारे 'चलिए हिसाब मांगते हैं' और विभिन्न पेशेवर वर्गों से जुड़ने के सीधे आह्वान से यह संकेत मिल रहा है कि वे शुरुआती चरण में एक व्यापक जन-संवाद और जागरूकता यात्रा शुरू कर सकती हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में एक पूर्व महिला नौकरशाह का जनता के बीच सीधे उतरकर जवाबदेही की राजनीति की बात करना आगामी दिनों में युवाओं और प्रबुद्ध वर्ग को काफी आकर्षित कर सकता है।

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