IAS Jayesh Ranjan VRS - रिटायरमेंट से पहले स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का फैसला, क्या राजनीति में उतरेंगे जयेश रंजन?
तेलंगाना के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी व विशेष मुख्य सचिव जयेश रंजन ने सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) का फैसला लिया है। जानिए क्या हैं इसके प्रशासनिक मायने।
तेलंगाना के प्रशासनिक गलियारों में उस समय बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला जब राज्य के वरिष्ठ नौकरशाह और विशेष मुख्य सचिव जयेश रंजन ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेने का फैसला किया। 1992 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी जयेश रंजन के सामान्य सेवाकाल में अभी लगभग 11 महीने का समय शेष था। उनके इस अचानक लिए गए फैसले ने राज्य की नौकरशाही और शासन व्यवस्था में नई बहस छेड़ दी है।
जयेश रंजन को तेलंगाना के सबसे अनुभवी और प्रभावशाली अधिकारियों में गिना जाता है। राज्य में आईटी (सूचना प्रौद्योगिकी), उद्योग और निवेश को आकर्षित करने में उनकी भूमिका लंबे समय तक केंद्रीय रही है। वर्तमान में वे नगर प्रशासन और शहरी विकास (MA&UD) जैसे महत्वपूर्ण विभागों का दायित्व संभाल रहे थे।
तेलंगाना में औद्योगिक निवेश के प्रमुख सूत्रधार रहे हैं जयेश रंजन
तेलंगाना राज्य के गठन के बाद से ही वैश्विक मंचों विशेष रूप से वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (दावोस) और अंतरराष्ट्रीय निवेशक सम्मेलनों में तेलंगाना का प्रतिनिधित्व करने में जयेश रंजन आगे रहे हैं। आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर फार्मास्युटिकल और एयरोस्पेस सेक्टर में वैश्विक कंपनियों को हैदराबाद लाने में उनके नीतिगत योगदान को हमेशा सराहा गया है।
प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि जयेश रंजन ने कई वर्षों तक उद्योग और आईटी विभाग का नेतृत्व करते हुए राज्य की व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) रैंकिंग को शीर्ष स्तर पर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी। ऐसे में उनके वीआरएस लेने के निर्णय को प्रशासनिक तंत्र के लिए एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
राजनीतिक प्रवेश की अटकलें और प्रशासनिक बदलाव
जयेश रंजन द्वारा समय पूर्व सेवा छोड़ने की घोषणा के बाद से ही कई प्रकार की राजनीतिक और व्यावसायिक अटकलें तेज हो गई हैं। प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी चल रही है कि उत्तर प्रदेश कैडर की पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल की तरह क्या जयेश रंजन भी आगे चलकर सक्रिय राजनीति या सार्वजनिक जीवन में कोई नई भूमिका चुन सकते हैं। हालांकि, स्वयं रंजन की ओर से अपने भविष्य की योजनाओं को लेकर अभी कोई आधिकारिक या अंतिम बयान सामने नहीं आया है।
इधर, इस फैसले के तुरंत बाद राज्य सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर दायित्वों का पुनर्गठन शुरू कर दिया है। वीआरएस की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने तक उनके विभागों का प्रभार अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपने की प्रक्रिया जारी है। केंद्र और राज्य के सेवा नियमों के तहत स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के आवेदन पर सक्षम प्राधिकारी द्वारा अंतिम स्वीकृति प्रदान की जाती है।
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