सहारनपुर में फर्जी रॉयल्टी और ISTP का बड़ा खेल: हरियाणा के बालू पर गिट्टी के पास जारी, राजस्व को करोड़ों की चपत
सहारनपुर और मुरादाबाद में फर्जी खनन रॉयल्टी और अवैध ISTP जारी कर राजस्व को चूना लगाने का खेल सामने आया है। जांच एजेंसियों के रडार पर खनन सिंडिकेट।
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर और मुरादाबाद समेत कई जनपदों में खनन उपखनिजों की आड़ में फर्जी रॉयल्टी और अवैध ट्रांजिट पास जारी कर सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाने का मामला सामने आया है। मिली जानकारी के अनुसार, हरियाणा क्षेत्र में यमुना नदी से निकाले जा रहे बालू के कागजों का दुरुपयोग कर ब्लास्ट गिट्टी और भारी पत्थरों के इंटर-स्टेट ट्रांजिट पास यानी आईएसटीपी जारी किए जा रहे हैं। जनता ट्रांसपोर्ट नाम की माइनिंग पहचान संख्या के जरिए यह हेरफेर कर विभागीय कर्मियों और निर्माण ठेकेदारों को कागजों की अवैध बिक्री की जा रही है।
राज्य सरकार के तय नियमों के अनुसार, प्रति घन मीटर उपखनिज पर 150 रुपये का शुल्क पारगमन पास के रूप में लिया जाता है। सामान्यतः एक बड़े वाहन में 25 घन मीटर सामग्री के परिवहन पर 3,750 रुपये का सरकारी शुल्क बनता है। इसके विपरीत, इस खेल में शामिल लोग मात्र 1,500 रुपये लेकर फर्जी आईएसटीपी उपलब्ध करा रहे हैं। इससे सरकार को मिलने वाले राजस्व की भारी चोरी हो रही है।
मुरादाबाद क्षेत्र में भी सुरक्षा कागजों पर फर्जी रॉयल्टी पर्चियां तैयार करने की जानकारी सामने आ रही है। उत्तराखंड के रामनगर और नजदीकी स्टोन क्रेशरों से माल की ढुलाई कराई जा रही है, जबकि कागजों पर जनता मिनरल और सतवीर मुरादाबाद माइंस के नाम से फर्जी पर्चियां काटी जा रही हैं। नियमों के तहत पड़ोसी राज्य से आने वाली सामग्री पर उत्तर प्रदेश का वैध पारगमन पास बनना जरूरी है, लेकिन उसकी जगह 2,500 रुपये में जाली कागजात थमाकर वाहनों को निकाला जा रहा है। जांच नाकों पर तैनात कर्मियों की मिलीभगत से वाहनों को अवैध रूप से सीमा पार कराने की बात भी सामने आ रही है।
कागजों के इस हेरफेर में उपयोग किए जा रहे प्रपत्रों को बाद में नाममात्र की रकम में दोबारा खरीदकर सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली जैसे जनपदों में ठेकेदारों को खपाया जा रहा है। मुरादाबाद से सहारनपुर के बीच निर्माण सामग्री की कोई वास्तविक आवाजाही न होने के बावजूद इन प्रपत्रों को बिना ठोस पड़ताल के विभागीय व्यवस्था में दर्ज किया जा रहा है। विशेष कार्यबल पहले भी फर्जी रॉयल्टी सिंडिकेट से जुड़े कई सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है और इस पूरे मामले से जुड़े तार एक बार फिर जांच एजेंसियों के निशाने पर हैं।
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