यूपी में मिठाई-नमकीन दुकानों के लिए कड़े नियम- खुली मिठाई पर लिखनी होगी अंतिम तिथि, मिलावट करने वालों पर नकेल

उत्तर प्रदेश में मिठाई और नमकीन की गुणवत्ता को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग ने कड़े नियम जारी किए हैं। खुली मिठाइयों पर अंतिम तिथि लिखना अनिवार्य कर दिया गया है।

By INA News Desk
Oct 28, 2026 - 12:54
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यूपी में मिठाई-नमकीन दुकानों के लिए कड़े नियम- खुली मिठाई पर लिखनी होगी अंतिम तिथि, मिलावट करने वालों पर नकेल
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उत्तर प्रदेश में मिठाई और नमकीन के निर्माण, भंडारण और बिक्री को लेकर कड़े दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। राज्य के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विनिर्माण इकाइयों और दुकानों के निरीक्षण को लेकर विस्तृत व्यवस्था तैयार की है। नई व्यवस्था के तहत प्रतिष्ठानों में साफ-सफाई, कच्चे माल की शुद्धता, खाद्य रंगों के सीमित प्रयोग, तलने वाले तेल की स्थिति, उचित तापमान नियंत्रण और वैध अनुज्ञा पत्र से जुड़े नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाएगा।

प्रशासनिक निर्देशों के अनुसार, बाजार में काउंटर पर खुली रखी जाने वाली मिठाइयों के सामने उनकी उपयोग की अंतिम तिथि यानी 'यूज बाय डेट' साफ-साफ प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। इससे ग्राहकों को यह आसानी से पता चल सकेगा कि संबंधित खाद्य पदार्थ कब तक खाने योग्य है। इसके अलावा पैकेटबंद उत्पादों पर सामग्री की पूरी सूची, पोषण संबंधी ब्योरा, निर्माण एवं समाप्ति समय और नियामक अनुज्ञा पत्र संख्या जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां स्पष्ट रूप से दर्ज होनी चाहिए।

मिठाइयों को आकर्षक रूप देने के लिए गैर-खाद्य रंगों जैसे रोडामाइन-बी और मेटानिल येलो के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। केवल तय श्रेणियों में अनुमन्य रंगों को ही निर्धारित सीमा के भीतर प्रयोग में लाया जा सकेगा। मावा, छेना, दूध और पनीर से बनने वाले उत्पादों में बासीपन छिपाने के लिए कृत्रिम खुशबू के इस्तेमाल पर कड़ी नजर रखी जाएगी। इसके साथ ही इन उत्पादों को निर्धारित तापमान पर सुरक्षित रखना आवश्यक होगा। काजू कतली और अन्य मेवों वाली मिठाइयों में केवल ताजे मेवे और शुद्ध चांदी के वर्क का ही उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।

तलने के काम में आने वाले खाद्य तेल की जांच के लिए भी विशेष मानक तय किए गए हैं। तेल में कुल ध्रुवीय यौगिक यानी टीपीसी की मात्रा 25 प्रतिशत से अधिक पाए जाने पर उसे दोबारा उपयोग में नहीं लाया जा सकेगा। ऐसे जले हुए तेल का निस्तारण नियामक व्यवस्था के तहत अधिकृत संस्थाओं के जरिए ही करना होगा। नमकीन उत्पादों में खराब तेल, घटिया मसालों के प्रयोग अथवा मियाद पूरी कर चुके माल को नई पैकेजिंग में भरकर दोबारा बेचने पर पूर्ण रोक रहेगी।

सभी खाद्य कारोबारियों को अपनी दुकानों और कारखानों में स्वच्छ पेयजल, मक्खी-कीट नियंत्रण और कचरा निस्तारण का पुख्ता प्रबंध करना होगा। इसके अलावा बेसन, मैदा, चीनी, खोया और तेल जैसे कच्चे माल की खरीद रसीदें, आपूर्तिकर्ताओं का विवरण और गुणवत्ता संबंधी दस्तावेज सुरक्षित रखना जरूरी रहेगा। नियमों की अनदेखी करने अथवा मिलावटी उत्पाद बेचने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ सीधे दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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