यूपी में मिठाई और स्नैक्स में हानिकारक रंगों की मिलावट पर सख्त पाबंदी, खाद्य कारोबारियों के लिए कड़े नियम लागू

उत्तर प्रदेश में मिठाइयों, चटनी और स्नैक्स में गैर-खाद्य रंगों के उपयोग पर रोक। रोडामाइन-बी प्रतिबंधित, डिजिटल तराजू से मापन और बिल रखना अनिवार्य।

By INA News Desk
Oct 18, 2026 - 23:35
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यूपी में मिठाई और स्नैक्स में हानिकारक रंगों की मिलावट पर सख्त पाबंदी, खाद्य कारोबारियों के लिए कड़े नियम लागू
प्रतीकात्मक चित्र
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खानपान की वस्तुओं को चमकदार और आकर्षक बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले हानिकारक केमिकल रंगों के विरुद्ध खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है। प्रशासन की ओर से मिठाई, नमकीन, बेकरी उत्पाद, फास्ट फूड और चटनी बनाने वाले प्रतिष्ठानों के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। विभाग की आयुक्त रोशन जैकब ने स्पष्ट किया है कि केवल उन्हीं स्वीकृत रंगों का प्रयोग किया जा सकेगा, जिन्हें संबंधित खाद्य वर्ग में स्पष्ट अनुमति दी गई है। इसके साथ ही रंगों की मात्रा भी कानूनन तय सीमाओं के दायरे में रखनी होगी। नियमों की अनदेखी करने वालों के विरुद्ध खाद्य सुरक्षा कानून के तहत सख्त दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे।

विभाग ने हलवाइयों, होटल व ढाबा मालिकों, बेकरी संचालकों और ठेले-खोमचे पर खाद्य सामग्री बेचने वालों को नियमों का कड़ाई से पालन करने को कहा है। व्यापारिक संगठनों, क्षेत्रीय बैठकों और सचल प्रयोगशालाओं के माध्यम से इन नियमों की जानकारी धरातल तक पहुंचाई जा रही है। समोसा, चाट, रोल और मोमोज के साथ परोसी जाने वाली हरी व लाल चटनी में केमिकल रंगों की जगह टमाटर, चुकंदर, धनिया और पुदीने जैसे प्राकृतिक विकल्पों को शामिल करने की सलाह दी गई है। बच्चों में लोकप्रिय कॉटन कैंडी और बर्फ के गोले में कपड़ा रंगने वाले घातक रोडामाइन-बी के उपयोग पर पूरी तरह रोक लगाई गई है। वहीं तंदूरी व्यंजनों, कबाब, चाप और मांसाहारी भोजन को लाल रंग देने के लिए औद्योगिक रंगों के स्थान पर कश्मीरी लाल मिर्च या देगी मिर्च के प्रयोग की अनुमति दी गई है।

खाद्य सामग्री तैयार करते समय सीधे डिब्बे, पुड़िया या चम्मच से रंग डालने की आदत पर रोक लगा दी गई है। कारोबारियों को अब स्वीकृत रंगों की सही मात्रा का मापन करने के लिए डिजिटल तराजू का प्रबंध करना होगा। यदि किसी प्रतिष्ठान के पास सटीक मापन यंत्र उपलब्ध नहीं है, तो उसे किसी भी प्रकार के रंग का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी। मिठाई और कन्फेक्शनरी उत्पादों जैसे जलेबी और लड्डू में अनुमन्य कृत्रिम रंग की सामान्य सीमा अधिकतम सौ मिलीग्राम प्रति किलोग्राम निर्धारित की गई है। वहीं ब्रेड, ताजे दूध, सादे दही, पनीर, ताजे फल, सब्जियों, आटे, दाल, शुद्ध मसालों, शहद, गुड़ और शिशु आहार में किसी भी प्रकार का रंग मिलाना पूर्णतः वर्जित है।

कपड़ा उद्योग में इस्तेमाल होने वाले रोडामाइन-बी, मेटानिल येलो, मैलाकाइट ग्रीन और सूडान डाई जैसे केमिकल मानव शरीर, विशेषकर लिवर और किडनी के लिए बेहद घातक साबित हो सकते हैं। इन खतरों से नागरिकों को बचाने के लिए अब व्यापारियों को केवल पंजीकृत विक्रेताओं से ही वैध लेबल वाले फूड कलर खरीदने के निर्देश दिए गए हैं। बिना लेबल या खुली पुड़िया में बिकने वाले रंगों की बिक्री और खरीद दोनों पर पाबंदी रहेगी। प्रतिष्ठान संचालकों को अपनी खरीद रसीद, इनवॉइस और बैच नंबर का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा, ताकि औचक निरीक्षण के समय जांच टीम के समक्ष सत्यापन प्रस्तुत किया जा सके।

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