CM योगी के करीबी और विश्वसनीय IAS अफसर शशि प्रकाश गोयल बने UP के नए मुख्य सचिव, निडर कार्यशैली से बढ़ाएंगे विकास की गति

मुख्य सचिव के रूप में गोयल का जोर सरकार की जीरो टॉलरेंस, जीरो करप्शन, औद्योगिक विकास और आर्थिक विकास की नीतियों को लागू करने पर होगा। उन्होंने कहा कि प्रधा

Aug 1, 2025 - 00:33
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CM योगी के करीबी और विश्वसनीय IAS अफसर शशि प्रकाश गोयल बने UP के नए मुख्य सचिव, निडर कार्यशैली से बढ़ाएंगे विकास की गति
CM योगी के करीबी और विश्वसनीय IAS अफसर शशि प्रकाश गोयल बने UP के नए मुख्य सचिव

हाइलाइट्स

  • शशि प्रकाश गोयल ने UP के मुख्य सचिव के रूप में कार्यभार संभाला।

  • 1989 बैच के IAS अधिकारी, योगी आदित्यनाथ के करीबी और विश्वसनीय अफसर माने जाते हैं।

  • जीरो टॉलरेंस और जीरो करप्शन की नीति को लागू करने पर जोर।

  • UP को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य।

  • जनवरी 2027 तक मुख्य सचिव के रूप में कार्यकाल, अगले विधानसभा चुनाव तक रहेगी अहम जिम्मेदारी।

लखनऊ में UP सरकार ने 1989 बैच के वरिष्ठ IAS अधिकारी शशि प्रकाश गोयल को राज्य का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया है। गोयल ने लोक भवन स्थित अपने कार्यालय में कार्यभार संभाल लिया है। इससे पहले मुख्य सचिव रहे मनोज कुमार सिंह के सेवानिवृत्त होने के बाद उनकी नियुक्ति की गई। राज्य सरकार ने मनोज कुमार सिंह के लिए एक साल के सेवा विस्तार का अनुरोध केंद्र सरकार से किया था, लेकिन केंद्र से अनुमोदन न मिलने के कारण गोयल की नियुक्ति की घोषणा की गई। इस घोषणा के साथ ही कई दिनों से चल रही अटकलों पर विराम लग गया।

शशि प्रकाश गोयल पिछले साढ़े आठ साल से मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव के रूप में कार्यरत थे और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सबसे विश्वसनीय अधिकारियों में से एक माने जाते हैं। उनकी निडर और बेबाक कार्यशैली के लिए UP और भारत सरकार में स्वच्छ छवि रही है। गोयल ने अपने करियर की शुरुआत इटावा में सहायक मजिस्ट्रेट के रूप में की थी। इसके बाद उन्होंने अलीगढ़, बहराइच और मेरठ में मुख्य विकास अधिकारी तथा मथुरा, इटावा, प्रयागराज और देवरिया में जिलाधिकारी के रूप में जिम्मेदारी निभाई।उन्होंने बसपा सरकार में कैबिनेट सचिव शशांक शेखर के स्टाफ अधिकारी के रूप में काम किया और सपा सरकार में योजना विभाग के सचिव और कार्यक्रम कार्यान्वयन विभाग के प्रमुख सचिव रहे। केंद्र में प्रतिनियुक्ति के दौरान वह मानव संसाधन और उच्च शिक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत रहे। 2017 में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनने के बाद गोयल को मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव और अपर मुख्य सचिव के रूप में नियुक्त किया गया। उनके पास नागरिक उड्डयन, राज्य संपत्ति और प्रोटोकॉल विभागों का भी कार्यभार था, जो अब संजय प्रसाद को सौंपा गया है।

गोयल की कार्यशैली की खासियत उनकी निडरता और पारदर्शिता है। उनके साथ काम कर चुके अधिकारी बताते हैं कि वह दबाव में काम नहीं करते और सही-गलत का स्पष्ट रुख अपनाते हैं। उदाहरण के लिए, हाल ही में जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह द्वारा भेजी गई साढ़े सात सौ सहायक अभियंताओं के तबादले की फाइल को गोयल ने तार्किक आधारों पर कई बार लौटाया। इसी तरह, सैमसंग इंडिया को अतिरिक्त सब्सिडी देने वाली फाइल पर भी उन्होंने आपत्ति जताई। ऐसी घटनाएं उनकी निष्पक्षता और साहस को दर्शाती हैं।मुख्य सचिव के रूप में गोयल का जोर सरकार की जीरो टॉलरेंस, जीरो करप्शन, औद्योगिक विकास और आर्थिक विकास की नीतियों को लागू करने पर होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप UP को विकास के पथ पर ले जाने और इसे एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। विकास कार्यों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

गोयल का कार्यकाल जनवरी 2027 तक रहेगा, जिसके कारण उनके पास लगभग 18 महीने का समय होगा। इस दौरान 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सरकार की योजनाओं को लागू करने और जनता तक पहुंचाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। उनकी नियुक्ति को नौकरशाही में स्थिरता और नीतिगत निरंतरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

हालांकि, कुछ सत्तापक्ष के विधायक और मंत्री नौकरशाही के हावी होने की शिकायत करते हैं। उनका मानना है कि जिलों में जिलाधिकारी और पुलिस कप्तान जनप्रतिनिधियों की बात नहीं सुनते। कुछ का यह भी कहना है कि गोयल ने कई बार अधिकारियों का ठोस सबूतों के अभाव में बचाव किया है। इससे जनप्रतिनिधियों और भाजपा कार्यकर्ताओं में नाराजगी की आशंका जताई जा रही है, जो आगामी चुनावों पर असर डाल सकती है। फिर भी, गोयल की विश्वसनीयता और मुख्यमंत्री के प्रति उनकी निष्ठा ने उन्हें नौकरशाही में मजबूत स्थिति दिलाई है।

कार्यभार ग्रहण करने के मौके पर संजय प्रसाद (प्रमुख सचिव गृह और सूचना), एम. देवराज (प्रमुख सचिव नियुक्ति और कार्मिक), मुकेश कुमार मेश्राम (प्रमुख सचिव पर्यटन), आलोक कुमार (प्रमुख सचिव नियोजन) और लखनऊ के जिलाधिकारी विशाख जी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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