गोरक्षपीठ में वैदिक मंत्रोच्चार और कलश स्थापना के साथ शारदीय नवरात्र का शुभारंभ
गोरखनाथ मंदिर में शारदीय नवरात्र के पहले दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कलश स्थापना कर मां शैलपुत्री की पूजा की। जानिए अनुष्ठान की पूरी जानकारी।
लोक कल्याण की मंगलकामना के साथ शिवावतार गुरु गोरखनाथ की साधनास्थली गोरक्षपीठ में शारदीय नवरात्र के पावन पर्व का भव्य और वैदिक शुभारंभ हुआ। मंदिर के शक्तिपीठ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ के सानिध्य में मां जगतजननी की उपासना के विशेष अनुष्ठान की शुरुआत पूरी पारंपरिक और धार्मिक विधि-विधान के साथ की गई। प्रथम दिवस पर भक्तों ने मां आदिशक्ति के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की आराधना कर सुख-समृद्धि की कामना की।
भव्य कलश शोभायात्रा और वैदिक मंत्रोच्चार
नवरात्र के प्रथम दिन प्रतिपदा के अवसर पर गोरखनाथ मंदिर परिसर में एक भव्य कलश शोभायात्रा निकाली गई। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनों, शंखनाद, घंट-घड़ियाल और माता के जयकारों के बीच साधु-संतों की यह यात्रा पौराणिक मान्यता वाले भीम सरोवर तक पहुँची। सरोवर पर कलश भरने और परिक्रमा करने के बाद शोभायात्रा पुनः शक्तिपीठ लौटी।
इसके पश्चात जल से भरा पवित्र कलश गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने स्वयं उठाया और शक्तिपीठ के गर्भगृह में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच वरुण देवता का आह्वान करते हुए उसकी स्थापना की। गोरक्षपीठाधीश्वर ने सबसे पहले मां दुर्गा, भगवान शिव और गुरु गोरखनाथ के शस्त्र त्रिशूल को प्रतिष्ठित कर गौरी-गणेश की विधिवत आराधना की।
देवीभागवत और दुर्गासप्तशती के पाठ का श्रीगणेश
कलश स्थापना के साथ ही शक्तिपीठ के गर्भगृह में पवित्र देवीभागवत के पारायण पाठ और श्रीदुर्गासप्तशती के पाठ का भी आरंभ हो गया। धार्मिक अनुष्ठान के इन पाठों से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो गया है। अनुष्ठान के प्रथम चरण की पूर्णता पर आरती का आयोजन किया गया और उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। इस अवसर पर मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ समेत बड़ी संख्या में साधु-संत और श्रद्धालु मौजूद रहे।
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