सनातन भारत का मूल धर्म, गोसेवा से ही संभव है मानव कल्याण: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सनातन भारत की मूल आत्मा है, गोमाता के संरक्षण और प्राकृतिक खेती से गंभीर बीमारियों से मुक्ति संभव है।

By INA News Desk
Sep 29, 2026 - 23:58
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सनातन भारत का मूल धर्म, गोसेवा से ही संभव है मानव कल्याण: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने सनातन परंपरा को देश की आत्मा बताते हुए कहा कि इसके बिना भारत के अस्तित्व की कल्पना भी नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि भारत के पास सदैव एक समृद्ध, सुसंस्कृत और सुदृढ़ जीवन दर्शन रहा है, किंतु अपनी गौरवशाली विरासत और परंपराओं को विस्मृत कर देने के कारण समाज को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। गोरखनाथ मंदिर परिसर स्थित दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं तथा राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञानयज्ञ के समापन सत्र में उन्होंने यह विचार व्यक्त किए।

व्यासपीठ को नमन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग उत्तर प्रदेश की पावन धर्मनगरियों के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मर्म को नहीं समझ सकते, वे वास्तव में भारत के मूल स्वरूप को कभी नहीं जान पाएंगे। उन्होंने कहा कि अयोध्या की मर्यादा, काशी की चेतना, मथुरा-वृंदावन का भक्ति भाव और प्रयागराज की समरसता ही भारत की वास्तविक पहचान को गढ़ते हैं।

सनातन संस्कृति में गोमाता की महिमा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हमारी परंपरा में पहला ग्रास गाय और अंतिम ग्रास श्वान को अर्पित करने का नियम रहा है। यदि समाज इस ऋषि परंपरा का निरंतर पालन करता, तो गोवंश और अन्य जीव सड़कों पर असहाय स्थिति में न दिखते। उन्होंने स्पष्ट किया कि धरती माता की रक्षा के लिए गोमाता का संरक्षण अनिवार्य शर्त है। राज्य सरकार वर्तमान में 7,000 से अधिक गोआश्रय स्थलों के माध्यम से 16 लाख से अधिक गोवंश की देखभाल कर रही है। इसके साथ ही निराश्रित गोवंश को पालने वाले किसानों को प्रति गोवंश प्रतिमाह 1,500 रुपये की आर्थिक मदद दी जा रही है तथा कुपोषित परिवारों को दुधारू गाय और पोषण भत्ता उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने नागरिकों से गोपाष्टमी जैसे पर्वों पर गोसेवा का संकल्प लेने और गोवंश को अपनाने का आह्वान किया।

गंभीर बीमारियों पर चिंता प्रकट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि रासायनिक खादों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग ने पूरे खान-पान को दूषित कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप कैंसर, मधुमेह, यकृत और गुर्दे की गंभीर बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इस संकट का स्थायी समाधान केवल चिकित्सालयों में नहीं, बल्कि भारतीय देशी गोवंश पर आधारित प्राकृतिक खेती को अपनाने में है। उन्होंने बताया कि जनसामान्य को स्वास्थ्य सुरक्षा देने के लिए आयुष्मान योजना के साथ-साथ गरीबों के असाध्य रोगों के उपचार हेतु मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से अब तक 1,400 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता प्रदान की गई है।

कथा व्यास मलूकपीठाधीश्वर स्वामी राजेंद्रदास देवाचार्य की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि प्राकृतिक चुनौतियों और प्रतिकूल मौसम के बीच भी बिना किसी अवरोध के यह कथा अनवरत चलती रही, जो भारतीय आस्था की अटूट शक्ति को दर्शाती है। सत्र के समापन पर श्रीमद्भागवत ग्रंथ एवं व्यासपीठ की आरती उतारी गई। इस धार्मिक आयोजन में प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, मस्तनाथ पीठ के महंत एवं विधायक बालकनाथ, डॉ. रामकमल दास वेदांती, स्वामी रामदिनेशाचार्य, मंदिर के मुख्य पुजारी योगी कमलनाथ और महंत रवींद्रदास सहित बड़ी संख्या में संत एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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