अशोक सिंघल की जन्मशताब्दी पर केशव प्रसाद मौर्य ने किया नमन, विचारों को किया याद

लखनऊ में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अशोक सिंघल की जन्मशताब्दी पर उनके चित्र पर माल्यार्पण कर नमन किया और उनके योगदान को याद किया।

By INA News Desk
Sep 27, 2026 - 21:09
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अशोक सिंघल की जन्मशताब्दी पर केशव प्रसाद मौर्य ने किया नमन, विचारों को किया याद

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख अगुआ और विश्व हिन्दू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल की जन्मशताब्दी पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। राजधानी के सात कालिदास मार्ग स्थित अपने सरकारी आवास पर उन्होंने अशोक सिंघल के चित्र पर पुष्पमाला चढ़ाई और उनके चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस दौरान उन्होंने देश, धर्म और सनातन संस्कृति के उत्थान में उनके आजीवन योगदान को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया।

उप मुख्यमंत्री ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि ऐसे विराट और तपस्वी व्यक्तित्व युगों में कभी-कभार ही सामने आते हैं। अशोक सिंघल ने अपने जीवन का प्रत्येक क्षण समाज, सनातन आस्था और राष्ट्रहित के लिए न्योछावर कर दिया। उनका संपूर्ण जीवन त्याग, दृढ़ संकल्प और निस्वार्थ साधना का अप्रतिम उदाहरण है। उन्होंने अपने विचारों, स्पष्ट नीति और संगठनात्मक कौशल से समूचे समाज के भीतर सांस्कृतिक स्वाभिमान और राष्ट्रीय चेतना को नई दिशा दी।

उन्होंने कहा कि अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि से जुड़े व्यापक जनआंदोलन को जन-जन की आस्था और सामाजिक समरसता से जोड़ने में अशोक सिंघल की ऐतिहासिक भूमिका को कभी विस्मृत नहीं किया जा सकता। उन्होंने इस आंदोलन को केवल एक अभियान न बनाकर सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का रूप दिया। भगवान श्रीराम के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा और सनातन जीवन मूल्यों की रक्षा के लिए उनका समर्पण भावी पीढ़ियों के लिए सदैव मार्गदर्शक बना रहेगा।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि अशोक सिंघल का कार्यक्षेत्र किसी एक संस्था या दायरे तक सीमित नहीं था, बल्कि वे भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं और राष्ट्र की अखंडता के लिए निरंतर प्रयत्नशील रहने वाले युगदृष्टा थे। राष्ट्रहित में किया गया सच्चा समर्पण कभी निष्फल नहीं होता, बल्कि आने वाले युगों के लिए प्रेरणा का अटूट संबल बन जाता है। उनकी जन्मशताब्दी उनके दिखाए मार्ग, आदर्शों और राष्ट्र सेवा के संकल्प को अपने आचरण में उतारने का अवसर है। उनके बताए सिद्धांतों पर चलकर समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

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