Special Article: उत्तर प्रदेश की राजनीति में सनातनी बनने की होड़ 

भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए व्यापक अभियान चला रहे युवा कथावाचक संत आचार्य धीरेंद्र शास्त्ऱी द्वारा अपनी विशिष्ट कथा

By INA News Desk
Nov 5, 2026 - 12:29
16 Views
Special Article: उत्तर प्रदेश की राजनीति में सनातनी बनने की होड़ 
Advertisement
Advertisement

लेखक- मृत्युंजय दीक्षित

भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए व्यापक अभियान चला रहे युवा कथावाचक संत आचार्य धीरेंद्र शास्त्ऱी द्वारा अपनी विशिष्ट कथा वाचन शैली में श्री कृष्ण को लेकर कही गई एक बात का बतंगड़ बनाकर प्रदेश में सियासी भूचाल लाने का प्रयास किया जा रहा है। नेताओं  के मध्य अपने आपको सच्चा सनातनी बताने की होड़ मच गई है और तमाम कालनेमि सक्रिय हो गए हैं। सपा मुखिया अखिलेश यादव जो हमेशा सनातन संस्कृति व संत समाज को बदनाम करने के लिए तत्पर रहते हैं और ऐसे अवसरों की ताक में रहते हैं जिससे हिन्दू एकता को कुंद किया जा सके उन्होंने इस अवसर को लपक लिया है और हिन्दू एकता में लगे धीरेन्द्र शास्त्री के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है। सपा मुखिया जो उत्तर प्रदेश में मुस्लिम तुष्टिकरण के सबसे बड़े झंडाबरदार हैं और मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति की बात पर जिनके मुंह पर ताला लग जाता है वो उन धीरेन्द्र शास्त्री पर टिप्पणी कर रहे हैं जो पूरे भारत में हिंदुत्व की अलख जगा रहे हैं। 
कथावाचक धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री व सपा मुखिया अखिलेश यादव सहित पूरी सेक्युलर बिरादरी की राजनैतिक तनातनी कोई नई बात नहीं है क्योंकि कथावाचक धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्ऱी अपने कार्यक्रमों में भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की बात करते है तथा उसके लिए हिंदू समाज को जागृत करने के लिए पदयात्राएं भी निकालते हैं। वह हमेशा ही छद्म धर्मनिरपेक्ष लोगों  के निशाने पर रहते हैं। पिछले दिनों एक कत्था में अपनी रोचक शैली में बोलते हुए भगवान श्रीकृष्ण को टेढ़ा कह दिया और स्वयं को श्री कृष्ण का वंशज कहने वाले सपाईयों ने उनपर राजनैतिक हमला कर दिया बिना इस बात को समझे कि श्री कृष्ण को तो प्यार से बांका या टेढ़ा ही कहते हैं , बांके बिहारी नाम ही है उनका लेकिन सपाई हैं  कि शास्त्री जी पर  एफआईआर करा रहे हैं, उन पर बुलडोजर एक्शन और उनके कथा कार्यक्रमों  को रद्द करने की मांग कर रहे हैं । सपा को जानने वालों से ये बात छुपी नहीं है कि ये कृष्ण प्रेम नहीं हिन्दू एकता से सपा का डर है। 
सपा मुखिया अपने आपको सनातनी सिद्ध करने के लिए कथवाचक धीरेंद कृष्ण शास्त्री के विरुद्ध अत्यंत मुखर हैं किंतु जब सपा के नेताओं का बाबरी प्रेम जागता है और सपा के पूर्व सांसद एस.टी. हसन कहते हैं कि राम अयोध्या में ही वहीं पैदा हुए थे जहां राम मंदिर बना है इसका कोई सटीक प्रमाण ही नही है तो उनका मुंह बंद रहता है। सपा के एक और नेता शिवशंकर यादव  हसन से भी आगे निकल जाते हैं और कहते हैं कि शादियों  और तेरहवीं की रस्म के समय पंडित जो मंत्र पढ़ते हैं  वो गाली जैसे हैं। लोग पंडितों से गालियां सुनते हैं, फिर पैर छूकर दक्षिणा देते है। ये सब बंद होना चाहिए तब भी सपा मुखिया कान बंद कर लेते हैं। जब उनकी पार्टी में रहते हुए स्वामी प्रसाद मौर्य रामचातिमानस फाड़ते हैं तब भी वह मौन रहते हैं। जब कोई मौलाना हिंदू देवी - देवताओं का अपमान करता है तब भी सपा मुखिया मौन रह जाते हैं, निंदा तक नहीं करते हैं कि कहीं उनका मुस्लिम वोटबैक नाराज़ न हो जाए। ऐसे सपा मुखिया एक कथावाचक को घेरने के लिए उनके पुराने वीडियो एडिट कराकर उन्हें घेरने का रणनीतिक प्रयास कर रहे हैं जिससे सनातनी एकता में फूट पड़े। 
वास्तव में सपा मुखिया को भगवान श्रीकृष्ण का कुछ भी ज्ञान है नहीं है और वे केवल जनमानस को उद्वेलित करने का प्रयास कर रहे हैं। बांके बिहारी का अर्थ टेढ़ा बिहारी ही है। त्रिभंगी का अर्थ भी यही है। श्री ठाकुरजी तीन जगह से शरीर को मोड़कर खड़े  होते हैं,  बंसी बजाते हुए उसे त्रिभंगी मुद्रा कहते हैं। भगवान श्रीकृष्ण टेढ़े ठाकुर जी हैं  यह भला कौन भक्त नहीं जानता। धर्म की रक्षा के लिए किसी भी तरह के टेढ़ेपन का विनियोग भगवान करते हैं। सीधे खडे़ हुए श्रीकृष्ण की मूर्ति बहुत ही कम मंदिरों में है। इसके विपरीत भगवान श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम रूप में हैं और उनकी सभी मूर्तियां  सीधे खड़ी हुई होती हैं। भगवान श्रीकृष्ण और मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम में तत्वतः अभेद होते हुए भी लीला व स्वरूप का भेद है।  इस अन्यता में वस्तुतः अन्यता ही है। संसार के इतिहास का धार्मिक व्याख्यान श्रीराम के जीवन में पर्यवसित होता है वहीं आध्यात्मिक आख्यान  भगवान श्रीकृष्ण के जीवन में पर्यवसित होता है। 
भगवान श्रीराम अपनी  भगवत्ता की घोषणा नहीं करते फिर भी उनके मनुष्य रूप में  धर्म परायण आचरण से वह प्रकट हो जाता है और सभी ऋ़षि- मुनि तथा भक्त उनमें भगवान का दर्शन करते हैं। जबकि भगवान श्रीकृष्ण क बचपन से ही आश्चर्यजनक घटनाओं की झड़ी लगाकर अपनी अलौकिक भगवत्ता को स्पष्ट करते हैं  और अपना विराट स्वरूप भी दिखाते हैं। तत्वतःश्रीराम ही कृष्ण हैं और श्री कृष्ण ही राम है। श्रीराम रूप में  भगवान ने अपना आचरण हमारे लिए अनुकरणीय बनाया और भगवान श्रीकृष्ण ने हमारे कल्याण के लिए गीता को प्रकट किया। भगवान श्रीकृष्ण एक ऐसे युग की चेतना बने  जिस युग में राजा- राजकुमार- शिक्षक सब अपने कर्तव्य से चूक गए थे । बंधुत्व का नाश हो गया था और मूल्यों का पतन हो रहा था। महाभारत में मूल्यों की रक्षा के लिए श्रीकृष्ण का टेढ़ापन ही काम आया। श्रीकृष्ण का टेढ़ापन ही उनका श्रृंगार है। ब्रज कवियों ने इसे बहुत गाया है।श्रीकृष्ण को कवि सूरदास ने भी दो पदों में गाया है श्याम टेढ़ो , टेढ़ो क्यों चलत है? वृंदावन के संत भी यह गुनगुनाते हैं। मीराबाई का भाव भी यही है - टेढ़ी नजरिया, टेढ़ी मटकिया  टेढ़ो ही मेरा यार है। ब्रज में भी एक कहावत बहुत प्रसिद्ध है-”टेढे़ को टेढ़ा ही भाता है” सीधे लोग कृष्ण को नहीं समझ पाते। 
कथावाचक धीरेंद्र शास्त्ऱी ने इसी  कथानक को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया और उनके तथाकथित विरोधियों  ने अज्ञानतावश इसको राजनैतिक हथियार बना लिया।
सपा मुखिया कुछ कहें सनातनी श्रीकृष्ण भक्त अपने बांके बिहारी और आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण दोनों को समझते हैं अतः कहीं ये झूठमूठ सनातनी बनना  सपा पर ही भारी न पड़ जाए ये देखना राजनैतिक विश्लेषकों के लिए  रोचक होगा।
Also Read- Special Article: देश का नया संकल्प - हम करके रहेंगे

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

Advertisement
Advertisement