हरदोई: सुलह-समझौते से मुकदमों का होगा त्वरित समाधान, राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान 3.0 का आगाज
हरदोई में विधिक सेवा प्राधिकरण ने राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान 3.0 की शुरुआत की, अदालतों में लंबित विवादों का आपसी सहमति से होगा सस्ता और त्वरित समाधान।
अदालतों में लंबे समय से लंबित मुकदमों और नए पारिवारिक व दीवानी विवादों को शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त कराने के उद्देश्य से हरदोई में राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान 3.0 की विधिवत शुरुआत कर दी गई है। यह अभियान राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ के मार्गदर्शन में तथा जनपद न्यायाधीश व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष रीता कौशिक के कुशल दिशा-निर्देशन में संचालित किया जा रहा है। इसका प्राथमिक लक्ष्य आमजन को समझौते के जरिए सस्ता, सुलभ और त्वरित न्याय दिलाना है।
अभियान के बारे में विस्तृत जानकारी साझा करते हुए सिविल जज (सीनियर डिवीजन) एवं प्रभारी सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण स्मिता गोस्वामी ने बताया कि इस विशेष पहल का मूल मकसद नागरिकों को वैकल्पिक समाधान प्रक्रिया से जोड़ना है। मुकदमों की बढ़ती संख्या और लंबी कानूनी प्रक्रिया के स्थान पर न्यायालयों में विचाराधीन मामलों एवं प्रारंभिक स्तर के विवादों को दोनों पक्षों की रजामंदी से सुलझाना ही इस मुहिम की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मध्यस्थता प्रक्रिया के तहत दोनों पक्ष एक निष्पक्ष और विशेष रूप से प्रशिक्षित मध्यस्थ की उपस्थिति में संवाद स्थापित कर किसी भी टकराव का सम्मानजनक समाधान खोजते हैं।
पारिवारिक मनमुटाव, जमीन-जायदाद से जुड़े बंटवारे, आपसी लेन-देन, व्यापारिक अनुबंध और वैवाहिक तनाव जैसे विवादों में यह व्यवस्था अत्यंत प्रभावकारी सिद्ध होती है। अदालत में वर्षों चलने वाली मुकदमेबाजी जहां मानसिक तनाव और भारी आर्थिक व्यय का कारण बनती है, वहीं मध्यस्थता प्रणाली से समय और धन दोनों की बचत होती है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें किसी भी पक्ष की पराजय नहीं होती, बल्कि आपसी भाईचारा और सामाजिक सौहार्द दोबारा कायम हो जाता है।
विधिक सेवा प्राधिकरण ने सभी आम नागरिकों, अधिवक्ताओं, न्यायिक अधिकारियों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न प्रशासनिक विभागों से अपील की है कि वे इस अभियान को सफल बनाने में अपना सक्रिय सहयोग दें। लोगों से आग्रह किया गया है कि वे छोटे-बड़े विवादों को अनावश्यक रूप से कोर्ट-कचहरी में खींचने के बजाय संवाद की मेज पर आएं और मध्यस्थता अपनाकर अपने बहुमूल्य समय, धन तथा आत्मीय रिश्तों की रक्षा करें।
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