उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय लोक अदालत में ऐतिहासिक निपटारा, 1.20 करोड़ से अधिक मामलों में सुलह
उत्तर प्रदेश में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में 1.20 करोड़ से अधिक मुकदमों का निस्तारण हुआ। प्री-लिटिगेशन और लंबित विवादों का आपसी सहमति से समाधान निकला।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश भर में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में सुलह-समझौते के आधार पर वादों के निस्तारण का अभूतपूर्व रिकॉर्ड बना है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक व उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति सूर्यकांत तथा कार्यपालक अध्यक्ष व न्यायमूर्ति विक्रम नाथ के संरक्षण में राज्य के सभी जिलों में इस महाअभियान का आयोजन किया गया। यह लोक अदालत इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक अरुण भंसाली के मार्गदर्शन और उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायमूर्ति व प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष अरिंदम सिन्हा के कुशल निर्देशन में संपन्न हुई।
उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सदस्य सचिव मनु कालिया ने विवरण देते हुए बताया कि प्रदेश के विभिन्न जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों से संकलित प्राथमिक आंकड़ों के अनुसार कुल 1 करोड़ 20 लाख 45 हजार 880 मामलों का आपसी सहमति से निस्तारण किया गया। निस्तारित प्रकरणों में 1 करोड़ 15 लाख 24 हजार 62 प्री-लिटिगेशन स्तर के विवाद और विभिन्न अदालतों में चल रहे 5 लाख 21 हजार 818 लंबित मुकदमे शामिल हैं। यह आंकड़े शाम तक प्राप्त सूचनाओं पर आधारित हैं, जबकि अंतिम संकलित रिपोर्ट आने के बाद निस्तारित वादों की कुल संख्या में और बढ़ोतरी होने की संभावना है।
विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार लोक अदालतों के माध्यम से जनसामान्य को सुलभ, त्वरित और बिना किसी आर्थिक बोझ के न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में यह परिणाम अत्यंत प्रभावी साबित हुआ है। दीवानी, पारिवारिक, मोटर दुर्घटना, बैंक वसूली और राजस्व से जुड़े जटिल मुकदमों को बातचीत की मेज पर लाकर हमेशा के लिए समाप्त कराया गया, जिससे लाखों परिवारों को अदालतों के चक्कर लगाने और मानसिक तनाव से स्थायी मुक्ति मिली है।
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