Asian Games 2026: निशानेबाजी में भारत का दबदबा, हिमांशु ढिल्लों ने 10 मीटर एयर राइफल में जीता सिल्वर मेडल
एशियन गेम्स 2026 में भारतीय शूटर हिमांशु ढिल्लों ने 10 मीटर एयर राइफल व्यक्तिगत स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल (रजत पदक) अपने नाम कर लिया है।
- एशियन गेम्स 2026: 10 मीटर एयर राइफल में हिमांशु ढिल्लों का सटीक निशाना, भारत की झोली में डाला रजत पदक
- Asian Games Shooting: हिमांशु ढिल्लों ने व्यक्तिगत स्पर्धा में रचा इतिहास, 10m एयर राइफल में जीता सिल्वर
- भारतीय शूटर हिमांशु ढिल्लों की ऐतिहासिक उपलब्धि, एशियन गेम्स 2026 में 10 मीटर एयर राइफल में जीता रजत पदक
आईची-नागोया (जापान)। एशियन गेम्स 2026 के निशानेबाजी स्पर्धा में भारत के लिए बड़ी और गौरवशाली खबर सामने आई है। भारतीय निशानेबाज हिमांशु ढिल्लों ने 10 मीटर एयर राइफल पुरुष एकल (व्यक्तिगत) स्पर्धा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल (रजत पदक) पर कब्जा जमा लिया है। बेहद तनावपूर्ण और कड़े मुकाबले वाले फाइनल राउंड में हिमांशु ने अपने संयम और अचूक निशाने का परिचय देते हुए पोडियम पर दूसरा स्थान सुनिश्चित किया। इस उपलब्धि के साथ ही भारत की पदक तालिका में एक और महत्वपूर्ण पदक जुड़ गया है।
प्रतियोगिता के फाइनल राउंड में एशिया महाद्वीप के शीर्ष निशानेबाजों के बीच अंतिम शॉट तक संघर्ष जारी रहा। चीन, दक्षिण कोरिया और जापान के अनुभवी निशानेबाजों की मजबूत मौजूदगी के बावजूद हिमांशु ने शुरुआत से ही अंक तालिका के शीर्ष तीन स्थानों में अपनी जगह बनाए रखी और अंततः देश के लिए रजत पदक पक्का किया।
- क्वालिफिकेशन से लेकर फाइनल तक का सफर
10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा के क्वालिफिकेशन दौर में भी हिमांशु ढिल्लों शानदार लय में नजर आए थे। 60 शॉट्स की क्वालिफिकेशन सीरीज में उन्होंने लगातार इनर-टेन (Inner 10) पर निशाना साधते हुए शीर्ष आठ निशानेबाजों में जगह बनाई और फाइनल के लिए क्वालिफाई किया।
फाइनल मुकाबले में जब एलिमिनेशन राउंड शुरू हुआ, तब दबाव चरम पर था। हर दो शॉट के बाद सबसे कम अंक वाले शूटर के बाहर होने के नियम के बीच हिमांशु ने अपनी एकाग्रता को टूटने नहीं दिया। दबाव के क्षणों में उन्होंने 10.5 से अधिक के कई लगातार शॉट्स दागे। हालांकि स्वर्ण पदक के लिए हुए अंतिम द्वंद्व में मामूली अंकों के फासले से वे शीर्ष स्थान से चूक गए, लेकिन उनकी इस निरंतरता ने उन्हें 10 मीटर एयर राइफल की व्यक्तिगत स्पर्धा का रजत पदक दिला दिया।
- भारतीय निशानेबाजी की मजबूत परंपरा को आगे बढ़ाया
भारत का एशियन गेम्स के इतिहास में निशानेबाजी में हमेशा से वर्चस्व रहा है। जसपाल राणा, अभिनव बिंद्रा, गगन नारंग, जीतू राय और सौरभ चौधरी जैसे दिग्गजों ने जिस परंपरा की नींव रखी थी, युवा पीढ़ी के निशानेबाज उसे मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं। 10 मीटर एयर राइफल को तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण और अत्यधिक एकाग्रता वाला खेल माना जाता है, जहां एक मिलीमीटर का दसवां हिस्सा भी पदक का रंग बदल सकता है।
हिमांशु ढिल्लों की इस ऐतिहासिक सफलता ने साबित कर दिया है कि भारत की नई पौध अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी भी दबाव को झेलने और शीर्ष स्तर पर पोडियम फिनिश करने में सक्षम है। राष्ट्रीय राइफल संघ (NRAI) और खेल मंत्रालय के टॉप्स (TOPS - Target Olympic Podium Scheme) के तहत मिले आधुनिक प्रशिक्षण और वैज्ञानिक सहयोग ने इस स्तर की तैयारियों को धार दी है।
- देश भर में जश्न का माहौल, खेल जगत ने दी बधाई
एशियन गेम्स 2026 में हिमांशु ढिल्लों के रजत पदक जीतने की खबर आते ही भारतीय खेल प्रेमियों और खेल जगत में खुशी की लहर दौड़ गई। साथी एथलीटों, पूर्व ओलंपियनों और खेल प्रशासकों ने हिमांशु को इस शानदार उपलब्धि पर बधाई दी है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि महाद्वीपीय स्तर की इस कठिन प्रतियोगिता में व्यक्तिगत रजत पदक जीतना हिमांशु के आगामी अंतरराष्ट्रीय करियर और आगामी ओलंपिक चक्र के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।
कोचिंग स्टाफ और सहयोगी टीम ने भी हिमांशु के समर्पण और अनुशासन की सराहना की है। फाइनल मुकाबले के बाद टीम कैंप में उत्सव का माहौल रहा। हिमांशु के इस प्रदर्शन से रेंज में मौजूद अन्य भारतीय निशानेबाजों का मनोबल भी बढ़ा है, जो आगामी दिनों में टीम और मिक्स्ड इवेंट्स में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे।
- आगामी स्पर्धाओं पर टिकी निगाहें
व्यक्तिगत स्पर्धा में पदक पक्का करने के बाद अब हिमांशु ढिल्लों का अगला फोकस आगामी टीम और मिक्स्ड टीम स्पर्धाओं पर रहेगा। खेल प्रेमियों को उम्मीद है कि वह इस सकारात्मक लय को आगे भी जारी रखेंगे और भारतीय निशानेबाजी दल के पदकों की संख्या में और इजाफा करेंगे। एशियन गेम्स 2026 में निशानेबाजी से भारतीय दल को कई पदकों की उम्मीदें हैं और हिमांशु की इस जीत ने इस अभियान को मजबूत शुरुआत दी है।
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