Mathura News: छाता चीनी मिल आंदोलनकारियों पर देर रात पुलिस का एक्शन, धरना स्थल खाली; 150 लोगों पर एफआईआर
मथुरा के छाता में चीनी मिल चालू कराने को लेकर चल रहे धरने पर पुलिस ने देर रात कार्रवाई कर प्रदर्शनकारियों को हटाया। अमर्यादित टिप्पणी के आरोप में 150 लोगों पर एफआईआर दर्ज।
- मथुरा में छाता चीनी मिल बहाली आंदोलन पर आधी रात पुलिस की कार्रवाई, टेंट उखाड़े, अमर्यादित टिप्पणी मामले में 150 पर केस
- Chhata Sugar Mill Protest: धरना दे रहे किसानों और आंदोलनकारियों को पुलिस ने हटाया, सोशल मीडिया और मंच से बयानबाजी पर एफआईआर
- छाता चीनी मिल आंदोलन में तनाव: पुलिस ने देर रात खत्म कराया धरना, 150 नामजद व अज्ञात पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज
मथुरा (छाता)। मथुरा जनपद के छाता क्षेत्र में वर्षों से बंद पड़ी सहकारी चीनी मिल को पुनः शुरू कराने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन ने अचानक तनावपूर्ण मोड़ ले लिया। कई दिनों से मिल परिसर के समीप शांतिपूर्ण धरने पर बैठे आंदोलनकारियों और किसानों के खिलाफ पुलिस एवं प्रशासन ने देर रात बड़ी कार्रवाई करते हुए धरना स्थल को खाली करा दिया। मध्य रात्रि में भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे प्रशासनिक अमले ने टेंट, शामियाने और लाउडस्पीकर हटवाते हुए प्रदर्शनकारियों को मौके से रवाना कर दिया। इसके साथ ही, मंच और सोशल मीडिया के माध्यम से उच्च पदों पर आसीन जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों पर अमर्यादित टिप्पणियां करने के आरोप में पुलिस ने करीब 150 लोगों के खिलाफ नामजद और अज्ञात में गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है।
इस आकस्मिक पुलिसिया कार्रवाई के बाद समूचे छाता और आसपास के ग्रामीण इलाकों में स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से धरना स्थल के चारों ओर पीएसी (प्रादेशिक आर्म्ड कांस्टेबुलरी) और कई थानों की पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई है। किसान संगठनों ने आधी रात को की गई इस कार्रवाई को अलोकतांत्रिक बताते हुए रोष प्रकट किया है, वहीं पुलिस प्रशासन का कहना है कि आंदोलन की आड़ में सार्वजनिक शांति भंग करने और अमर्यादित आचरण को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
- देर रात पुलिस ने घेरा धरना स्थल, अफरा-तफरी का माहौल
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, रविवार-सोमवार की दरमियानी रात लगभग 12 बजे के बाद कई थानों की पुलिस गाड़ियों के सायरन बजते हुए छाता चीनी मिल के सामने पहुंचे। उस समय अधिकांश आंदोलनकारी और किसान तंबुओं के भीतर सो रहे थे। पुलिस अधिकारियों ने लाउडस्पीकर से घोषणा करते हुए धरना स्थल को तुरंत खाली करने के निर्देश दिए।
प्रशासन के इस अप्रत्याशित कदम से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। कुछ युवा कार्यकर्ताओं और किसान नेताओं ने पुलिस की इस कार्रवाई का विरोध करने का प्रयास किया और नारेबाजी की, लेकिन पुलिस की भारी संख्या को देखते हुए उन्हें पीछे हटना पड़ा। पुलिस ने नगर निगम व स्थानीय प्रशासन की टीम के साथ मिलकर कुछ ही घंटों में मंच, कुर्सियां, टेंट और बैनर-पोस्टर हटा दिए और पूरे स्थल को अपने नियंत्रण में ले लिया। एहतियात के तौर पर कुछ प्रमुख आंदोलनकारियों को हिरासत में लेकर अन्यत्र ले जाने की भी सूचना है, हालांकि पुलिस ने औपचारिक गिरफ्तारी के संबंध में विस्तृत स्थिति अभी स्पष्ट नहीं की है।
- अमर्यादित टिप्पणियों और भड़काऊ बयानों पर कानूनी शिकंजा
पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के संबंध में मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह कानूनी कार्रवाई केवल धरना देने के कारण नहीं, बल्कि आंदोलन के मंच से दी जा रही चेतावनियों, सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित करने के प्रयासों और संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के खिलाफ कथित रूप से इस्तेमाल की गई असंसदीय व अमर्यादित भाषा के आधार पर की गई है।
पुलिस का आरोप है कि पिछले कुछ दिनों से आंदोलन के दौरान कुछ वक्ताओं द्वारा भड़काऊ भाषण दिए जा रहे थे। इसके अलावा सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक वीडियो और संदेश प्रसारित किए जा रहे थे, जिससे सामाजिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की प्रबल आशंका उत्पन्न हो गई थी। स्थानीय पुलिस चौकी प्रभारी/थाना स्तर से दी गई तहरीर के आधार पर लगभग 150 लोगों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं और आईटी एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है। पुलिस अब वीडियो फुटेज और ऑडियो रिकॉर्डिंग के जरिए अन्य अज्ञात लोगों की शिनाख्त करने में जुटी है।
- दशकों पुरानी छाता चीनी मिल और किसानों का दर्द
छाता की सहकारी चीनी मिल कभी मथुरा, आगरा और सीमावर्ती हरियाणा व राजस्थान के गन्ना किसानों के लिए जीवनरेखा मानी जाती थी। वर्ष 1970-80 के दशक में स्थापित यह मिल हजारों किसानों की आजीविका का मुख्य साधन थी। हालांकि, लगातार वित्तीय घाटे, तकनीकी खराबी और कुप्रबंधन के चलते लगभग डेढ़-दो दशक पूर्व इस मिल के पहिए पूरी तरह थम गए।
मिल बंद होने के बाद से क्षेत्र के किसानों का गन्ने की खेती से मोहभंग होने लगा। जो किसान गन्ना उगाते भी हैं, उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए सुदूर जनपदों की मिलों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे परिवहन लागत अत्यधिक बढ़ जाती है और समय पर भुगतान नहीं मिलता। इसी के चलते स्थानीय युवाओं और किसान संगठनों ने 'छाता चीनी मिल चलाओ संघर्ष समिति' का गठन किया था। इस समिति के बैनर तले पिछले कई महीनों से कभी पदयात्रा, कभी ज्ञापन तो कभी क्रमिक अनशन के माध्यम से सरकार से मिल का आधुनिकीकरण कर इसे पुनः चालू कराने की गुहार लगाई जा रही थी।
- आंदोलनकारियों का आरोप: वादों के बावजूद समाधान नहीं, दमन का सहारा
धरना स्थल से हटाए जाने के बाद किसान नेताओं ने प्रशासनिक रवैये पर कड़ा रोष व्यक्त किया है। आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि चुनाव के समय प्रत्येक राजनीतिक दल छाता चीनी मिल को पुनः शुरू कराने का वादा करता है, लेकिन सत्ता में आने के बाद इस औद्योगिक इकाई को भुला दिया जाता है।
आंदोलनकारियों का दावा है कि वे पूर्णतः शांतिपूर्ण और गांधीवादी तरीके से अपनी जायज मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। उनका कहना है कि किसानों पर दर्ज की गई एफआईआर पूरी तरह फर्जी और दबाव बनाने की रणनीति है। नेताओं ने स्पष्ट किया कि पुलिसिया लाठी या मुकदमों के डर से आंदोलन समाप्त नहीं होगा, बल्कि अब गांव-गांव जाकर पंचायतें बुलाई जाएंगी और आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा।
दूसरी ओर, जिला प्रशासन और पुलिस का रुख स्पष्ट है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बात रखने का अधिकार सभी को है, लेकिन इसके लिए कानून हाथ में लेने, राष्ट्रीय राजमार्ग अथवा प्रमुख मार्गों को अवरुद्ध करने की धमकी देने या किसी व्यक्ति विशेष की मानहानि करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
अधिकारियों के मुताबिक, बिना पूर्व प्रशासनिक अनुमति के संवेदनशील स्थलों पर भीड़ जुटाने और रात के समय सड़क के किनारे अव्यवस्था फैलाने से सुरक्षा संबंधी गंभीर खतरे उत्पन्न हो रहे थे। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों ने कानून का उल्लंघन किया है और अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया है, उनके खिलाफ कानून सम्मत विधिक कार्रवाई की जा रही है, जबकि आम किसानों के वास्तविक मुद्दों पर शासन स्तर पर विचार-विमर्श के रास्ते हमेशा खुले हैं।
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