कोलकाता में होगा इंडिया एनर्जी वीक 2027: कर्टन रेज़र में बोले हरदीप सिंह पुरी, वैश्विक ऊर्जा मंच पर बढ़ेगी भारत की धमक
इंडिया एनर्जी वीक 2027 का कर्टन रेज़र संपन्न। कोलकाता के न्यू टाउन कन्वेंशन सेंटर में होगा पाँचवाँ संस्करण, 75 हजार से अधिक वैश्विक विशेषज्ञ लेंगे भाग।
भारत के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित वैश्विक ऊर्जा सम्मेलन 'इंडिया एनर्जी वीक' (आईईडब्ल्यू) के पाँचवें संस्करण की आधिकारिक तैयारियों का शंखनाद हो गया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कर्टन रेज़र कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए घोषणा की कि इस ऐतिहासिक वैश्विक महाकुंभ की मेजबानी पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता करेगा। यह आयोजन न्यू टाउन कन्वेंशन सेंटर में संपन्न होगा। इस आयोजन की आधिकारिक थीम “नवाचार को बढ़ावा, सुरक्षित ऊर्जा और स्वर्णिम कल का निर्माण” (Unlocking Innovation, Securing Energy, Shaping Tomorrow) तय की गई है।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि अपनी शुरुआत के मात्र चार वर्षों के अल्पकाल में इंडिया एनर्जी वीक एक वैश्विक ऊर्जा शक्ति के रूप में स्थापित हो चुका है। पहले संस्करण में जहां 30 हजार प्रतिनिधियों ने सहभागिता की थी, वहीं पिछले संस्करण में 120 से अधिक देशों के 75 हजार से अधिक अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल और पश्चिमी एशिया के संकट के बावजूद भारत ने अपने घरेलू बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों को पूरी तरह नियंत्रित और स्थिर रखकर अपनी रणनीतिक परिपक्वता का परिचय दिया है। कोलकाता में होने वाला यह आयोजन न केवल बंगाल के औद्योगिक पुनर्जागरण को गति देगा, बल्कि भारत को वैश्विक ऊर्जा विमर्श की दिशा तय करने वाले नेतृत्वकर्ता के रूप में भी स्थापित करेगा।
इंडिया एनर्जी वीक 2027: प्रमुख आयाम एवं वैश्विक भागीदारी
| प्रमुख मानक | आयोजन विवरण एवं रणनीतिक लक्ष्य |
| आयोजन स्थल | न्यू टाउन कन्वेंशन सेंटर, कोलकाता (पश्चिम बंगाल) |
| वैश्विक सहभागिता | 75,000+ ऊर्जा पेशेवर एवं 700+ अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शक |
| मुख्य विमर्श क्षेत्र | ग्रीन हाइड्रोजन, जैव ईंधन, एलएनजी, एआई और नेट-जीरो लक्ष्य |
| युवा एवं नवाचार मंच | वसुधा (Vasudha), अविन्या (Avinya) और एफआईपीआई के 12 स्टूडेंट चैप्टर्स |
| रणनीतिक महत्व | पूर्वी व पूर्वोत्तर भारत के आर्थिक गलियारों और कनेक्टिविटी को मजबूती |
कोलकाता संस्करण भारत के बढ़ते तकनीकी स्टार्टअप इकोसिस्टम, इंजीनियरिंग कौशल और स्वदेशी नवाचार को दुनिया के सामने प्रदर्शित करेगा। युवाओं और शोधकर्ताओं को नीति-निर्माण से जोड़ने के लिए 'वसुधा', 'अविन्या' और हैकथॉन जैसी विशेष पहलों के साथ-साथ फेडरेशन ऑफ इंडियन पेट्रोलियम इंडस्ट्री (एफआईपीआई) के 12 स्टूडेंट चैप्टर्स को भी इस अभियान से जोड़ा गया है। सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में ग्रीन हाइड्रोजन, कम्प्रेस्ड बायो-गैस (सीबीजी), तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, पेट्रोकेमिकल्स और शून्य कार्बन उत्सर्जन (नेट-जीरो) के व्यवहारिक रोडमैप पर वैश्विक नीतियां गढ़ी जाएंगी।
राजधानी लखनऊ से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े इंडियनऑयल के निदेशक (वित्त) अनुज जैन ने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय मंच नीति-निर्माताओं, निवेशकों, वैज्ञानिकों और उद्योगपतियों को एक ही छत के नीचे लाकर ऊर्जा सुरक्षा की ठोस नींव तैयार करता है। इस दौरान इंडियनऑयल के कार्यकारी निदेशक व राज्य प्रमुख संजय भंडारी और एकेटीयू के कुलपति प्रो. जय प्रकाश पांडेय सहित ऊर्जा क्षेत्र के वरिष्ठ नीति-निर्माता उपस्थित रहे।
उत्तर प्रदेश में इंडियनऑयल: ऊर्जा आपूर्ति व बुनियादी ढांचा
| अवसंरचना घटक | वर्तमान क्षमता व आपूर्ति नेटवर्क |
| मथुरा रिफाइनरी | 8.0 एमएमटीपीए स्थापित क्षमता, 10.05 एमएमटी रिकॉर्ड थ्रूपुट |
| वितरण नेटवर्क | 6,349 रिटेल आउटलेट्स, 13 एलपीजी बॉटलिंग प्लांट |
| सामरिक इकाइयां | 13 पीओएल टर्मिनल, 11 विमानन ईंधन (एटीएफ) स्टेशन |
| पाइपलाइन नेटवर्क | 650+ किलोमीटर लंबी भूमिगत ईंधन परिवहन पाइपलाइनें |
| सामाजिक व औद्योगिक सहयोग | एचयूआरएल खाद कारखाना, सीबीजी संयंत्र, मथुरा-अयोध्या हेरिटेज संरक्षण |
उत्तर प्रदेश के आर्थिक और औद्योगिक परिदृश्य में ऊर्जा सुरक्षा की रीढ़ बनी इंडियनऑयल की उपलब्धियों का भी विशेष उल्लेख किया गया। राज्य की एकमात्र रिफाइनरी मथुरा रिफाइनरी ने अपनी 8.0 एमएमटीपीए की स्थापित क्षमता के मुकाबले 10.05 एमएमटी का सर्वकालिक रिकॉर्ड थ्रूपुट दर्ज किया है। प्रदेशभर में 13 एलपीजी बॉटलिंग प्लांट, 13 पीओएल टर्मिनल, 11 एविएशन फ्यूल स्टेशन, 650 किलोमीटर से अधिक लंबी पाइपलाइनें और 6,349 रिटेल आउटलेट्स आम उपभोक्ताओं, रक्षा प्रतिष्ठानों, उद्योगों और विद्युत संयंत्रों की निर्बाध ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित कर रहे हैं। राज्य के राजस्व में भारी योगदान देने के साथ ही गोरखपुर में एचयूआरएल खाद कारखाने, बायो-गैस संयंत्रों और मथुरा, अयोध्या व लखनऊ के ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण में ऊर्जा क्षेत्र की अग्रणी भूमिका बनी हुई है।
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