इंदौर के सबसे स्वच्छ शहर के दावे पर लगा ग्रहण- भागीरथपुरा में दूषित पानी से मासूम की मौत, सैकड़ों बीमार।
देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में प्रसिद्ध इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल ने बड़ा संकट पैदा कर दिया है। इस घटना में एक 5-6
देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में प्रसिद्ध इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल ने बड़ा संकट पैदा कर दिया है। इस घटना में एक 5-6 महीने के मासूम बच्चे की मौत हो गई, जब उसकी मां ने गाढ़े दूध को पचाने के लिए नल का पानी मिलाया था। बच्चे को उल्टी और दस्त की शिकायत हुई, हालत बिगड़ने पर इलाज कराया गया, लेकिन 29 दिसंबर 2025 को उसकी मौत हो गई। यह बच्चा परिवार की 10 साल की मन्नतों का फल था। दूषित पानी सीवेज लाइन से लीकेज के कारण पेयजल पाइपलाइन में मिल गया था, जिससे इलाके में उल्टी-दस्त की बीमारी फैल गई। जांच में पता चला कि भागीरथपुरा पुलिस चौकी के पास बने शौचालय की ड्रेनेज पाइप लीक होकर मुख्य नर्मदा जल लाइन में मिल रही थी, जिससे पानी जहरीला हो गया। इस संकट ने पूरे इलाके को प्रभावित किया है। पिछले एक सप्ताह में 1100 से अधिक लोग बीमार पड़ चुके हैं, जिनमें उल्टी, दस्त और डिहाइड्रेशन जैसे लक्षण दिखे। इनमें से 150 से अधिक मरीज विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनका इलाज चल रहा है।
स्वास्थ्य विभाग ने 2700 से अधिक घरों का सर्वे किया, जिसमें 12,000 से ज्यादा लोगों की जांच हुई। कई मरीजों को निजी और सरकारी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। मौतों का आंकड़ा अलग-अलग रिपोर्टों में 7 से 13 तक बताया जा रहा है, जिसमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। मृतकों में यह मासूम बच्चा भी है, जिसकी मौत दूध में मिले दूषित पानी से हुई। इलाके में 24 दिसंबर से शिकायतें शुरू हुईं, लेकिन शुरुआत में ध्यान नहीं दिया गया। बाद में मामला गंभीर होने पर नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की टीमें सक्रिय हुईं। पानी के सैंपल लिए गए, और लीकेज की जगह की मरम्मत शुरू की गई। इलाके में टैंकरों से पानी की सप्लाई की जा रही है, और लोगों को उबाला पानी पीने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य शिविर लगाए गए हैं, जहां मरीजों की जांच और दवा वितरण हो रहा है। इस घटना ने इलाके में मातम पसरा हुआ है।
कई परिवारों में मौतें हुई हैं, और बीमार लोग अस्पतालों में जीवन-मृत्यु की जंग लड़ रहे हैं। दूषित पानी का असर मुख्य रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग पर पड़ा है। जांच में पाइपलाइन में लीकेज और सीवेज मिश्रण की पुष्टि हुई है। यह लीकेज पुलिस चौकी के शौचालय के नीचे मुख्य लाइन में था। इस संकट की शुरुआत दिसंबर के अंतिम सप्ताह में हुई, जब लोग बड़े पैमाने पर बीमार पड़ने लगे। अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ने से स्थिति गंभीर हो गई। मासूम बच्चे की मौत इस त्रासदी की सबसे दर्दनाक घटना है। मां ने बाजार से लाया दूध गाढ़ा होने पर नल का पानी मिलाया, जिससे बच्चे की तबीयत बिगड़ी। घर पर दवा दी गई, लेकिन हालत नहीं संभली और अस्पताल में मौत हो गई। परिवार का कहना है कि दूषित पानी ही मौत का कारण बना। इलाके में अन्य मौतें भी उल्टी-दस्त से हुईं। स्वास्थ्य विभाग ने सर्वे में हजारों लोगों की जांच की, और हल्के लक्षण वाले मरीजों को घर पर ही दवा दी गई। गंभीर मरीजों को अस्पतालों में भर्ती किया गया। कुछ रिपोर्टों में हैजे की पुष्टि भी हुई है।
नगर निगम ने लाइन की सफाई और मरम्मत का काम शुरू किया। टैंकरों से स्वच्छ पानी की व्यवस्था की गई। इस घटना ने इंदौर की स्वच्छता की छवि पर सवाल उठाए हैं। इलाके में लोग कई दिनों से दूषित पानी की शिकायत कर रहे थे, लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं हुई। अब टीमें घर-घर जाकर सैंपल ले रही हैं और सफाई अभियान चला रही हैं। बीमार लोगों की संख्या 1100 से अधिक है, और अस्पतालों में 150 के करीब मरीज भर्ती हैं। मौतों की संख्या अलग-अलग स्रोतों में भिन्न है, लेकिन 7 से अधिक की पुष्टि हो चुकी है। मासूम की मौत ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है। यह घटना दिसंबर 2025 के अंत में शुरू हुई और नए साल की शुरुआत में भी जारी है।
स्वास्थ्य टीमें लगातार काम कर रही हैं। पानी की जांच रिपोर्ट आने के बाद और स्पष्टता आएगी। इलाके में मेडिकल कैंप लगे हैं, जहां डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। दूषित पानी का मुख्य कारण पाइपलाइन लीकेज और सीवेज मिश्रण है। इस संकट से प्रभावित परिवारों में शोक है। बच्चे की मौत ने माता-पिता को सदमे में डाल दिया है। अन्य बीमार लोग भी इलाज करा रहे हैं। प्रशासन ने स्थिति नियंत्रित करने के प्रयास तेज कर दिए हैं। यह घटना इंदौर के भागीरथपुरा इलाके की है, जहां नर्मदा जल की मुख्य लाइन प्रभावित हुई। लीकेज की वजह से गंदा पानी मिल गया। अब मरम्मत कार्य चल रहा है। लोगों को सतर्क रहने और उबाला पानी पीने को कहा गया है। यह जल संकट इलाके के हजारों निवासियों को प्रभावित कर रहा है। मासूम की मौत इसकी सबसे दुखद घटना है।
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