कमर्शियल वाहनों के लिए बड़ा बदलाव- AIS 140 मानक के तहत GPS ट्रैकिंग अनिवार्य, 31 अक्टूबर 2025 तक पुराने वाहनों में इंस्टॉलेशन जरूरी।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने कमर्शियल और पब्लिक ट्रांसपोर्ट वाहनों के लिए AIS 140 मानक को और सख्त करते हुए 2025 में नए
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने कमर्शियल और पब्लिक ट्रांसपोर्ट वाहनों के लिए AIS 140 मानक को और सख्त करते हुए 2025 में नए अपडेट जारी किए हैं। इस मानक के अनुसार सभी कमर्शियल वाहनों में GPS आधारित व्हीकल ट्रैकिंग डिवाइस, इमरजेंसी पैनिक बटन और रियल टाइम लोकेशन ट्रांसमिशन अनिवार्य है। यह नियम गुड्स कैरियर, टैक्सी, टूरिस्ट बसें और अन्य कमर्शियल वाहनों पर लागू होता है। जनवरी 2025 से पहले रजिस्टर्ड सभी कमर्शियल वाहनों को 31 अक्टूबर 2025 तक इस मानक का पालन करना होगा। डिवाइस IRNSS और GLONASS कम्पैटिबल होना चाहिए और वाहन की ट्रैकिंग आईडी को राज्य ट्रांसपोर्ट मॉनिटरिंग सर्वर से रजिस्टर कराना आवश्यक है। डिवाइस प्रदाता का MoRTH और NIC से अप्रूव्ड होना जरूरी है। AIS 140 मानक का उद्देश्य सड़क सुरक्षा बढ़ाना, पैसेंजर सेफ्टी सुनिश्चित करना और फ्लीट मॉनिटरिंग को बेहतर बनाना है। इस सिस्टम से रियल टाइम में वाहन की लोकेशन, रूट और ड्राइवर बिहेवियर की निगरानी संभव होती है। जियोफेंसिंग फीचर से अगर वाहन निर्धारित रूट से भटकता है तो अलर्ट जारी होता है, जिससे रूट डिविएशन को रोका जा सकता है। इमरजेंसी पैनिक बटन से किसी आपात स्थिति में तुरंत मदद मिल सकती है। यह मानक पहले पब्लिक ट्रांसपोर्ट बसों और स्कूल वैन के लिए लागू था, लेकिन 2025 में इसे सभी कमर्शियल वाहनों के लिए विस्तारित किया गया है। ट्रैकिंग डिवाइस वाहन डेटाबेस वाहन से सीधे इंटीग्रेट होता है, जिससे पारदर्शिता बढ़ती है।
नॉन-कम्प्लायंस पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। नियम का पालन न करने पर भारी जुर्माना, फिटनेस सर्टिफिकेट रिन्यूअल में अस्वीकृति, परमिट सस्पेंशन या वाहन डीरजिस्ट्रेशन जैसी सजा हो सकती है। कुछ मामलों में ऑपरेशनल हॉल्ट भी लगाया जा सकता है। यह नियम राज्य स्तर पर अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर सभी कमर्शियल वाहनों के लिए लागू है। डिवाइस में बैकअप बैटरी कम से कम चार घंटे की होनी चाहिए और यह धूल, पानी से सुरक्षित IP67 कम्प्लायंट होना आवश्यक है। फर्मवेयर ओवर द एयर अपडेट की सुविधा भी अनिवार्य है। AIS 140 कम्प्लायंट डिवाइस से फ्लीट ओनर्स को कई फायदे मिलते हैं। रूट ऑप्टिमाइजेशन से ईंधन बचत होती है, ड्राइवर बिहेवियर मॉनिटरिंग से सुरक्षित ड्राइविंग बढ़ती है और चोरी की स्थिति में वाहन जल्दी रिकवर किया जा सकता है। कुछ इंश्योरेंस कंपनियां ऐसे वाहनों पर प्रीमियम डिस्काउंट भी देती हैं। यह सिस्टम इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम का हिस्सा है, जो सड़कों को सुरक्षित और स्मार्ट बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कमर्शियल वाहन मालिकों को सर्टिफाइड डिवाइस इंस्टॉल कराना होगा और पैनिक बटन एम्बेडेड होने चाहिए।
यह अपडेट 2025 में कमर्शियल सेक्टर के लिए बड़ा बदलाव लाया है। पहले यह मुख्य रूप से पब्लिक ट्रांसपोर्ट और स्कूल वैन तक सीमित था, लेकिन अब गुड्स कैरियर और टूरिस्ट वाहनों सहित सभी कमर्शियल वाहनों में लागू है। डिवाइस की रजिस्ट्रेशन और KYC अपडेट RTO से करानी होगी। ट्रैकिंग से रूट वॉयलेशन को रोकने में मदद मिलती है, क्योंकि जियोफेंसिंग अलर्ट से ड्राइवर निर्धारित रूट पर रहने के लिए बाध्य होता है। इमरजेंसी में पैनिक बटन से राज्य कंट्रोल रूम तक अलर्ट पहुंचता है। कमर्शियल वाहनों में AIS 140 डिवाइस इंस्टॉलेशन से रोड डिसिप्लिन बढ़ता है। रैश ड्राइविंग या रूट वॉयलेशन को डिटर किया जा सकता है। डिवाइस से डेटा सेंट्रल सर्वर पर जाता है, जो फ्लीट मैनेजमेंट को आसान बनाता है। 31 अक्टूबर 2025 की डेडलाइन पुराने वाहनों के लिए है, जबकि नए वाहनों में फैक्ट्री से ही इंस्टॉलेशन जरूरी है। नॉन-कम्प्लायंस पर परमिट सस्पेंशन से वाहन ऑपरेशन रुक सकता है। यह मानक ARAI द्वारा निर्धारित है और MoRTH द्वारा लागू किया गया है। डिवाइस में GPS के अलावा GSM/GPRS कम्युनिकेशन और इमरजेंसी बटन शामिल हैं। ट्रैकिंग से थेफ्ट रिकवरी आसान होती है और इंश्योरेंस क्लेम में मदद मिलती है। राज्य ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी द्वारा निगरानी की जाती है। कमर्शियल वाहन मालिकों को अप्रूव्ड वेंडर से डिवाइस लेना चाहिए।
What's Your Reaction?









