Karnataka Politics: कर्नाटक विधानसभा में आपस में भिड़े सत्ताधारी कांग्रेस के दो विधायक, महिला विधायक ने दी खुली चेतावनी
कर्नाटक विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान सत्ताधारी कांग्रेस के दो विधायक नयन मोटम्मा और शिवगंगा बासवराज आपस में भिड़ गए। महिला विधायक ने साथी विधायक को देख लेने की चेतावनी दी।
- कर्नाटक विधानसभा में हाई वोल्टेज ड्रामा: कांग्रेस विधायक नयन मोटम्मा और शिवगंगा बासवराज के बीच तीखी नोकझोंक, सदन में अफरा-तफरी
- Karnataka Assembly Ruckus: बेलगावी सुवर्ण सौध में कांग्रेस विधायकों के बीच जुबानी जंग, महिला MLA बोलीं- 'ज्यादा मत बोलो, बाहर देख लूंगी'
- सदन में कांग्रेस का अंदरूनी घमासान: बोलने के समय को लेकर अपनी ही पार्टी के साथी पर भड़कीं नयन मोटम्मा, साथी विधायकों ने कराया शांत
बेलगावी (कर्नाटक)। कर्नाटक विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान शुक्रवार को उस समय असहज और तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई, जब सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी के ही दो विधायक सदन के भीतर किसी जनहित के मुद्दे पर नहीं, बल्कि आपस में ही तीखी नोकझोंक में उलझ गए। मुदिगेरे विधानसभा क्षेत्र से पहली बार चुनकर आईं युवा कांग्रेस विधायक नयन मोटम्मा और चन्नागिरी से पार्टी विधायक शिवगंगा वी. बासवराज के बीच सदन के पटल पर जोरदार जुबानी जंग देखने को मिली। बात इतनी बढ़ गई कि महिला विधायक ने अपने ही दल के वरिष्ठ सहयोगी को सार्वजनिक रूप से चेतावनी देते हुए कह दिया कि वे अपनी हद में रहें, वरना बाहर देख लेंगी।
सत्तारूढ़ दल के दो निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच हुई इस सार्वजनिक तकरार से विधानसभा के भीतर मौजूद अन्य सदस्य और दर्शक दीर्घा में बैठे लोग हैरान रह गए। दोनों विधायकों के बीच बढ़ती तल्खी को देखते हुए आसपास मौजूद पार्टी के अन्य विधायकों और मंत्रियों ने तुरंत बीच-बचाव किया और दोनों को समझा-बुझाकर शांत कराया। हालांकि, तब तक इस घटना ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में सत्तारूढ़ दल के आंतरिक अनुशासन पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया।
- क्या था विवाद का कारण और कैसे शुरू हुई बहस?
सदन की कार्यवाही के दौरान यह विवाद उस वक्त शुरू हुआ जब शून्यकाल और विशेष उल्लेख के तहत सदस्यों को अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों के महत्वपूर्ण स्थानीय और बुनियादी मुद्दों को उठाने की अनुमति दी जा रही थी। मुदिगेरे से विधायक नयन मोटम्मा अपने निर्वाचन क्षेत्र में भारी बारिश से खराब हुई सड़कों, सिंचाई परियोजनाओं और कॉफी उत्पादक किसानों की समस्याओं पर अपनी बात रख रही थीं।
इसी दौरान, चन्नागिरी से विधायक शिवगंगा बासवराज अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने मोटम्मा द्वारा अपनी बात रखने में ज्यादा समय लेने पर टोकते हुए कथित तौर पर कुछ असहज टिप्पणियां कर दीं। बासवराज का कहना था कि अन्य सदस्यों को भी बोलने का अवसर मिलना चाहिए और समय सीमा का ध्यान रखा जाना चाहिए।
उनकी इस टोका-टोकी से नयन मोटम्मा भड़क गईं। उन्होंने अपनी सीट से मुड़कर बासवराज से कहा कि वे उनके भाषण में बार-बार बाधा न डालें। इसके बाद दोनों के बीच ऊंची आवाज में बहस शुरू हो गई, जिससे सदन की नियमित कार्यवाही में कुछ पलों के लिए व्यवधान उत्पन्न हो गया।
- 'हद में रहो, बाहर देख लूंगी': सदन में गूंजी तीखी आवाज
दोनों विधायकों के बीच तकरार इतनी तेज हो गई कि सदन के माइक्रोफोन में भी उनकी नोकझोंक साफ सुनाई देने लगी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब बासवराज लगातार अपनी बात पर अड़े रहे, तो नयन मोटम्मा बेहद आक्रामक अंदाज में आ गईं।
उन्होंने तीखे लहजे में कहा, "आप मुझे सिखाने की कोशिश मत कीजिए कि मुझे कब और कैसे बोलना है। जब अन्य सदस्य बोलते हैं तो आप चुप रहते हैं, लेकिन जब मैं बोलती हूं तो आपको परेशानी होती है। अपनी सीमा में रहिए, ज्यादा मत बोलिए। अगर ज्यादा शौक है तो बाहर आइए, मैं आपको देख लूंगी।"
एक महिला विधायक द्वारा अपनी ही पार्टी के पुरुष विधायक को इस तरह सीधे तौर पर 'देख लेने' की चेतावनी दिए जाने से सत्ता पक्ष की बेंचों पर खलबली मच गई। विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल सेक्युलर (JDS) के विधायकों ने इस स्थिति को देखते हुए तंज कसना शुरू कर दिया।
- साथी विधायकों और मंत्रियों ने संभाला मोर्चा
सदन के भीतर माहौल बिगड़ता देख पास में बैठे वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं, मंत्रियों और साथी विधायकों ने तत्काल हस्तक्षेप किया। कई महिला विधायकों और सचेतक स्तर के नेताओं ने नयन मोटम्मा को उनकी सीट पर बैठाया और पानी पिलाकर शांत रहने का आग्रह किया। वहीं दूसरी ओर, अन्य सदस्यों ने शिवगंगा बासवराज को भी पीछे खींचते हुए आगे किसी भी प्रकार की टिप्पणी न करने की सख्त हिदायत दी।
विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ने भी दोनों सदस्यों के इस अनपेक्षित आचरण पर नाराजगी व्यक्त की और सदस्यों को याद दिलाया कि सदन की एक स्थापित गरिमा और आचार संहिता होती है, जिसका पालन करना प्रत्येक सदस्य का प्राथमिक कर्तव्य है। विधानसभा अध्यक्ष ने सदन के रिकॉर्ड से असंसदीय और व्यक्तिगत टिप्पणियों की जांच कर उन्हें हटाने के निर्देश दिए।
- विपक्ष ने कसा तंज: 'सरकार में अनुशासन पूरी तरह खत्म'
सदन के भीतर कांग्रेस विधायकों के इस तरह सार्वजनिक रूप से भिड़ने की घटना पर मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने तीखा हमला बोला है। विपक्षी नेताओं ने कहा कि जब सत्ताधारी दल के विधायक सदन के भीतर ही एक-दूसरे की गरिमा का सम्मान नहीं कर सकते और खुलेआम धमकियां दे रहे हैं, तो ऐसी सरकार से राज्य की कानून-व्यवस्था संभालने की उम्मीद कैसे की जा सकती है।
विपक्ष का आरोप है कि कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के खेमों के बीच जो अंदरूनी खींचतान चल रही है, उसकी हताशा और तनाव अब निचले स्तर के विधायकों में भी खुलकर सामने आने लगा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दोनों विधायक पहली बार चुनकर विधानसभा पहुंचे हैं और अपने-अपने क्षेत्रों में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराना चाहते हैं। बोलने के समय और प्राथमिकता को लेकर विधायकों के बीच प्रतिस्पर्धा कोई नई बात नहीं है, लेकिन सदन के पटल पर पार्टी के आंतरिक मतभेदों का इस तरह विस्फोटक रूप लेना निश्चित तौर पर कांग्रेस नेतृत्व के लिए असहज करने वाला है।
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