लखनऊ के फैजुल्लागंज को जलभराव से मिलेगी मुक्ति, आईआईएम रोड से पक्कापुल तक बनेगा 5.5 किमी लंबा बांध
लखनऊ के फैजुल्लागंज को बाढ़ से बचाने के लिए 5.5 किमी लंबा तटबंध और 12 पंपिंग स्टेशन बनेंगे। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सीएचसी बनेंगे, नया स्कूल भी खुलेगा।
राजधानी लखनऊ के निचले इलाकों, विशेषकर फैजुल्लागंज को बरसात के दौरान जलभराव और बाढ़ की समस्या से हमेशा के लिए मुक्त कराने का व्यापक खाका तैयार कर लिया गया है। रक्षामंत्री एवं स्थानीय सांसद राजनाथ सिंह तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया कि आईआईएम मार्ग से खदरा होते हुए पक्कापुल तक गोमती नदी के बाएं किनारे पर लगभग 5.5 किलोमीटर लंबा मजबूत तटबंध बनाया जाएगा। इसके साथ ही नदी का पानी बस्तियों में लौटने से रोकने के लिए 12 नए आधुनिक पंपिंग स्टेशन स्थापित होंगे और न्याय विहार से एल्डिको नाले तक जल निकासी का मजबूत भूमिगत नेटवर्क तैयार किया जाएगा।
विस्तृत समीक्षा बैठक में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, स्थानीय विधायक डॉ. नीरज बोरा और महापौर सुषमा खर्कवाल के साथ सिंचाई, नगर विकास, आवास, राजस्व, स्वास्थ्य और ऊर्जा महकमे के शीर्ष अधिकारी सम्मिलित हुए। क्षेत्र में लगभग 6,500 परिवारों के जलभराव की चपेट में आने और करीब 38 हजार की आबादी के प्रभावित होने के बाद चलाए गए व्यापक राहत कार्यों की समीक्षा की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए सभी विभाग मिलकर एक समन्वित कार्ययोजना पर काम करेंगे, जिसके तहत क्षतिग्रस्त सड़कों की फौरी मरम्मत के साथ बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ किया जाएगा।
क्षेत्र के कायाकल्प के लिए शैक्षणिक और चिकित्सीय व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव किया जा रहा है। बच्चों की बेहतर पढ़ाई के लिए फैजुल्लागंज क्षेत्र में प्री-प्राइमरी से लेकर बारहवीं कक्षा तक के एक नए एकीकृत शिक्षण संस्थान की स्थापना की जाएगी। इसके अलावा स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करते हुए जलभराव से प्रभावित क्षेत्रों के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के रूप में उन्नत किया जाएगा। विद्युत आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने के लिए पुराने 33 केवीए ढांचे की जगह 132 केवीए क्षमता का नया विद्युत उपकेंद्र स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं।
नदी के जलस्तर में वृद्धि होने पर पानी की निकासी अवरुद्ध न हो, इसके लिए आधुनिक ड्रेनेज, सीवेज लाइन और तटबंध को एक दूसरे से वैज्ञानिक तरीके से जोड़ा जाएगा। गोमती नदी के प्राकृतिक प्रवाह को सुगम बनाने के लिए नदी तल से गाद निकालने का कार्य भी तेजी से किया जाएगा। प्रशासनिक अधिकारियों को स्पष्ट हिदायत दी गई है कि स्वच्छता, दवाओं के छिड़काव, फॉगिंग और स्वच्छ पेयजल आपूर्ति में किसी भी प्रकार की शिथिलता न बरती जाए, ताकि नागरिकों को सुरक्षित, स्वच्छ और सुविधायुक्त वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
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