झांसी की अनुराधा मेहरोत्रा ने बेटे के आइडिया से खड़ा किया सफल स्टार्टअप, योगी सरकार से मिली 10 लाख की मदद

झांसी की अनुराधा मेहरोत्रा ने शुरू किया हॉस्टल्स नियर मी स्टार्टअप। स्टार्ट इन यूपी से मिली 10 लाख की ग्रांट, 6 शहरों में छात्र ले रहे डिजिटल मदद।

By INA News Desk
Oct 19, 2026 - 00:00
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झांसी की अनुराधा मेहरोत्रा ने बेटे के आइडिया से खड़ा किया सफल स्टार्टअप, योगी सरकार से मिली 10 लाख की मदद

घर-परिवार संभालने वाली एक गृहिणी जब कारोबारी नेतृत्व अपने हाथ में ले ले, तो वह पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन जाती है। झांसी की रहने वाली अनुराधा मेहरोत्रा ने अपने बेटे की पढ़ाई के दौरान आई एक व्यावहारिक मुश्किल को केवल समझा ही नहीं, बल्कि उसे एक बड़े व्यावसायिक मॉडल में बदल दिया। उच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिला लेने वाले छात्र-छात्राओं को किराए के कमरे और छात्रावास तलाशने में होने वाली परेशानियों को दूर करने के लिए उन्होंने 'हॉस्टल्स नियर मी' की शुरुआत की। उनके इस नवाचार को राज्य सरकार की 'स्टार्ट इन यूपी' योजना के तहत दस लाख रुपये की वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई है, जिसकी पहली किस्त जारी होने के साथ ही परियोजना को नई उड़ान मिली है।

इस विचार का आधार बेटे आर्यमन के उच्च शिक्षा के दिनों का निजी अनुभव बना। नए शहर में प्रवेश के बाद सुरक्षित और विश्वसनीय छात्रावास खोजना उनके लिए एक बड़ी चुनौती साबित हुआ था। देश भर से उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहरों में जाने वाले हजारों विद्यार्थियों और उनके माता-पिता को हर सत्र में इसी उलझन से दो-चार होना पड़ता है। आर्यमन ने इस परेशानी को डिजिटल मंच से सुलझाने का विचार जब अपनी मां के सामने रखा, तो उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए वास्तविक धरातल पर उतारने का बीड़ा उठाया। इसके बाद दोनों ने मिलकर एक पारदर्शी और सुगम डिजिटल प्लेटफॉर्म की रूपरेखा तैयार की।

कंपनी के गठन के बाद अनुराधा मेहरोत्रा ने स्वयं मुख्य परिचालन अधिकारी का पद संभालते हुए रोजमर्रा के प्रबंधन, रणनीतियों और संचालन की कमान संभाली। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय स्थित नवाचार एवं इनक्यूबेशन केंद्र में पंजीकृत होकर इस परियोजना ने व्यवस्थित आकार लिया। वेबसाइट के माध्यम से शुरू हुआ यह मंच वर्तमान में झांसी के अलावा लखनऊ, जयपुर, ग्वालियर, इंदौर और मेरठ जैसे प्रमुख शैक्षणिक केंद्रों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को उनकी जरूरत और बजट के अनुसार ठहरने का सुरक्षित स्थान खोजने में मदद कर रहा है।

सरकारी प्रोत्साहन और सहायता राशि मिलने के बाद यह तकनीकी उपक्रम अब अपने दायरे को और व्यापक बनाने में जुट गया है। विद्यार्थियों और छात्रावास संचालकों के बीच सीधा समन्वय बनाने के लिए जल्द ही इसका समर्पित मोबाइल एप्लिकेशन भी प्रस्तुत करने की तैयारी है। छोटे शहर से शुरू होकर कई राज्यों के युवाओं तक अपनी पहुंच बना चुका यह सफर दिखाता है कि यदि संकल्प और प्रशासनिक सहयोग का साथ मिल जाए, तो महिलाओं का नेतृत्व न केवल सामाजिक समस्याओं का हल निकाल सकता है बल्कि आधुनिक अर्थव्यवस्था में भी अपना सशक्त योगदान दे सकता है।

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