Agra News: आंबेडकर विश्वविद्यालय में 'यूपी राइज 2026' का आगाज, इस्तेमाल किए कुकिंग ऑयल से जुड़े स्टार्टअप 'री-ऑयल' ने जीता पहला इनाम
आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में आयोजित 'यूपी राइज 2026' में 'री-ऑयल' स्टार्टअप ने 25 हजार रुपये का पहला पुरस्कार जीता। 11 शॉर्टलिस्टेड मॉडल्स को मिला मेंटर्स का मार्गदर्शन।
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UP Rise 2026: आगरा के युवाओं ने पेश किए 11 इनोवेटिव स्टार्टअप मॉडल, 'री-ऑयल' बना विजेता, 'स्टडी एप' और 'सोलर स्वीप' रहे रनरअप
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आगरा में युवाओं को जॉब सीकर से जॉब क्रिएटर बनाने की पहल, 'यूपी राइज 2026' में 1000 से अधिक छात्रों ने समझा सरकारी योजनाओं का खाका
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Dr BR Ambedkar University Agra: 'यूपी राइज 2026' में चमके युवा इनोवेटर्स, पर्यावरण और एआई बेस्ड प्रोजेक्ट्स को मिला मेंटर्स का साथ
आगरा। उत्तर प्रदेश के युवाओं को परंपरागत डिग्री और नौकरी तलाशने की मानसिकता से आगे ले जाकर खुद का व्यवसाय खड़ा करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी क्रम में ताजनगरी आगरा स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के खंदारी परिसर स्थित जेपी सभागार में 'यूपी राइज 2026' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षित युवाओं को नौकरी मांगने वाले (जॉब सीकर) के स्थान पर दूसरों को रोजगार देने वाला (जॉब क्रिएटर) बनने के लिए एक व्यावहारिक मंच उपलब्ध कराना है।
मंगलवार को आयोजित इस समारोह का औपचारिक उद्घाटन विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी तथा सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के उप निदेशक आत्रेय मिश्रा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। आगरा और इसके निकटवर्ती जिलों के विभिन्न महाविद्यालयों तथा शिक्षण संस्थानों से आए 1,000 से अधिक छात्र-छात्राओं ने इस नवाचार सम्मेलन में पूरे उत्साह के साथ भाग लिया।
'री-ऑयल' को पहला पुरस्कार, 11 मॉडल्स ने प्रभावित किया
प्रतियोगिता के दौरान युवाओं से कुल 30 स्टार्टअप आइडिया प्राप्त हुए थे। तकनीकी व्यवहार्यता, बाजार की मांग और वित्तीय मॉडल के आधार पर विशेषज्ञों की स्क्रीनिंग कमेटी ने इनमें से 11 सबसे प्रभावी मॉडल्स को अंतिम चरण के लिए शॉर्टलिस्ट किया।
अंतिम प्रस्तुतीकरण और जूरी के मूल्यांकन के बाद प्रयुक्त खाद्य तेल (यूज्ड कुकिंग ऑयल) के संग्रहण और पुनः उपयोग के लिए डिजिटल मार्केटप्लेस तैयार करने वाले स्टार्टअप प्रोजेक्ट 'री-ऑयल' (Re-Oil) को प्रथम स्थान प्रदान किया गया। इस विजेता टीम को 25,000 रुपये का मुख्य नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
वहीं विद्यार्थियों की दैनिक अध्ययन प्रणाली को व्यवस्थित करने वाले 'स्टडी एप' (Study App) और छतों व बड़े संयंत्रों पर लगे सोलर पैनलों की धुलाई के लिए रोबोटिक ब्रश तकनीक विकसित करने वाले 'सोलर स्वीप' (Solar Sweep) के मॉडल्स को संयुक्त रूप से रनरअप घोषित किया गया।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विचार प्रमुखता में रहे
शॉर्टलिस्ट किए गए अन्य प्रोजेक्ट्स में तकनीकी नवाचार और सामाजिक समस्याओं के समाधान की स्पष्ट झलक देखने को मिली।
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Kalaverse: पारंपरिक और समकालीन कलाकारों के काम को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जोड़ने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डिजिटल मार्केटप्लेस का मॉडल।
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Build Easy AI: निर्माण क्षेत्र में लागत, सामग्री और समय का सटीक अनुमान लगाने वाला स्वचालित आर्किटेक्चरल टूल।
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Hidden India: भारत के अनछुए और गैर-पारंपरिक पर्यटन स्थलों को बढ़ावा देने वाला डिजिटल ट्रैवल गाइड।
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Saathi EV: ई-रिक्शा चालकों के सामने आने वाली बैटरी ड्रेनेज और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की समस्या को हल करने वाली स्वैपेबल बैटरी तकनीक।
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Temple 2 Green: धार्मिक स्थलों और मंदिरों से निकलने वाले फूलों व जैव कचरे को प्रोसेस कर अगरबत्ती, खाद और दैनिक उपयोग की वस्तुएं बनाने का ग्रीन स्टार्टअप।
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अन्य प्रोजेक्ट्स: इसके अलावा बेकरी और खाद्य उद्योग के लिए फूलों से प्राकृतिक रंग तैयार करने वाला 'ऑर्गेनिक फ्लोरल क्रीम कलर' और क्षेत्रीय कारीगरों को सशक्त बनाने वाला 'द क्राफ्ट डुओ' भी प्रमुख आकर्षण रहे।
कॉर्पोरेट मेंटर्स ने दिया व्यावहारिक मार्गदर्शन
छात्रों को केवल विचार प्रस्तुत करने तक सीमित न रखते हुए उनके बिजनेस मॉडल को धरातल पर टिकाऊ बनाने के लिए कॉरपोरेट जगत के वरिष्ठ विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन दिया। उद्योग जगत के अनुभवी विशेषज्ञ हर्षित देसाई, कपिल त्रिमाल और विवेक गोयल ने बतौर मेंटर छात्रों के प्रेजेंटेशन देखे।
विशेषज्ञों ने छात्र उद्यमियों को सुझाव दिया कि कोई भी स्टार्टअप केवल तकनीकी कोड या विचार से नहीं चलता, बल्कि उसकी वित्तीय लागत, ग्राहक अधिग्रहण लागत (सीएसी) और कानूनी अनुपालन सबसे अहम होते हैं। मेंटर्स ने छात्रों को प्रोटोटाइप से न्यूनतम व्यावहारिक उत्पाद (एमवीपी) विकसित करने और शुरुआती पूंजी जुटाने के तौर-तरीके समझाए।
सरकारी योजनाओं और वित्तीय सहायता का रोडमैप
कार्यक्रम के तकनीकी सत्र में युवाओं को उत्तर प्रदेश सरकार की विभिन्न उद्यमशीलता, रोजगारपरक और कौशल विकास योजनाओं की बिंदुवार जानकारी दी गई। मंच से विशेषज्ञों ने बताया कि प्रदेश सरकार ने स्टार्टअप्स को शुरुआती वित्तीय मदद देने के लिए 'यूपी स्टार्टअप फंड' का गठन किया है, जिसके माध्यम से सीड कैपिटल और इनक्यूबेशन सहायता दी जाती है।
इसके साथ ही सूक्ष्म और लघु स्तर पर काम शुरू करने वाले युवाओं के लिए 'मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना', प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए 'मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना', तथा तकनीकी रूप से सक्षम बनाने वाली 'फ्री टैबलेट व स्मार्टफोन वितरण योजना' के लाभ गिनाए गए। महिलाओं द्वारा संचालित होने वाले स्टार्टअप्स के लिए 'महिला सामर्थ्य योजना' और बालिकाओं की शिक्षा से जुड़ी 'कन्या सुमंगला योजना' की जानकारी भी साझा की गई, ताकि छात्राएं बिना किसी वित्तीय संकोच के उद्यमिता के क्षेत्र में कदम रख सकें।
विश्वविद्यालय युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध: प्रो. आशु रानी
सभागार को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. आशु रानी ने कहा कि आज के छात्रों में नवाचार और लीक से हटकर सोचने की असीम क्षमता है। उच्च शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी केवल डिग्री बांटने और परीक्षा कराने तक सीमित नहीं हो सकती। विश्वविद्यालयों को ऐसे केंद्र के रूप में विकसित होना होगा, जहां छात्र अपने विचारों का परीक्षण कर सकें और उद्योग के अनुरूप समाधान विकसित कर सकें।
उन्होंने कहा कि 'यूपी राइज 2026' जैसे आयोजन युवाओं में स्वरोजगार के प्रति आत्मविश्वास भरते हैं। जब एक युवा नौकरी मांगने के बजाय अपना उद्यम शुरू करता है, तो वह अपने साथ कई अन्य परिवारों की आजीविका का साधन बनता है।
प्रदेश के 25 शहरों में चलेगा अभियान, अगला पड़ाव मथुरा
आयोजकों ने जानकारी दी कि 'यूपी राइज' कोई एक दिन का आयोजन नहीं है, बल्कि प्रदेश के 25 प्रमुख शहरों के 30 चिन्हित शैक्षणिक संस्थानों में इसका चरणबद्ध संचालन किया जा रहा है। आगरा के बाद इस श्रृंखला का अगला कार्यक्रम 18 सितम्बर 2026 को मथुरा स्थित जीएलए विश्वविद्यालय में आयोजित किया जाएगा। इस पूरे अभियान का अंतिम लक्ष्य प्रदेश के कॉलेजों से कम से कम 500 से अधिक व्यावहारिक स्टार्टअप विचारों की पहचान कर उन्हें सरकारी इनक्यूबेटर और निवेशकों से जोड़ना है।
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