यूपी की जेलों में हाईटेक सुरक्षा का पहरा, एआई कैमरे और इलेक्ट्रिक फेंसिंग से मजबूत हुई घेराबंदी
उत्तर प्रदेश की जेलों में 7 हजार से ज्यादा सीसीटीवी और एआई कैमरों से सख्त निगरानी। ई-प्रिसंस अर्ली रिलीज मॉड्यूल लागू करने वाला यूपी बना देश का पहला राज्य।
राज्य के कारागारों को पूरी तरह सुरक्षित, आधुनिक और अत्याधुनिक संचार तकनीकों से संपन्न बनाने की दिशा में व्यापक बदलाव किए गए हैं। प्रशासनिक पारदर्शिता, सुदृढ़ सुरक्षा चक्र और बंदियों के मानसिक व बौद्धिक सुधार के संकल्प के साथ जेलों की रूपरेखा बदली जा रही है। प्रदेश भर की जेलों में स्थापित सीसीटीवी कैमरों की संख्या सात हजार का आंकड़ा पार कर चुकी है। इसके अलावा संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखने के लिए कृत्रिम मेधा आधारित उन्नत निगरानी तंत्र और बिजली के तारों वाले बाड़ लगाए गए हैं, जिससे जेलों की बाहरी और आंतरिक सुरक्षा अभेद्य बन गई है।
कारागार एवं सुधार सेवाएं के पुलिस महानिदेशक पीसी मीना के अनुसार, जेलों की कार्यप्रणाली को सरल, जवाबदेह और डिजिटल बनाने के लिए आधुनिक तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाया जा रहा है। विगत वर्ष जहां कारागारों में लगभग उन्चास सौ कैमरे सक्रिय थे, वहीं अब इनकी संख्या बढ़ाकर सात हजार से अधिक कर दी गई है। इनमें से 750 से अधिक आधुनिक कैमरे सीधे मुख्यालय स्थित केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से जोड़े गए हैं, जो कृत्रिम मेधा प्रणाली के जरिए बंदियों की हर गतिविधि का विश्लेषण करते हैं। इसके साथ ही बाहरी चारदीवारी पर कंटीले तारों के साथ बिजली संचालित सुरक्षा बाड़ लगाई गई है, जिससे किसी भी प्रकार की अवांछित गतिविधि या सुरक्षा में सेंधमारी की आशंका को समाप्त किया जा सके।
सजा पूरी होने से पहले कैदियों की मुक्ति से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और गति लाने के लिए डिजिटल समाधान की नई मिसाल कायम की गई है। इस दिशा में केंद्रीय स्तर पर तैयार किए गए विशेष डिजिटल मॉड्यूल को सफलतापूर्वक लागू करने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है। इस पारदर्शी माध्यम से फाइलों के निपटारे में लगने वाले समय में भारी कमी आई है और पूरी प्रक्रिया कागजी झंझटों से मुक्त होकर पारदर्शी बन चुकी है।
दैनिक प्रशासनिक कामकाज को गति देने के लिए जेलों के कार्यालयों को पूर्ण रूप से कागज रहित बनाने का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। सभी कारागारों में बंदियों के शारीरिक माप और पहचान के लिए विशेष कक्ष तैयार किए गए हैं। अदालती कार्यवाही और मुकदमों की सुनवाई को आसान व सुरक्षित बनाने के लिए सभी परिसरों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधाएं स्थापित की गई हैं, जिससे बंदियों को अदालत ले जाने में होने वाली सुरक्षा संबंधी जोखिमों और संसाधनों की बचत हो रही है। इसके साथ ही वैकल्पिक ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र और 58 जेलों में सौर प्रकाश स्तंभ लगाए गए हैं। बंदियों को रचनात्मक दिशा देने के लिए 74 कारागारों में आधुनिक डिजिटल अध्ययन केंद्र स्थापित किए गए हैं, ताकि वे अपनी सजा के दौरान ज्ञानार्जन कर समाज की मुख्यधारा में लौटने की तैयारी कर सकें।
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