यूपी में सशक्त हो रही नारी शक्ति, सीएम योगी ने गिनाईं आंगनबाड़ी और स्वयं सहायता समूहों की उपलब्धियां
शारदीय नवरात्र की अष्टमी पर सीएम योगी ने मां महागौरी की पूजा की। उन्होंने आंगनबाड़ी मानदेय वृद्धि, लखपति दीदी और दुग्ध उत्पादक समितियों की सफलताएं साझा कीं।
शारदीय नवरात्र के पावन पर्व पर मां दुर्गा के आठवें स्वरूप देवी महागौरी की विधिवत उपासना के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की आधी आबादी के कल्याण, सम्मान और स्वावलंबन के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि समाज का सर्वांगीण विकास तभी यथार्थ रूप ले सकता है जब प्रत्येक महिला सुरक्षित महसूस करे, हर कन्या को उचित पोषण मिले और बहनें सम्मानपूर्वक आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। राज्य में चलाए जा रहे विभिन्न अभियानों के माध्यम से महिलाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़कर उनकी क्षमताओं को विस्तार दिया जा रहा है।
पूर्ववर्ती शासनकाल की कार्यप्रणाली की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि पहले बच्चों और धात्री माताओं के पोषण आहार वितरण में अनियमितताओं का बोलबाला था। व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन करते हुए तैयार राशन बनाने और जरूरतमंदों तक पहुंचाने का उत्तरदायित्व सीधे महिला स्वयं सहायता समूहों के हाथों में सौंपा गया। इस पारदर्शी पहल से न केवल कुपोषण के खिलाफ चल रहे महाअभियान को नई शक्ति मिली, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए नियमित आमदनी के नए रास्ते भी खुले।
शिशुओं के आरंभिक शारीरिक विकास और बुनियादी प्राथमिक शिक्षा की नींव मजबूत करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के योगदान का संज्ञान लेते हुए शासन ने उनके मानदेय में चार गुना वृद्धि की है। पहले मिलने वाले तीन हजार रुपये के स्थान पर अब बारह हजार रुपये प्रति माह की निश्चित धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ ही उन्हें और उनके परिवारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य बीमा योजना के दायरे में भी शामिल किया गया है।
ग्रामीण अंचल की आर्थिकी को गति देने में मातृशक्ति की भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि बलिनी, सामर्थ्य, काशी, बाबा गोरखनाथ और सृजनी जैसी प्रमुख दुग्ध उत्पादक कंपनियों से प्रदेश के इकतीस जनपदों की चार लाख से अधिक ग्रामीण महिलाएं सीधे जुड़ चुकी हैं। ये महिलाएं पशुपालन और दुग्ध संकलन के जरिए अपनी पारिवारिक आय बढ़ाकर सफल उद्यमिता का उदाहरण प्रस्तुत कर रही हैं। इसके अतिरिक्त प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर तैनात बैंकिंग सखी महिलाओं ने गांव-गांव वित्तीय सुविधाएं पहुंचाकर आर्थिक समावेशन को मजबूती दी है।
वर्तमान में राज्य भर में एक करोड़ बीस लाख से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से संगठित होकर अपनी आजीविका संवार रही हैं। लखपति दीदी कार्यक्रम के जरिए हुनरमंद महिलाएं अपनी कड़ी मेहनत और कौशल से स्थायी आय अर्जित कर रही हैं, जिससे परिवारों का जीवन स्तर सुधरा है। सुरक्षा व्यवस्था, सामाजिक सम्मान, आधुनिक पोषण और आर्थिक समृद्धि के इस चतुर्मुखी तंत्र ने प्रदेश में महिला सशक्तीकरण की धारणा को धरातल पर चरितार्थ किया है।
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